जो Me Too की मशाल आज ऊंची लपटों के साथ जल रही है, उसके पहली तीली 2006 में Tarana Burke ने दी थी. वो पहली महिला हैं, जिन्होंने इस शब्द को यौन हिसा के संदर्भ में सोशल मीडिया पर इस्तेमाल किया था.

कौन हैं Tarana Burke?

न्यू यॉर्क में रहने वाली 45 साल की Taruna Burke एक अफ़्रीकी-अमेरिकी समाजिक कार्यकर्ता हैं. वो Brooklyn में Girls For Gender Equality की सीनियर डायरेक्टर हैं. वो विभिन्न वर्णों की युवतियों के पूर्णत: विकास के लिए काम करती हैं.

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साल 2017 में Tarana Burke को Times Magazine ने Person Of The Year घोषित किया. Burke अपने कॉलेज के दिनों से ही हाशिये पर पड़े लोगों के संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती रही हैं . Me Too अंदोलन की लोकप्रियता के बाद Taana Burke ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से भाषण दिया और सम्मान हासिल किया.

Me Too की शुरुआत

2003 में Tarana Burke तब Just Be Inc. नाम के एक एन.जी.ओ के साथ काम करती थी. वहां वो विभिन्न वर्ण की युवतियों के विकास के लिए काम करती थी. उनकी मुलाक़ात एक लड़की से हुई. लड़की ने Burke से अपनी कहानी साझा की. लड़की ने बताया कि उसकी मां का बॉयफ़्रेंड उसका यौन शोषण करता है. इसे सुनने के बाद Tarana Burke के पास लड़की के दर्द को हल्का करने के लिए कोई शब्द नहीं था. 'Me Too' ही दो शब्द थे, जो तब Tarana Burke ने बोले.

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इसके बाद वो जब भी वो किसी की एेसी कहानी सुनती, तो उससे यही कहती कि तुम अेकली नहीं हो, ऐसा मेरे साथ भी हुआ है (Me Too).

मात्र 500 ट्विटर फॉलोवर्स के साथ Tarana Burke ने इस आंदोलन को खड़ा कर दिया.

ये आंदोलन एक्ट्रेस Alyssa Milano के ट्वीट के बाद दुनिया में पहुंच गया.

CNN को दिए अपने साक्षात्कार में Tarana Burke ने कहा कि वो Me Too को एक आंदोलन बनाना चाहती थी न कि एक वायरल कैंपेन. ये आंदोलन आज से 12 साल पहले शुरू हुआ था लेकिन इसकी लोकप्रिता पिछले 2 साल में बढ़ी है.

Source: india today