करेंसी कौड़ी, फूटी कौड़ी, दमड़ी, धेला और पाई: भारत (India) में समय-समय पर करेंसी (Currency) में बदलाव हुए हैं. मुग़लकाल से लेकर आज़ादी के बाद तक कई बार देश की करेंसी में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी. आज RBI अधिनियम 1934 के तहत मुद्रा जारी करता है. जनवरी 1938 में रिजर्व बैंक द्वारा 5 रुपये का पहला नोट जारी किया गया था. जबकि फ़रवरी-जून 1938 में 10 रुपये, 100 रुपये, 1000 रुपये और 10,000 रुपये के नॉट जारी किये गये थे.

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ब्रिटिश काल के दौरान 1 रुपये को पहली बार 30 नवंबर, 1917 को पेश किया गया था. इसके बाद 2 रुपये और 8 रुपये को भी जारी किया गया. लेकिन 1 जनवरी, 1926 को 8 रुपये को बंद कर दिया गया. अगस्त 1940 में 1 रुपया पुनः जारी किया गया. जबकि सन 1950 को पहला पोस्ट-इंडिपेंडेंस 1 और 1.2 पैसे के सिक्कों के साथ 1 और 2 आना भी जारी किये गए थे. तभी से रुपये को अधिकारिक रूप से भारतीय मुद्रा के रूप में स्वीकार किया गया.

आज हम आपको दशकों पीछे लेकर जाएंगे. जब भारत में रुपया, पैसा और आना से भी छोटी करेंसी कौड़ी, फूटी कौड़ी, दमड़ी, धेला और पाई चलन में थे. तब यही भारतवासियों की सबसे छोटी करेंसी हुआ करती थी. भारत में सबसे पहली मुद्रा (Currency) की इकाई ‘फूटी कौड़ी’ थी. चलिए जानते हैं आख़िर उस दौर में कौड़ी, फूटी कौड़ी, दमड़ी, धेला और पाई की क़ीमत रुपये से कितने कम होती थी!

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‘फूटी कौड़ी’ मिलकर बनती थी ‘कौड़ी’

3 फूटी कौड़ी = 1 कौड़ी,

10 कौड़ी = 1 दमड़ी,

2 दमड़ी = 1 धेला,

1 धेला = 1.5 पाई,

3 पाई = 1 पैसा,

4 पैसा = 1 आना,

16 आना – 1 रुपया

इस तरह फूटी कौड़ी से कौड़ी, कौड़ी से दमड़ी, दमड़ी से धेला, धेला से पाई, पाई से पैसा, पैसा से आना और आना से रुपया बनता था. भारत में जब 4 पैसे का 1 आना होता था तब 16 आने का 1 रुपया बनता था. उस समय 16 X 4 = 64 पैसे का 1 रुपया होता था. लेकिन जब रुपये का दशमलवीकरण किया गया यानि डेसिमल सिस्टम में बदला तो 100 पैसे का 1 रुपया बना. तब 16 आने का 1 रुपया उस समय 1 आना =1/16 रुपया यानी 1 आना = 6.25 पैसा हुआ.

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इस हिसाब से 4 आने का मतलब 25 पैसा, 8 आने का मतलब 50 पैसा, 16 आने का मतलब 1 रुपया. हालांकि, सन 1957 में आना को Demonetized करके 5 पैसे का सिक्का जारी किया गया. लेकिन 5 पैसे का सिक्का भी साल 1994 में चलन से बाहर कर दिया गया.

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भारत में आज़ादी के बाद 5 पैसा, 10 पैसा, 20 पैसा, 25 पैसा और 50 पैसे के सिक्के भी जारी किये गए थे. सिक्का अधिनियम, 1906 की धारा 15A के तहत भारत सरकार ने 30 जून, 2011 से देश में 25 पैसे और उससे कम मूल्य के सभी सिक्कों को चलन से बाहर कर दिया था. आज भारत में रुपये की सबसे  छोटी इकाई 50 पैसे का सिक्का है.

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