Game of Thrones के लाखों Fans भारत में हैं. ये वो Fans हैं, जो इस शो से जुड़ी एक-एक बात अच्छे से जानते हैं. इस शो का क्रेज़ इस हद तक है कि जिन्होंने ये शो देखा भी नहीं है, वो भी अच्छे से इसके बारे में जानते हैं. मैं भी उन्हीं में से एक हूं. आज इस शो के कैरेक्टर, Tyrion Lannister का रोल प्ले करने वाले Peter Dinklage के बारे में बात करनी है.

ये हैं Peter Dinklage.

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हॉलीवुड के सबसे Successful और कमाई करने वाले एक्टर्स में से एक. Peter पिछले कई सालों से एक्टिंग कर रहे हैं. वो एक Dwarf यानी बौने भी हैं, लेकिन ये उनसे जुड़ा Fact है, इसका न तो उनकी क्षमताओं पर असर हुआ और न ही उन्हें मिलने वाले रोल्स पर.

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Peter ने अपनी शारीरिक कमज़ोरी को अपनी मानसिक मज़बूती से बैलेंस और किया और आज वो लाखों-करोड़ों युवाओं के लिए Idol से काम नहीं हैं.

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भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री और टीवी की दुनिया में आपने एक ऐसे ही टैलेंटेड कलाकार को देखा होगा. इनका नाम है लिलिपुट. लिलिपुट,' देख भाई देख' जैसा कल्ट क्लासिक शो लिख चुके हैं और इसका हिस्सा भी थे. सालों पहले कलम और अदाएगी से अपने टैलेंट का लोहा मनवा चुका ये एक्टर आज पैसों, इज़्ज़त और काम का मोहताज है.

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शायद यही फ़र्क है हॉलीवुड और बॉलीवुड में. दो एक जैसे चैलेंज को फ़ेस करने वाले टैलेंटेड आदमी सिर्फ़ इंडस्ट्री की वजह से इतने अलग मुकाम पर हैं. Peter Dinklage जहां अभी तक हर तरह के रोल कर चुके हैं, वहीं लिलिपुट अभी भी ये सुन रहे हैं कि एक बौना क्या काम करेगा. लिलिपुट इस वक़्त काम की तलाश में लगभग हर डायरेक्टर, निर्माता का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं, लेकिन उन्हें सुनने वाला कोई नहीं है. फ़िल्म इंडस्ट्री ख़ुद को काफ़ी प्रोग्रेसिव मानती है, लेकिन किसी इंसान को सिर्फ़ इसलिए काम नहीं दिया जा रहा क्योंकि वो उनके तय मानकों पर ख़रा नहीं उतरता. और ये तब है, जब वो इंसान सालों पहले ख़ुद को साबित कर चुका है.

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लिलिपुट का असली नाम एम. एम. फ़ारूखी है और उन्होंने अपना नाम 'लिलिपुट' इंडस्ट्री में आने से पहले रखा था. 80 के दशक में बॉलीवुड में शुरुआत करने वाले लिलिपुट ये सोच कर आगे बढ़े थे कि एक बौना अलग-अलग किस्म के रोल कर सकता है. लेकिन हर Stereotype की तरह उन्हें भी सिर्फ़ हंसने-हंसाने तक सीमित रखा गया. टीवी में 'देख भाई देख' से उनकी एक अलग छवि बनी और काम भी मिलना शुरू हुआ लेकिन आज उनके सिर पर कईयों का उधार है. दुःख होता है ये देख कर कि चंद निर्माताओं की छोटी सोच की वजह से आज एक टैलेंटेड आदमी ख़ुद को दोबारा साबित करने की जद्दोजहद में लगा हुआ है.

कुछ एक डायरेक्टर्स, प्रोडूसर्स, एक्टर्स मिल कर दर्शक के बदले का फ़ैसला ले लेते हैं. अपनी सोच के दायरे के हिसाब से वो दर्शक को सिर्फ़ वही दिखाते हैं, जो वो ख़ुद सोचते हैं और इसी का नतीजा है कि लिलिपुट जैसे टैलेंटेड आर्टिस्ट बेसहारा महसूस करते हैं. एक दर्शक होने के नाते हम भी अपनी ज़िम्मेदारी को भूल रहे हैं. हम विविधता को भूल रहे हैं और स्टीरियोटाइप को अपना रहे हैं. हमें ये फ़ैसला लेना होगा कि हम क्या देखना चाहते हैं, वरना एक लिलिपुट, कभी 'Peter Dinklage' नहीं बन पाएगा.