भारत में लोगों की बंदूकें सिर्फ़ लड़के की शादी में या दिवाली से पहले साफ़ सफ़ाई के लिए ही निकलती है. वैसे शरीफ़ों या आम नौकरी करने वालों को ये खुशनसीबी भी नहीं मिलती क्योंकि उन्हें बंदूक का लाइसेंस ही नहीं मिलता. भारत में बंदूक का लाइसेंस पाना उतना ही मुश्किल है, जितना यूपी बोर्ड में शत प्रतिशत नंबर लाना. देखने में इसकी प्रक्रिया ज़्यादा मुश्किल नहीं है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर ये आपके जूते घिसवा देगी.

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चलिए समझते हैं इस आसान सी प्रक्रिया को

बंदूक का लाइसेंस लेने से पहले आपके पास एक बड़ा कारण होना ज़रूरी है, कि आप बंदूक क्यों लेना चाह रहे हैं. ये अधिकतर उन लोगों को मिलता है, जिनके बिज़नेस या काम की वजह से जान का खतरा होता है या वो कोई शूटिंग खेल खेलते हों.

सबसे पहले आपको अपने जिला पुलिस कार्यालय से Form 'A' लेकर और उस पर 5 रुपये की कोर्ट फ़ीस स्टैम्प लगा कर आवेदन करना पड़ेगा. ये फ़ॉर्म आपको राज्य पुलिस की वेबसाइट पर ​भी मिल सकता है.

इस फ़ॉर्म के साथ आपको राशन कॉर्ड की कॉपी, वोटर आईडी की कॉपी, पिछले तीन साल के इंकम टैक्स रिटर्न का ब्योरा, इलाके के दो ज़िम्मेदार नागरिकों से चरित्र प्रमाणपत्र, शारीरिक फिटनेस का प्रमाण, शैक्षिक प्रमाण (Self Attested Copies की फ़ोटोकॉपी), आयु प्रमाण (Birth Certificate) और साथ में बंदूक रखने के कारण को उचित साबित करने के लिए दस्तावेज़.

सभी दस्तावेज़ जमा करने के बाद

ये सभी दस्तावेज़ आप अपने इलाके के पुलिस स्टेशन में जमा करें. इसके बाद पुलिस आपके बारे में जांच पड़ताल करती है और उसकी रिपोर्ट Zonal DCP और ज़िले के SP को दे देती है. इसके बाद डीसीपी और डीएम आवेदनकर्ता का इंटरव्यू लेते हैं. इसके बाद अगर डीसीपी और डीएम आवेदनकर्ता के कारणों से संतुष्ट होते हैं तब वो लाइसेंस जारी कर देते हैं.

इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने का समय लगता है.

वैसे ये प्रक्रिया पढ़ने में जितनी आसान लग रही है, उतनी आसानी से लाइसेंस मिलता नहीं है!

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