How Abu Salem became a Don in India: ये बात बिल्कुल सही है कि कोई भी इंसान मां के पेट से जुर्म की दुनिया में क़दम नहीं रखता. ग़रीबी, मजबूरी, किसी को देखकर प्रभावित होने या अपना दबदबा बनाने जैसे विचार इंसान को क्राइम की दुनिया की ओर धकेल देते हैं. ये एक ऐसी काली दुनिया है जिसमें एक बार क़दम रखने के बाद पीछे मुड़ना मुश्किल हो जाता है. वहीं, इस दुनिया में मौत हर वक़्त बांहे फैलाए खड़ी रहती है. 


तो फिर अबू सलेम के साथ ऐसा क्या हुआ कि वो छोटा मोटा डॉन नहीं बल्कि अंडरवर्ल्ड का एक बड़ा चेहरा बन गया. आइये, इस लेख में हम विस्तार से आपको बताते हैं अबू सलेम की पूरी कहानी.    

आइये, अब विस्तार से जानते हैं अबू सलेम (How Abu Salem became a Don in India) के बारे में. 

1993 मुंबई बम धमाका  

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How Abu Salem became a Don in India: सबसे पहले तो आप ये जान लें कि अबू सलेम किस जुर्म की सज़ा काट रहा है. अबू सलेम सहित 6 लोगों को 12 मार्च 1993 के मुंबई बम धमाकों के लिए दोषी ठहराया गया था. ये सिलसिलेवार बम धमाके (13) थे, जिसमें क़रीब 257 लोगों की जान गई थी और 713 लोग जख़्मी हुए थे. इसके अलावा, 27 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था. 


इन धमाकों का मास्टरमाइंड और कोई नहीं बल्कि दाऊद इब्राहिम था. इस मामले में 2017 को अबू सलेम सहित 6 लोगों को दोषी ठहराया गया. अबू सलेम और करीमुल्लाह ख़ान को उम्र क़ैद, तो ताहिर मर्चेंट और फ़िरोज अब्दुल राशिद ख़ान को मौत की सज़ा सुनाई गई थी. 

18 सितंबर 2002 को पुर्तगाल से अबू सलेम और उसकी प्रेमिका मोनिका बेदी को भारत लाया गया था. वहीं, पुर्तगाल से साथ हुई एक संधि की वजह से अबू सलेम को फ़ांसी या आजीवन कारावास नहीं दिया जा सकता था. इसलिये, माना जा रहा है कि 2030 तक अबू सलेम को रिहा कर दिया जाएगा.     

पिता थे पेशे से वकील   

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अबू सलेम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है. उसके पिता अब्दुल कय्यूम अंसारी एक वकील थे. वो मुक़दमों के लिए आसपास के शहरों में जाया करते थे. वहीं, एक बार वो अपनी मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे और एक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई थी. अबू सलेम के तीन भाई और तीन बहनें थीं. पिता की मौत के बाद परिवार को ग़रीबी में दिन बिताने पड़े. मां किसी तरह बच्चों को पेट पाल रही थी.  

जब अबू सलेम काम की तलाश में दिल्ली आया

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How Abu Salem became a Don in India: अबू सलेम पर किताब लिखने वाले पत्रकार हुसैन ज़ैदी का कहना है कि अबू सलेम का बचपन काफ़ी ग़रीबी और अभावों में गुज़रा. वो काम की तलाश में दिल्ली आ गया था. वहां उसने बाइक रिपेयरिंग का काम किया, लेकिन काम सही नहीं चला, तो वो बंबई चला गया. तब अबू सलेम की उम्र 20-22 साल रही होगी. 


बंबई आकर उसने अपना एक छोटा धंधा शुरू किया. वो बंबई के जोगेश्वरी स्थित अराशा शॉपिंग सेंटर (एक मॉल) की दुकान में फ़ैशन के सामान जैसे परफ़्यूम-बेल्ट व अन्य चीज़ें बेचा करता था. 

मुंबई के भाइयों को देखकर जब अबू सलेम हुआ प्रभावित 

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अबू सलेम की मॉल में सामान बेचा करता था, वहां दाऊद इब्राहिम (Who is the biggest gangster in India) की तरह ही भाइयो (Gangsters in India) यानी डॉन का आना जाना लगा रहता था. ये वो दौर (1980-1990) था जब मुंबई में कई युवा डॉन बनने का सपना पाल रहे थे. दाऊद इब्राहिम कई लोगों का रॉल मॉडल बन चुका था. 


अबू सलेम शॉपिंग मॉल में आने-जाने वाले भाइयों (Gangsters in India) को देखता रहता था. वो इन्हें देखकर काफ़ी प्रभावित हुआ. उसके दिमाग़ में भाई बनने का विचार गहराई से बैठ चुका था. वो भी चाहता था कि लोग उससे खौफ़ खाएं और उसका दबदबा हो.    

सोने की स्मगलिंग का काम  

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How Abu Salem became a Don in India: अबू सलेम के फडफड़ाते कदम अब जुर्म की दुनिया में दाखिल हो गए थे. वो मॉल में सामान बेचने के साथ-साथ दाऊद इब्राहिम (Who is the biggest gangster in India) के भाई अनीस इब्राहीम के साथ सोने की तश्करी का काम करने लगा था. अनीस दूसरे लड़कों के साथ अबू सलेम को सोने की डिलीवरी के लिए बुलाया करता था. हालांकि, वो अब तक डायरेक्ट दाऊद के सीधे कांटेक्ट में नहीं आया था, लेकिन वो अब ख़ुद को डॉन जैसा मानने लगा था.  

संजय दत्त को गन की डिलीवरी  

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बीबीसी के मुताबित 1993 को बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने अनीस इब्राहीम को फ़ोन किया कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं और प्रोटेक्शन के लिए उन्हें गन चाहिए. अनीस ने गन की डिलीवरी के लिए अबू सलेम को भेजा. अबू सलेम पहली बार संजय दत्त से मिला था. कहते हैं कि अबू सलेम ने पहली बार अपने सामने किसी फ़िल्म स्टार को देखा था. वो काफ़ी भौचक्का रह गया था. उसने संजय दत्त को क़रीब तीन बार गले लगाया था. 

अबू सलेम कई गन ल गया था, लेकिन संजय दत्त ने सिर्फ़ एक ही गन ली और बाकी गन लेकर अबू सलेम चला गया.    

जब लोगों को अबू सलेम डॉन लगने लगा   

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How Abu Salem became a Don in India: अब तक अबू सलेम मुंबई में डॉन जैसा माहौन नहीं बना पाया था, लेकिन जैसे ही वो दुबई पहुंचा, तो लोगों को फ़ोन पर धमकियां देने लगा, जिससे लोगों को वो डॉन लगने लगा. वहीं, जब उसने गुलशन कुमार का मर्डर करवाया, तो उसका नाम कुख़्यात हो गया. 


वहीं, कुछ गड़बड़ होने की वजह से वो 1989 में गैंग छोड़कर भाग गया था. भागकर वो अमेरिका व यूरोप के कुछ देशों में काम करने लगा. अबू सलेम पर किताब लिखने वाले हुसैन ज़ैदी कहते हैं कि अमेरिका में अबू सलेम का एक पेट्रॉल पंप और एक छोटा थियेटर भी है. 

अबू सलेम दुनिया के कई देशों के साथ पैसों का लेन-देन करता था. वो FBI की नज़र में भी आ गया था और FBI से मिली सूचना के आधार पर उसे भारत ने लिस्बन (पुर्तगाल) में पकड़ा था.