प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज जिस मुकाम पर मौजूद हैं, वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफ़ी लंबा सफ़र तय किया है. भारत की तरफ़ से वैश्विक स्तर पर राजनीति के क्षेत्र में नेहरु के बाद मोदी ऐसे दूसरे प्रधानमंत्री है, जिन्होंने इतना नाम कमाया है. मोदी जी के जीवन से जुड़ी सफ़लता की इस इबारत को लिखने में उनकी कड़ी मेहनत का सबसे अहम योगदान रहा है. इसी के साथ ही उनकी किस्मत के सितारे भी उन पर हमेशा महरबान रहे हैं.

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हाल ही में कुछ पंडितों ने मोदी जी कि कुंडली का विश्लेषण करके बताया कि उनकी कुंडली लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और बिस्मार्क से काफ़ी मिलती-जुलती है.

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जहां तिलक को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना अभूतपूर्व योगदान देने के लिए जाना जाता है, वहीं बिस्मार्क को जर्मनी को सुपरपावर बनाने के लिए याद किया जाता है. इन दोनों दबंग नेताओं की तरह ही मोदी जी के फ़ैसलों में भी काफ़ी हद तक अलग ही अंदाज़ की दबंगई देखने को मिलती है.

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प्रधानमंत्री मोदी की कुंडली में राहु की अन्तर्दशा है. ऐसी ही दशा गर्म दल के नेता तिलक की कुंडली में भी मौजूद थी.

देश के अब तक के सबसे लोकप्रिय प्रधानमन्त्रियों में से एक नरेन्द्र मोदी का जन्म सन् 1950 में सितम्बर माह की 17 तारीख को हुआ था. उनकी राशि वृश्चिक है, इस राशि का स्वामी मंगल होता है. फ़िलहाल मंगल काफ़ी मजबूत स्थिति बनाये हुए है. जिसकी भी कुंडली में यह योग बनता है, उसके दुश्मनों का सफाया अपने आप ही हो जाता है.

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इसके अलावा मोदी जी की बलवान किस्मत के पीछे उनकी देवी मां में मजबूत श्रद्धा भी है. मोदी देवी के काफ़ी बड़े उपासक हैं. नवरात्र में मोदी पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं. यह सब चीज़ें मिल कर मोदी जी की कुंडली में राजयोग बनाती हैं. इसी राजयोग और अपनी मेहनत के बल पर मोदी जी आज विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे बड़ी गद्दी पर विराजमान हैं.

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