पिछले दिनों ‘एलजीबीटी’ शब्द मीडिया के गलियारों में काफ़ी चर्चित रहा. हर अख़बार के पन्ने, टीवी स्क्रीन और सोशल मीडिया पर यह शब्द छाया रहा. बावजूद इन सबके, बहुत सारे लोगों को इसका स्पष्ट और साफ़ मतलब समझ नहीं आया. आखिर इस मुद्दे के छाये रहने की वजह क्या थी? कौन वे लोग हैं, जो खुद को L,G,B,T,I,Q कहते हैं और आम लोग कैसे फर्क़ करें कि कौन L,G,B,T,I,Q हैं और कौन नहीं, ये अभी भी स्पष्ट नहीं है. तो आइये, हम आपको बताते हैं कि आखिर L,G,B,T,I,Q का मतलब होता क्या है. शायद इसे पढ़ने के बाद आम लोगों से फ़र्क करने में आपको आसानी होगी.

L- ‘लेस्बियन’:

जब एक औरत को एक औरत से ही आकर्षण हो, तो उन्हें ‘लेस्बियन’ कहा जाता है. आम तौर पर माना जाता है कि किन्हीं दो ‘लेस्बियन’ पार्टनर्स में एक का व्यक्तित्व आदमी जैसा होगा जिसे ‘बुच’ कहा जाता है. वो पैंट-शर्ट पहनती होगी और छोटे बाल रखना पसंद करती होगी. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. ये भी ज़रूरी नहीं कि एक आदमी की तरह दिखे और दूसरी औरत की तरह.

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G - ‘गे’:

जब एक आदमी को एक आदमी से ही आकर्षण हो तो उन्हें ‘गे’ कहा जाता है. वैसे ‘गे’ शब्द का इस्तेमाल कई बार सभी समलैंगिकों यानि पूरे समुदाय, जिसमें ‘लेस्बियन’, ‘गे’, ‘बाइसेक्शुअल’ सभी शामिल हैं, के लिए भी किया जाता है. जैसे आपने अकसर सुना होगा ‘गे कम्यूनिटी’.

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B – ‘बाईसेक्शुअल’:

जब किसी मर्द या औरत को मर्द और औरत दोनों से ही प्यार हो तो उन्हें ‘बाईसेक्शुअल’ कहा जाता है. यानि एक मर्द ‘बाईसेक्शुअल’ हो सकता है और एक औरत भी.

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T – ‘ट्रांसजेंडर’:

वो इंसान, जिनका शरीर पैदा होने के व़क्त कुछ और था और जब वो बड़े होकर खुद को समझे तो एकदम उलटे महसूस करने लगे. जैसे पैदा होने के व़क्त बच्चे के निजी अंग पुरुष के थे और उसे लड़का माना गया. पर समय के साथ उसने खुद को समझा और पाया कि वो तो लड़की जैसा महसूस करता है, यानि वो ‘ट्रांसजेंडर’ है. लड़कियों के लिए भी हू-ब-हू यही स्थिति होती है. भारत में ट्रांसजेंडर्स को ‘हिजड़ा/किन्नर’ कह कर बुलाया जाता है. हिजड़ा एक ख़ास समुदाय का नाम है, जिनके अपने कायदे, तौर-तरीके होते हैं और वे सभी एक परिवार की तरह रहते हैं. हिजड़ा, अरावनी, कोथी, शिव-शक्ति और जोग्ती हिजड़ा – ये देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे ऐसे समुदायों के स्थानीय नाम हैं.

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I – ‘इंटर-सेक्स’:

पैदाइश के व़क्त जिस व्यक्ति के निजी अंगों से ये साफ़ नहीं होता कि वो पुरुष हैं या औरत, उन्हें ‘इंटर-सेक्स’ कहते हैं.

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Q – ‘क्वीयर’:

जो इंसान न अपनी पहचान तय कर पाए हैं, न ही शारीरिक चाहत, यानि जो ना खुद को आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर’ मानते हैं और न ही ‘लेस्बियन’, ‘गे’ या ‘बाईसेक्शुअल’, उन्हें ‘क्वीयर’ कहते हैं. ‘क्वीयर’ के ‘Q’ को ‘क्वेश्चनिंग’ भी समझा जाता है. यानि वो, जिनके मन में अपनी पहचान और शारीरिक चाहत को लेकर अभी भी बहुत सवाल हैं.

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हम आपको बता दें कि साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर्स को तीसरे लिंग की संवैधानिक पहचान दी थी, जिसके तहत उनके लिए आरक्षण की भी सिफ़ारिश की गई थी. बावजूद इन सबके आज भी हमारा समाज ट्रांसजेंडर्स को स्वीकारने को तैयार नहीं है. आज भी उन्हें हीन भावना और उपेक्षा की नज़रों से देखा जाता है. इसीलिए, वैसे लोगों को समाज की गलत धारणाओँ के कारण दो व़क्त की रोटी के लिए भी तरसना पड़ जाता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब सरकार ने उन्हें संवैधानिक तौर पर अपना लिया है, तो हमें उन्हें सामाजिक रूप से अपनाने में आपत्ति क्यों हैं?

Article Source- BBC