'जोगी रा सारा रा रा रा' करते हुए फागुन का महीना दरवाज़े पर अपनी दस्तक दे चुका है. कभी बात न करने वाले लोग एक बार फिर साल भर के गिले-शिकवे भुला कर एक-दूसरे पर रंग डालेंगे और रंगों के इस त्योहार में लाल, नीले, पीले रंगों में रंगे दिखाई देंगे. बच्चे, बूढों और नौजवानों के बजाय हर तरफ़ बस वो जोगी दिखाई देंगे, जिनका ज़िक्र हमारे फागुन के लोक गीतों में दिखाई देता है. वैसे भी इन लोक गीतों के बिना होली का मज़ा भी अधूरा-सा ही लगता है. तभी तो हर जगह हाथों में ढोल और ढपली लिए जोगीरा, होली के दिन मस्ती में डूबे दिखाई देते हैं.

आज हम आपके लिए अलग-अलग राज्यों के फागुन के वहीं गीत को ले कर आये हैं, जिनकी धुन पर जोगीरा, सारा रा रा रा करते हैं.

होली की बात चल पड़ी है, तो शुरुआत वहीं से करनी चाहिए, जहां की होली के लिए दुनिया दीवानी है. आख़िरकार भगवान कृष्ण भी तो इसी ब्रज की होली के लिए पहचाने जाते हैं.

भांग के नशे में झूमते होलिये और गवैय्यों की टोली. ऐसा नज़ारा सिर्फ़ पूर्वी UP और बिहार के हिस्सों में ही दिखाई दे सकता है. जहां के होली गीतों में गालियां भी इतने प्यार से दी जाती है कि किसी के बुरा मानने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

UP, बिहार की बात चल पड़ी है, तो मिथिलांचल को कैसे भूल सकते हैं? अरे वही मिथिलांचल भाई, जिसकी होली में भाभी अपने देवरों को सुनाती जाती हैं, पर देवर भले कभी माने हैं?

साल भर नैनों से चलते बाण और लुक्का-छिपी के बीच आख़िरकार वो दिन भी आता है, जब प्रेम में डूबे जोड़ों को होली खेलने का मौका मिलता है. होली का त्यौहार और प्रेम मिल कर इसमें ऐसा रंग लगते हैं कि सारी लाज-शर्म घर के चौखट में टंगी राज जाती है.

ज़िन्दगी की भाग-दौड़ से दूर एक दिन फागुन के नाम करके सभी चिंताओं को भूलने का नाम ही होली. छत्तीसगढ़ी लोक गीतों में भी इसी बात का सन्देश दिया जाता है कि भइया ये लाइफ़ बार-बार नहीं मिलती, इसलिए इसे ऐसे जियो कि हर दिन नई ज़िन्दगी लगे.

दोस्त इस लिस्ट में कुछ और भी होली के लोक गीत हम जानबूझ कर छोड़े जा रहे हैं, क्योंकि कुछ गीत आपको भी हमारे साथ, जो बांटने हैं. तो इंतज़ार किस बात का कर रहे हैं, अपने लोक गीतों को हमारे साथ बांटिये और कमेंट में अपने गीतों को हमारे साथ साझा कीजिये.