प्यार न धर्म देखता है, न जात देखता है.

बॉलीवुड में इस डायलॉग को बोल कर न जाने कितनी फ़िल्में हिट हुई हैं. बड़ा अच्छा लगता है, जब फ़िल्म में दो अलग धर्मों के प्यार करने वाले आखिकार मिल जाते हैं. लेकिन जब ऐसा ही कुछ असल ज़िन्दगी में सामने आये, तो कुछ ऐसा सुनने को मिलता है, 'उनका और हमारा हिसाब-किताब बिलकुल अलग है'.

फ़िल्मों में जिस प्यार को आप सेलिब्रेट करते हैं, उसी प्यार के ख़िलाफ़ तब हो जाते हैं, जब अपनी बारी आती है. कुछ ऐसा ही हुआ अंकिता और फ़ैज़ के साथ. दोनों को IIM इंदौर में एक-दूसरे से प्यार हुआ और फ़ैसला कर लिया कि अब साथ रहना है. यहां भी परेशानी वही थी, 'दोनों के समाज में अंतर'. अंकिता दो सालों से अपने मां-पिता को मना रही थी, लेकिन उनकी कई चिंताएं थी, जैसे मुस्लिम समाज में लड़के को 4 शादियां करने की छूट होती है, वो मांसाहारी होते हैं. उन्हें ये भी चिंता थी कि कहीं ये लड़का उनकी बेटी का धर्मपरिवर्तन न करवा दे. माता-पिता होने के नाते, अंकिता के पेरेंट्स की चिंता जायज़ थी और फ़ैज़ ये सभी बातें करने को तैयार था. दो साल तक बात की गयी, लेकिन अंकिता के घरवाले कन्विंस नहीं हुए.

इन दोनों की शादी को वैसे दो साल हो चुके हैं और ये 'Happily Married' हैं और इनके घरवालों ने भी इन्हें अपना लिया है. लेकिन शादी से पहले की जो कहानी थी, उसमें इतने ट्विस्ट थे कि इससे बॉलीवुड की दो-चार फ़िल्मों तो निकल ही सकती हैं.

एक दिन अंकिता के घर की डोरबेल बजी, तो सामने फ़ैज़ था. उसके मम्मी-पापा ने जब फ़ैज़ को देखा, तो चौंक गये. वो अंकिता के पिता से मिलने आया था. उसने उनके सभी संदेह दूर करने की कोशिश की और कुछ ऐसी स्पीच दी कि अंकिता को लगा कि बस अब मान ही जाएंगे. उल्टे उसके पापा ने बड़ी तमीज़ से फ़ैज़ को जाने को कहा. उन्होंने साफ़ कर दिया कि अगर अंकिता और फ़ैज़ उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ शादी करते हैं, तो वो इसका हिस्सा नहीं बनने वाले.

इस घटना के बाद अंकिता और फ़ैज़ ने Decide कर लिया कि वो शादी करेंगे और कोर्ट मैरिज करेंगे. उन्होंने फरवरी में शादी की डेट फाइनल की और अपने-अपने घरों में बता दिया. फ़ैज़ के घरवाले जल्दी-जल्दी लखनऊ से आने को तैयार हो गए और अंकिता के पिता ने सिर्फ़ उसकी मम्मी और भाई को शादी अटेंड करने के लिए भेजा.

अंकिता के घरवालों को जो सबसे बड़ी चिंता थी, वो ये कि लड़का कहीं 4 बार शादी न कर ले. तो इन दोनों ने एक-दूसरे से ही 4 बार शादी कर इस प्रॉब्लम को ही ख़त्म कर दिया.

पहली और दूसरी शादी

दोनों ने 17 फरवरी 2015 को पहले एक छोटे मंदिर में हिन्दू रीती-रिवाज़ से शादी की और उसके बाद कोर्ट में. Special Marriage Act के तहत किसी भी मुस्लिम के पास 4 बार शादी करने का अधिकार नहीं रह जाता.

इन दोनों ने अपनी शादी रजिस्टर तो करवा ली थी, लेकिन अभी तक दोस्तों को नहीं बुलाया था. दोनों ये ऐसी जगह की तलाश में थे, जहां दोनों के लिमिटेड दोस्त आ सकें और इनकी शादी को हमेशा याद रखें. जगह Decide हुई गोवा और फिर सारे दोस्तों को Invitation भेज गया.

अंकिता और फ़ैज़ एक मज़ेदार और यादगार शादी चाहते थे, इसलिए इस प्रोग्राम को दो दिनों में बांट दिया.

एक दिन मेहंदी-संगीत के बाद निकाह हुआ और अगले दिन रात में मंडप वाली शादी.

दोनों ने इस बात का भी ख़्याल रखा कि शादी में लोग अच्छे से एन्जॉय कर सकें, इसलिए पार्टी को थीम भी दी गयी. एक दिन Moroccan थीम की पार्टी हुई और दूसरे दिन Mascaraed स्टाइल में.

अंकिता और फ़ैज़ की फ़िल्मी लव स्टोरी आप यहां पढ़ सकते हैं.

दोनों की शादी को दो साल हो चुके हैं. न ही अंकिता ने अपना धर्म परिवर्तन किया है और न ही फ़ैज़ हिन्दू बना. लेकिन दोनों एक-दूसरे के साथी ज़रूर बन गए. दोनों एक-दूसरे के धर्मों की इज़्ज़त करते हैं और इनके परिवारवाले भी. फ़ैज़ का मानना है कि अगर लड़ाई-झगड़े की जगह प्यार को तरजीह दी जाए, तो हर घर में ईद की सेवईं और दिवाली की मिठाई की मिठास होगी.

अंकिता के घर अभी भी घी में भरे हुए आलू के परांठे बनते हैं और फ़ैज़ के घर इत्र की ख़ुशबू वाली फिरनी.