हम में से कुछ के घरों में एक पौधा छोटी बोतल या गमले में रहता है, जिसे लोग अक्सर दूसरों के घरों से चुराकर अपने यहां लगाते हैं. ये पौधा सूरज की रौशनी से दूर रहकर भी लम्बे समय तक ग्रीन और फ्रेश लगता है. सही पकड़े हैं! हम मनी प्लांट की ही बात कर रहे हैं.

मनी प्लांट एक ऐसा पौधा है, जो ज़्यादातर घरों में इस विश्वास के साथ लगाया जाता है, कि ये घर में रुपये-पैसे की कमी नहीं होने देगा और इसको लगाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आएगी. मगर क्या आपको पता है कि मनी प्लांट को समृद्धि से जोड़ने के पीछे की कहानी क्या है? आइए हम बताते हैं.

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मनी प्लांट से जुड़ी एक प्रचलित लोककथा है. ताइवान में एक ग़रीब किसान था. मेहनत के बावजूद उसकी तरक्की नहीं हो रही थी. इसलिए वो उदास रहने लगा. एक दिन उसे खेत में एक पौधा मिला, जो दिखने में थोड़ा अलग था. किसान उस पौधे को उठाकर घर ले गया और घर के बाहर मिट्टी में रोप दिया. उसने देखा कि पौधा बहुत लचीला है और बिना ज़्यादा देखभाल के भी अपने आप बढ़ता जा रहा है.

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पौधा, जिस तरह से बिना किसी सहायता के अपने आप ही बढ़ रहा था, किसान को इससे प्रेरणा मिली. पौधे के इस विकास ने उसके दिमाग़ में एक सकारात्मक ऊर्जा भर दी. किसान ने निर्णय लिया कि वो पौधे जैसा ही अपने व्यक्तित्व में लचीलापन लाएगा और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहेगा. वो बिना किसी की परवाह किए आगे बढ़ता रहेगा. जल्द ही उस पेड़ में फूल आ गए, तब तक किसान भी अपनी मेहनत से एक सफ़ल व्यवसायी बन चुका था.

लोगों ने किसान की सफ़लता का राज़ उसके घर के बाहर लगे हरे-भरे पौधे को मान लिया और इस तरह धीरे-धीरे लोगों ने उसे समृद्धि से जोड़कर, उसका नाम मनी प्लांट रख दिया.

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इस कहानी के अलावा भी कई मान्यताएं हैं, जिनके अलग-अलग आधार हैं. फेंगशुई के अनुसार, ये पौधा आसपास की हवा को शुद्ध बनाता है. ये रेडिएशन का प्रभाव कम करता है और ऑक्सीज़न छोड़ता है.

कहानी तो जान गए आप, अब एक बात और समझ लीजिए. किसी चीज़ में आस्था हमें हमेशा बल देती है. मगर ज़िन्दगी में कुछ भी पाने के लिए मेहनत बहुत ज़रूरी है. हो सकता है मनी प्लांट आपकी समृद्धि को लम्बे समय तक क़ायम रखे, मगर समृद्धि बढ़ाने के लिए मेहनत आपको ही करनी पड़ेगी.

लखनऊ के शायर मलिकज़ादा जावेद का एक शेर है:

'जिन्हें भरोसा नहीं होता अपनी मेहनत पर, मनी प्लांट घरों में वही लगाते हैं.'