सर्दियां आने से पहले ही डेंगू का ख़तरा बहुत अधिक बढ़ जाता है. ये एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिससे हर साल देश में हज़ारों लोगों की मौत हो जाती है. डेंगू मच्छरों के कारण होता है, इसलिए हमें अपने आस-पास सफ़ाई करने की बहुत ज़रूरत है ताकि डेंगू के मच्छर उसमें न पनपे. इसके अलावा इस बीमारी के बारे में हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी जानकारी होना भी ज़रूरी है, तो डेंगू (Dengue) कैसे होता इसके लक्षण क्या है और इससे बचने के उपाय क्या हैं? सबकुछ फटाफट जान लो.

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बदलते मौसम के चलते डेंगू के मामले दिन पर दिन बढ़ रहे हैं. अगर सिर्फ़ दिल्ली की बात करें तो अब तक डेंगू के हज़ार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जो 2018 में के बाद से सबसे अधिक मामले हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन सालों में 1 जनवरी से 16 अक्टूबर तक 2020 में 489, 2019 में 833 और 2018 में 1,310 डेंगू के मामले दर्ज किए गए थे.

डेंगू कैसे फैलता है और कब होता है?

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जुलाई से अक्टूबर के बीच में डेंगू बहुत तेज़ी से फैलता है. ये मादा मच्छर एडीज इजिप्टी (Aedes Aegypti) के काटने से होता है. इस मच्छर की पहचान उसके शरीर पर चीतें जैसी धारियों से होती है. ये मच्छर ज़्यादा ऊंचा नहीं उड़ पाता है. डेंगू एक इंसान से दूसरे इंसान में इसी मच्छर की वजह से जाता है, जब ये मच्छर किसी डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को काटता है तो वो उसका ख़ून चूस लेता है. इस तरह से जब ये संक्रमित मच्छर किसी और व्यक्ति को काटता है वो भी डें वायरस से पीड़ित हो जाता है. 

डेंगू के लक्षण

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो, डेंगू शुरू शुरू में फ़्लू की तरह ही होता है, क्योंकि एडीज़ इजिप्टी मच्छर के काटने का प्रभाव तुरंत नहीं दिखता है. इस वजह से लोग समझ नहीं पाते हैं. इसका प्रभाव 4 से 10 दिनों के बाद दिखता है. एक बार डेंगू से संक्रमित हो चुके लोगों को दोबारा भी संक्रमण हो सकता है. 

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तेज़ बुखार आने के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई देते हैं:

1. गले में समस्या होना

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डेंगू के आसार होने पर गले में हल्का-हल्का दर्द होना शुरू हो जाता है. दर्द के बढ़ने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर कर लें.

2. हड्डी या जोड़ों में दर्द

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बाकी फ़्लू की तरह डेंगू होने पर भी शरीर में दर्द होना शुरू हो जाता है. ये दर्द सबसे ज़्यादा हड्डी और जोड़ों में होता है.

3. सिर दर्द होना

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डेंगू के एक अन्य लक्षण में सिर दर्द भी आता है, जब दर्द असहनीय हो जाए तो एक बार डॉक्टर से सलाह ज़रूर कर लें.

4. पेट की समस्या

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डेंगू में लीवर का आकार बढ़ जाने से पेट में पानी की अधिकता हो जाती है, जिससे पेट में दर्द की शिकायत अधिक रहती है.

5. मतली और उल्टी आना  

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6. त्वचा पर रैशेज़ होना

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शरीर में चेचक जैसे लाल रंग के चकत्ते पड़ने लगते हैं तो ये भी डेंगू का एक लक्षण हो सकता है. आमतौर पर डेंगू होने पर लाल रंग के चकत्ते (Rashes) चेहरे, गर्दन और छाती पर होते हैं.

7. आंखों के पीछे वाले हिस्से में दर्द होना 

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डेंगू की समस्या होने पर बहुत तेज़ बुख़ार आता है, जिसके कारण आंखों के पीछे दर्द होने लगता है. 

8. बहुत ज़्यादा कमज़ोरी का एहसास होना

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डेंगू होने पर शरीर टूटने लगता है, जिसकी वजह से थकान और कमज़ोरी महसूस होती है. इसके साथ ही लोगों को उल्टी, जी मिचलाने की समस्या भी होने लगती है.

9. भूख लगना बंद हो जाती है

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डेंगू होने पर पेट से जुड़ी कई समस्याएं होने लगती हैं उन्हीं में से एक भूख न लगना भी है. खाने का मन बिल्कुल नहीं होता है.

10. मुंह का स्वाद ख़राब होना

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कोई भी बुख़ार हो जाने पर मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है. कुछ भी खाओ सब फीका फीका लगता है. ऐसा ही डेंगू में भी होता है.

वैसे तो डेंगू से संक्रमित लोग एक या दो हफ़्ते के अंदर ठीक हो जाते हैं, लेकिन जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिलता है उनकी समस्या बढ़ने लगती है. जैसे, पेट में असहनीय दर्द होना, उल्टी बंद न होना और पेशाब या उल्टी में ख़ून आना ये स्थिति जानलेवा हो सकती है. इसलिए इसके लक्षणों को पहचान कर तुरंत इलाज कराएं.
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डेंगू का इलाज

डेंगू की आशंका होने पर डॉक्टर सबसे पहले ख़ून की जांच कराने को कहते हैं. इसके बाद डेंगू होने पर इसके लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू होता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, डेंगू बुखार के लिए कोई अलग से इलाज नहीं है. डॉक्टर बस सबसे ज़्यादा तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं. डेंगू में प्लेटलेट्स की मात्रा में भी गिरने लगती है ऐसे में मरीज़ को ज़्यादा बेहतर इलाज की ज़रूरत होती है.

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डेंगू से कैसे बचें?

डेंगू से सुरक्षित रहने के लिए जितना हो सके दिन में फ़ुल कपड़े पहनें. क्योंकि डेंगू के मच्छर दिन में सबसे ज़्यादा काटते हैं. इसके अलावा, डेंगू के मच्छर पानी में ज़्यादा पनपते हैं तो पानी को एक जगह पर इकट्ठा होने न दें. इन बातों का ध्यान रख कर डेंगू जैसी ख़तरनाक बीमारी से बचा जा सकता है.

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आपको बता दें, गर्भवती महिलाओं को डेंगू होने पर पेट में पल रहे शिशु को भी वायरस फैलना का ख़तरा रहता है. इसलिए गर्भावस्था के दौरान बहुत सावधानी बरतनी चाहिए.