दुनियाभर में एक से बढ़कर एक युद्धा हुए हैं. जापान के समुराई वॉरियर से लेकर नार्वे के वाइकिंग्स वॉरियर तक ने दुनिया में अपने साहस और शौर्य से दुश्मनों को परास्त किया है. इनमें से कोई अपने अच्छे कार्यों के लिए तो कुछ अपने बुरे कार्यों के लिए मशहूर रहे हैं. आज हम बात नार्वे के वाइकिंग्स वॉरियर (Viking Warrior) की ही करने जा रहे हैं, जो अपने विद्रोही कार्यों के लिए कुख़्यात थे. 

ये भी पढ़िए: समुराई योद्धाओं को बर्दाश्त नहीं थी हार, जानिए ये दुनिया के सबसे महान योद्धा क्यों माने जाते थे

8वीं से लेकर 11वीं सदी में उत्तरी यूरोप के Scandinavia (DenmarkNorway and Sweden) क्षेत्र में रहने वाले उन नॉर्स (Norse) लोगों को वाइकिंग्स कहा जाता था जो सिपाही, व्यापारी, समुद्री डाकू या खोजयात्री बनकर यूरोप, एशिया और उत्तरी अटलांटिक द्वीपों में जाकर बस जाते थे. ये लूटपाट के इरादे से अपनी लम्बी नौकाओं में रूस, आइसलैंड, ग्रीनलैंड, स्पेन समेत कई देशों की यात्रा करते थे. इसके बाद समय देखकर एक साथ कई शहरों व प्रान्तों पर धावा बोल देते थे और धन, संपत्ति और कभी-कभी महिलाओं व बच्चों को भी उठाकर ले जाते थे.

teahub

असल में कौन थे Vikings Warrior?

दरअसल, नार्वे में सैकड़ों साल पहले वाइकिंग्स वॉरियर (Viking Warrior) हुआ करते थे. वाइकिंग्स समुदाय का ताल्लुक़ नार्वे और आस-पास के क्षेत्र से था. इनका साम्राज्य मुख्य रूप से लूटपाट के सहारे ही चलता बढ़ता था. इस समुदाय में महिला और पुरुष दोनों ही लूटपाट किया करते थे. ये लूटपाट के लिए लंबे समय तक अपने घरों से दूर रहते थे. लूटपाट करना ही इनकी ख़ासियत नहीं थी. ये असल में योद्धा हुआ करते थे. एक वाइकिंग्स योद्धा 100 दुश्मनों पर भारी पड़ता था. 

वाइकिंग्स वॉरियर (Vikings Warrior) लूटपाट के दौरान तीर, तलवार, कुल्हाड़ी, भाले के अलावा और भी कई घातक हथियारों का इस्तेमाल भी किया करते थे. ये दुनिया के सबसे ख़ूंख़ार लोगों में से एक थे. ये अपने फ़ायदे के लिए दुश्मन की आंख पर तीर, तलवार, कुल्हाड़ी और भाला मारकर उसे एक ही वार में धराशाही कर देते थे.  

‘बर्सरकर’ वाइकिंग्स समुदाय के सबसे बेहतरीन योद्धाओं में से एक थे. ये लोग विद्रोहियों में सबसे अधिक विद्रोही थे. वे वाइकिंग्स चैंपियन योद्धा थे. ‘बर्सरकर योद्धा’ के बारे में कहा जाता है कि ये युद्ध से एक रात पहले एक विशाल मैदान में आग जलाकर उसके चारों ओर नृत्य करते हुए अपने नॉर्स देवताओं का आह्वान करते. 

Puttyandpaint

वाइकिंग्स समुदाय के इन ‘बर्सरकर योद्धा’ के बारे में ये भी कहा जाता है कि ये छाती पर कई तीर लगने के बावजूद उन्हें अनदेखा कर देते और इतने जोश में होते कि उन्हें दर्द भी नहीं होता था. इनकी एक और ख़ासियत ये थी कि ये युद्ध के दौरान किसी भी तरह का ‘कवच’ नहीं पहनते थे. इन्हें अपने कौशल पर इतना भरोसा होता था कि ये नंगी छाती के साथ युद्ध में उतरते थे. वाइकिंग्स दुनिया के सबसे ख़तरनाक विद्रोही योद्धाओं में गिने जाते हैं. 

वाइकिंग्स योद्धा अक्सर समुद्र तटीय शहरों व गांवों में घुसकर लोगों का सब कुछ छीनकर छू मंतर हो जाते थे. ये दुश्मन को मारने के लिए इतने उत्साहित होते कि उन्हें किसी भी चीज़ की परवाह तक नहीं होती थी. इनके इसके जोश और पागलपन दुश्मन की रूह कंपा जाती थीं. कई दुश्मन तो उन्हें देख उलटे भाग लेते थे. 

wallpaperflare

साल 2013 में नॉर्वे के इन नॉर्स योद्धाओं पर Vikings नाम की एक वेब सीरीज़ भी बन चुकी है. की इस सीरीज़ के अब तक 7 सीज़न आ चुके हैं. 

ये भी पढ़िए: 13वीं सदी में ‘योद्धा’ की उपाधि पाना नहीं था आसान, गुजरना पड़ता था कई मुश्किल परीक्षाओं से