आपको जानकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तान में भी देवी मां पूजी जाती हैं. पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य में स्थित मां हिंगलाज मंदिर में हिंगलाज शक्तिपीठ की प्रतिरूप देवी की प्राचीन दर्शनीय प्रतिमा विराजमान हैं. माता हिंगलाज की महिमा सिर्फ़ कराची और पाकिस्तान में ही नहीं, अपितु पूरे भारत में है. कराची जिले के बाड़ी कलां में विराजमान माता का ये मंदिर सुरम्य पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है.

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माता को आप किसी भी रुप में याद करें इससे माता को कोई फर्क नहीं पड़ता, बस जरुरी है कि आपकी श्रद्धा मां में होनी चाहिए. इसकी एक जीती-जागती मिसाल है, पाकिस्तान में स्थित माता का एक शक्तिपीठ. इस शक्तिपीठ को जहां हिन्दू 'देवी हिंगलाज' के रूप में पूजते हैं, वहीं मुसलमान 'नानी का हज' कहते हैं. यही कारण है कि इस शक्तिपीठ में आकर हिंदू और मुसलमान का भेदभाव मिट जाता है. दोनों ही संप्रदाय के लोग भक्ति पूर्वक इस मंदिर में सिर झुकाते हैं.

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हिंगलाज देवी शक्तिपीठ के विषय में ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि 'जो एक बार माता हिंगलाज के दर्शन कर लेता है, उसे पूर्वजन्म के कर्मों का दंड नहीं भुगतना पड़ता है.'

पौराणिक कथानुसार, जब भगवान शंकर माता सती के मृत शरीर को अपने कंधे पर लेकर तांडव नृत्य करने लगे, तो ब्रह्माण्ड को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता के मृत शरीर को 51 भागों में काट दिया था. मान्यतानुसार हिंगलाज ही वह स्थान है, जहां माता का सिर गिरा था.

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ये मन्दिर यहां इतना विख्यात है कि इस स्थान पर वर्ष भर मेले जैसा माहौल रहता है. नवरात्रि के दौरान तो यहां पर नौ दिनों तक शक्ति की उपासना का विशेष आयोजन होता है. सिंध-कराची के हज़ारों श्रद्धालु यहां माता के दर्शन को आते हैं.

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