झांसी में एक 82 वर्षीय हिन्दू व्यक्ति का अंतिम संस्कार मुस्लिम रिवाज़ से किया गया है. उसे जलाने के बजाय दफ़नाया गया है. ये ही उसकी आखिरी इच्छा थी.

मदन मोहन यादव, 'दाऊ समोसे वाले' के नाम से जाने जाते थे. वो पिछले पांच दशकों से अपनी दुकान में मिलने वाले लज़ीज़ समोसों के लिए मशहूर थे. सोमवार को उनका निधन हो गया. लम्बे समय से वो अपने परिवारजनों और दोस्तों से कहा करते थे कि उनकी मौत के बाद उन्हें जलाया न जाये, दफ़नाया जाये. उनका अंतिम संस्कार जेवन शाह कब्रगाह में किया गया.

पुराने शहर में 'दाऊ समोसा वाला' पर खाने के शौकीनों की भीड़ लगी रहती थी. लोग लाइन में लगते थे कि यहां के मशहूर समोसे खा सकें.

मदन मोहन के बच्चे और पड़ोसी बताते हैं कि दोनों ही धर्मों के लिए उनके मन में बहुत सम्मान था और वो दोनों ही धर्मों की परम्पराओं को मानते थे.

उनके बड़े बेटे, अशोक यादव ने बताया कि वो मंदिर के साथ-साथ दरगाह भी जाते थे. रमज़ान के दिनों में वो इफ़्तार के वक़्त रोज़ा खोलने वालों के लिए समोसे भेजा करते थे.
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उनके बेटों को उनकी आख़िरी इच्छा से कोई ऐतराज़ नहीं था, पूरी श्रद्धा से उन्होंने उनका अंतिम संस्कार किया.

ये वाकया धार्मिक सौहार्द का उत्तम उदाहरण है. एक तरफ़ लोग धर्म के नाम पर एक-दूसरे की जान लेने पर आमादा रहते हैं और दूसरी तरफ़ हैं मदन मोहन जैसे लोग, जो दुनिया से जाने के बाद भी समाज को एक अच्छा सन्देश दे जाते हैं.

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