'ये बाबूराव का स्टाइल है रे!' दुनिया में शायद ही कोई ऐसा बॉलीवुड प्रेमी होगा जिसे ये डायलॉग सुन कर हंसी न आए. साल 2000 में आई फ़िल्म 'हेरा-फेरी' बॉलीवुड की उन चंद क्लासिक फ़िल्मों में से है,​ जिसे बार-बार देखने पर भी कोई बोर नहीं होगा. इस फ़िल्म के Evergreen Hit होने के पीछे परेश रावल का बहुत बड़ा हाथ है. ये वो फ़िल्म है जिससे परेश रावल की छवि विलेन से कॉमेडी एक्टर में तब्दील हुई. फ़िल्म में अक्षय, सुनील और परेश की तिगड़ी दिखाई है, लेकिन लोगों की सबसे ज़्यादा तालियां बाबु भईया ने ही बटोरी है. परेश की डॉयलॉग डिलीवरी, चलने का तरीका और कॉमेडी टाइमिंग और एक्सप्रेशन्स ने अक्षय और सुनील को भी पीछे छोड़ दिया.

फ़ोन का ये सीन फ़िल्म की हाईलाइट थी और बाबु भईया हर बार एक अलग अंदाज़ में इसके साथ निपटते दिखे.

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हेल्मट पहन के किडनैपिंग के लिए जाना और फिर पुलिस से भागना, इसमें परेश ने साबित किया कि कॉमेडी के लिए डॉयलॉग ही नहीं, बॉडी लैंग्वेज भी उतनी ही ज़रूरी है.

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पैसा आने से पहले कर्ज़दारों को बुलाना और उधारी वापस करने वाले सीन का तो कोई तोड़ ही नहीं है.

इस फ़िल्म में बाबूराव गणपत राव आप्टे ने एक हाथ से धोती संभाली है और दूसरे से कॉमेडी.

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