साल 2017 अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और नया साल आने को है. ये साल किसी के लिए खुशियों का खज़ाना लेकर आया तो किसी पर इस साल दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. हमने इस साल कई अच्छी तो कई बुरी ख़बरें सुनी. मगरकुछ ख़बरें ऐसी भी आयीं इस साल जिन्होंने लोगों के चेहरों पर मुस्कान लायी. लोगों को इंसानियत का मतलब समझाया.

आज हम आपको 2017 की ऐसी ही कुछ ख़बरों का एक छोटा सा री-कैप दे रहे हैं, जिनके जरिये हमको और आपको ये पता चला कि भले ही साल-दर-साल कम होते चले जायें लेकिन जब तक ऐसे लोग दुनिया में मौजूद हैं इंसानियत कभी मर नहीं सकती.

1. दिव्यांगों के लिए शुरू हुआ यूनीक स्टार्टअप

घूमने-फिरना किसे पसंद नहीं होता है, हर कोई दुनिया की नई-नई जगहों को देखना चाहता है. शायद इसीलिए जैसे ही लोगों को अपनी बिज़ी लाइफ़ से टाइम मिलता है, वो निकल पड़ता है घूमने के लिए, कभी दोस्तों के साथ तो कभी फ़ैमिली के साथ. लेकिन ऐसे में कई बार वो लोग कहीं नहीं जा पाते हैं, जो या तो शारीरिक या फिर मानसिक रूप से सक्षम नहीं होते. और ऐसे ही लोगों के लिए है ही शुरू हुआ है ऐसा स्टार्टअप, जो अपने नए और यूनिक बिज़नेस मॉडल की वजह से ख़ासा लोकप्रिय हो रहा है. इस स्टार्टअप का नाम है 'Enable Travel'.

Enable Travel ऐसे लोगों की मदद करने के लिए शुरू किया गया है, जो शारीरिक या फिर मानसिक रूप से सक्षम नहीं हैं और सामान्य लोगों की तरह छुट्टियों का मज़ा नहीं ले पाते हैं. देबोलीन सेन, Enable Travel के प्रमोटर हैं और इस कंपनी को Cox & Kings की मदद से स्थापित किया गया है. इसके अलावा इस स्टार्टअप का प्रमोशन 'इंडिया के पहले Accessible Holiday Specialist के रूप में किया जाता है. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

2. जिंदा रहते हुए की देश की रक्षा और मरने के बाद 4 लोगों को ज़िन्दगी दी एक नेवल ऑफ़िसर ने

24 वर्षीय, Sub-Lt. अतुल कुमार पवार की 24 सितंबर को कोचि में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई. अतुल INS-द्रोणाचार्य पर तैनात थे. दोस्तों के साथ वायनाड घूमने गए थे. लेकिन वापस आते वक़्त दुर्घटना हो गई जिसमें उनकी मौत हो गई. हरियाणा के पंचकुला निवासी अतुल को अस्पताल ले जाया गया, पर तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन ऐसे मौके पर भी अतुल के पिता, राजबीर सिंह पवार ने एक ऐसा निर्णय लिया जो सभी के लिए एक मिसाल है. राजबीर ने अतुल का जिगर, दोनों गुर्दे और दिल डोनेट करने का निर्णय लिया. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

3. ट्रायल के दौरान संदिग्ध के बच्चे को लेडी कॉन्सटेबल ने पिलाया दूध

चीन की Hao Lina एक पुलिसकर्मी हैं. आज उनके एक नेक काम को देख कर हर किसी का दिल पिघल गया है. जब एक संदिग्ध का ट्रायल चल रहा था, तब उन्होंने उसके चार महीने के बच्चे को दूध पिलाया. ट्रायल के कारण संदिग्ध अपने रोते हुए बच्चे को दूध नहीं पिला पा रही थी.

ये घटना 23 सितम्बर की है. Shanxi Jinzhong कोर्ट में ये ट्रायल चल रहा था. बच्चे की मां पर धोखा-धड़ी से पैसा ऐंठने का आरोप था. ट्रायल के दौरान बच्चा Hao के पास छोड़ दिया गया था. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

4. शादी की फ़ोटो छोड़ डूबते बच्चे को बचाने वाला सुपरहीरो दूल्हा

शादी का दिन किसी की भी ज़िन्दगी के सबसे यादगार दिनों में से एक होता है. कनाडा के ओन्टारियो के नवविवाहित Couple को अपना शादी का दिन एक अलग कारण से याद रहेगा.

ओन्टारियो के Clayton Cook और उनकी पत्नी Brittany Cook शादी के बाद तस्वीरें खिंचवा रहे थे. ये दोनों ओन्टारियो के विक्टोरिया पार्क में फ़ोटोशूट करवा रहे थे. तभी एक बच्चा पार्क के पास की झील में गिर गया और डूबने लगा. Clayton ने जैसे ही ये देखा वो बच्चे की जान बचाने के लिए झील में कूद गया और बच्चे को पानी से बाहर निकाला. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

5. 98 की उम्र में मास्टर्स करने वाले इस बुज़ुर्ग का अगला मिशन ग़रीबी, बेरोज़गारी हटाना है.

अकसर आपने लोगों को कहते सुना होगा कि पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं. लोगों के इस कथन को 98 वर्षीय राज कुमार वैश्य सच करते हुए दिखाई देते हैं. दरअसल उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले राज कुमार ने हाल ही में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में द्वितीय श्रेणी के साथ MA किया है.

उनका जन्म 1920 में हुआ था. 1934 में दसवीं पास करने के बाद उन्होंने 1938 में इकोनॉमिक्स के साथ अपनी ग्रेजुएशन पूरी की. इसके बाद राज कुमार LLB करने में व्यस्त हो गए और 1940 में वकालत पास की. ये वही दौर था, जब सारा देश अंग्रेज़ों के जुल्मों से तंग हो चुका था और देश में उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शनों का दौर हो रहे थे. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

6. इस IAS ऑफ़िसर के सेवा-भाव को सलाम है, रोज़ एक घंटा करते हैं ग़रीबों का मुफ़्त इलाज

इक़बाल अहमद उन लोगों में से हैं, जो मानते हैं कि देश की सेवा ज़रूरतमंदों की मदद कर के भी की जा सकती है. यही वजह है कि IAS अफ़सर बनने के बाद भी उन्होंने अपने सेवा-भाव को बरक़रार रखा.

2010 से वो ग़रीबों को मुफ़्त स्वास्थ्य सेवा देने के लिए प्रयास कर रहे हैं. इस वक़्त वो उत्तराखंड के चम्पावत ज़िले में ज़िला अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. फिर भी वो हर सुबह ज़िला अस्पताल में एक घंटे के लिए ग़रीबों का मुफ़्त इलाज करते हैं. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

7. जर्मनी से आई एक महिला निःस्वार्थ भाव से कर रही है बीमार और घायल गाय की सेवा

मथुरा को लोग भगवान कृष्ण की जन्मभूमि के तौर पर पहचानते हैं, जहां तीर्थ यात्रियों के साथ-साथ विदेशी सैलानी भी आते हैं. मथुरा की इसी पावन धरती पर एक विदेशी, देशी गायों की देखभाल करने में जुटी हुई है. जर्मनी की रहने वाली 59 वर्षीय Friederike Irina को लोग यहां सुदेवी माता जी के नाम से पहचानते हैं. सुदेवी यहां ‘सुरभई गौसेवा निकेतन’ नाम से गौशला चलाती हैं.

इस गौशाला में करीब 1200 से भी ज़्यादा गाय हैं, जिनमें से कई बीमार और घायल अवस्था में यहां लाई गई थीं. Irina 1978 में पहली बार इंडिया घूमने आई थीं, जिसके बाद वो यहीं की होकर रह गईं. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

8. बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पर शुरू हुआ ‘गुरु का लंगर’, एक दिन में भर रहा है 35,000 लोगों का पेट

हर दिन किसी न किसी अख़बार या न्यूज़ चैनल पर म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार की ख़बर आती रहती है. किसी आम ख़बर की तरह ही इस ख़बर को भी लोग बड़े आराम से दरकिनार कर अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त हो जाते हैं. लगभग सभी देशों की सरकारों ने भी इस मुद्दे पर जैसे चुप्पी थाम कर ली हो, पर एक संगठन ऐसा भी है, जो बिना किसी स्वार्थ के रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए आगे आया है.

खालसा ऐड नाम का एक संगठन पिछले 3 दिनों से बांग्लादेश में म्यांमार से आये रोहिंग्या मुसलमानों के लिए गुरु का लंगर लगाए हुए है. बांग्लादेश के Teknaf में लगने वाले रिफ्यूजी कैंप में खालसा ऐड के वॉलंटियर पानी और खाने के पैकेट शरणार्थियों के बीच बांट रहे थे. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

9. भूख-प्यास से तड़प रहे, असहाय रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए आगे आए सिख

सीरिया में आतंक से पीड़ित लोगों को मदद पहुंचाने की बात हो, या नेपाल में भूकंप की तबाही के बाद लोगों की सहायता करने के लिए आगे आने का किस्सा हो, सिख समुदाय हर त्रासदी के समय पीड़ितों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता है.

म्यांमार में डर और ख़ौफ़ के साये में अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करने के लिए एक बार फिर सिख समुदाय एकजुट हुआ है और बांग्लादेश में इन शरणार्थियों को मदद पहुंचा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, 'खालसा ऐड' नाम के एक सिख संगठन के कई वॉलंटियर भारत-बंगलादेश पर मौजूद Teknaf रिफ्यूजी कैंप में रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए इकट्ठा हुए हैं. इस संगठन के मैनेजिंग डायरेक्टर अमरप्रीत सिंह के मुताबिक, यहां कैम्पों में रह रहे लोगों की हालत बहुत ख़राब है. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

10. क़ानून के सहारे ही इन गांववालों ने Mining से बचाई अपनी नदी और जंगल

उत्तराखंड के देहरादून के निकट एक गांव के बाशिंदे, देश के पहले ऐसे गांवनिवासी बन गए हैं, जिन्हें Biological Diversity Act, 2002 के तहत जंगलों से फ़ायदा हो रहा है. स्वर्णा Riverbed में हो रहे ग़ैरकानूनी ख़नन को रोकना न तो गांववालों के बस में था और न ही फॉरेस्ट अफ़सरों के हाथ में.

बड़े पैमाने पर हो रहे ग़ैरकानूनी ख़नन को रोकने के लिए गांववालों और अफ़सरों ने Biodiversity Act का सहारा लिया. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

11. मणिपुर के एक कलेक्टर ने लिया ऐतिहासिक फैसला, बच्चों के साथ हर हफ़्ते करेंगे अपने बंगले पर Dinner

Armstrong Pame को शायद ही बहुत से लोग जानते हों, पर ये मणिपुर के कई ज़िलों के हीरों है. Pame लोगों की भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं. Pame ने अपने इलाके के लोगों के लिए, बिना सरकार की किसी सहायता के, स्थानीय लोगों की ही मदद से 100 किमी लंबी सड़क बनवाई थी.

Pame अभी Tamenglong के कलेक्टर हैं और इस बार उन्होंने एक और क्रांतिकारी निर्णय लिया है. Pame ने अपने घर के दरवाज़े बच्चों के लिए खोलने का निर्णय लिया है. उन्होंने कक्षा 5वीं-10वीं के 10 बच्चों को हर शुक्रवार Dinner पर अपने घर बुलाने का निर्णय लिया है. इन बच्चों को District Administration की Lunch के बाद की कार्य प्रणाली को करीब से देखने के मौका मिलेगा. हर स्कूल से 10 बच्चों को इसके लिए चुना जाएगा. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

12. पैसों से भरा बैग लौटाने वाले देबेंद्र के लिए दिल्ली वालों ने जुटाए 70,000

वो है, तो सिर्फ़ एक कैब ड्राईवर. पर अब देबेंद्र कापड़ी सिर्फ़ एक टैक्सी ड्राइवर नहीं, एक सुपरहीरो भी बन गए हैं. 3 मई को देबेंद्र ने मुबिशर वानी को नई दिल्ली हवाई-अड्डे से अपनी काली-पीली टैक्सी में बिठाया और पहाड़गंज इलाके तक छोड़ दिया. वानी तो उतर गए पर अपना बैग भूल गए.

एक कैब ड्राईवर की ज़िन्दगी आसान नहीं होती होगी, हमने कईयों को 10 रुपए ज़्यादा लेकर भी गाड़ी भगाते देखा है. फिर भी लालच नहीं किया देबेंद्र ने. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

13. मुंबई लोकल में महिलाओं की सुरक्षा का ज़िम्मा उठाकर मनचलों को जेल पहुंचा रहा है ये नौजवान

कहते हैं, ऐसा कुछ नहीं है जो इंसान न कर सके. बस कुछ कर गुज़रने का हौसला चाहिए. ऐसी ही एक शख़्सियत हैं दिपेश टैंक. मुंबई की बस्तियों में बड़े हुए हैं दिपेश. उनके पिता की कमाई उतनी नहीं थी, इसलिये उनकी मां ने अपना Catering बिज़नेस शुरू किया. बचपन में उनकी मां देर रात घर लौटती, जो आस-पड़ोस के लोगों को बहुत चुभता था. लेकिन दिपेश अपनी मां को बहुत मानते हैं.

16 साल की उम्र में उन्होंने परिवार की सहायता करने के लिए पढ़ाई छोड़ दी. कुछ सालों की मेहनत के बाद उन्हें मुंबई की एक नामी Ad Agency में नौकरी मिल गई. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

14. बीमार बच्चों के साथ समय बिताने 12 साल से हॉस्पिटल जा रहे हैं ICU Grandpa

हर बच्चा दादा-दादी/नाना-नानी का दुलारा होता है. मम्मी-पापा से प्यार तो मिलता ही है, पर Grandparents का प्यार अलग ही होता है. लेकिन बहुत से बच्चे इस प्यार से वंचित भी रह जाते हैं.

David Deutchman या ICU Grandpa ऐसे दादाजी हैं जो बच्चों को Grandparents वाला प्यार ही देते हैं. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

15. Rio के तट पर बह आई Baby Whale, पर उसके मरने का इंतज़ार करने के बजाय लोगों ने उसकी जान बचाई

अकसर हम ऐसी ख़बरों से रूबरू होते हैं, जहां इंसान अपनी क्रूरता का ही परिचय देता है. चाहे वो किसी कुत्ते को बिल्डिंग की छत फेंकना हो, या किसी अन्य जानवर को बेरहमी से मौत के घाट उतारना हो, पर दुनिया सिर्फ़ बेरहमों से नहीं भरी है.

Rio de Janeiro के समुद्र तट पर जब 32 फ़ीट लंबा, 7 टन वज़न का Whale का बच्चा बहकर आ गया तो लोगों ने सिर्फ़ उसकी तस्वीरें नहीं ली. 300 से ज़्यादा लोगों ने मिलकर बच्चे को बचाया. ये Whale Baby 24 घंटों तक बीच पर फंसा रहा, पर लोगों ने JCB की मदद से उसे वापस से समुद्र में बहा दिया. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

16. ‘बाल विवाह’ को रोकने के लिए राजस्थान के एक गांव ने खा ली है कसम

राजस्थान... नाम सुनते ही मन में एक अनोखी सी छवि बन जाती है. रेत के समंदर में, बड़े-बड़े किले, काले घाघरे और कढ़ाई वाली ओढ़नी पहने, 'पधारो म्हारे देस' गीत को गाते और नाचती बंजारे. हम राजस्थान न भी गए हो, फिर भी ये दृश्य तो हम सबके दिलो-दिमाग पर सजा हुआ है.

राजपूतों की भूमि, राजस्थान अपने ख़ूबसूरत इतिहास के लिए जाना जाता है. लेकिन जैसे कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं. राजस्थान से हमें भंवरी देवी की भी याद आ जाती है. बाल विवाह जैसे अपराध को रोकने गईं थीं वो. इस अपराध की सज़ा उन्हें भुगतनी पड़ी. दरिंदों ने उनकी इज़्ज़त को तार-तार कर दिया, यही नहीं, गांववालों ने भी उनका बहिष्कार कर दिया. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

17. इस लड़की ने अपने दम पर खुलवा दिए 2000 स्कूल और बना दिया हज़ारों का भविष्य

कराची यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली Qurutulain, England के Loughborough में स्थित University Of Technology से डॉक्टर की डिग्री भी हासिल कर चुकी हैं. Qurutulain बचपन से ही बेहद दयालु और सरल स्वाभाव की हैं. Qurutulain को जितनी ख़ुशी दूसरों की मदद करके मिलती है, उतनी किसी और काम में नहीं. कराची में जन्मी ये महिला दूसरों को भी ज़रूरतमंदों की मदद के लिए प्रेरित करती हैं. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

18. जानवरों की मदद के लिए Seattle से भारत आ गई ये फ़ैमली, अब तक बचा चुके हैं 60 हज़ार पशुओं की जान

दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें देख कर दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़ सम्मान की भावना आती है. ऐसे ही चंद लोगों में शुमार हैं Erika, Jim Abrams-Myers और उनकी बेटी. Seattle के इस दंपत्ति ने जानवरों की रक्षा के लिए, जो कदम उठाया वो वाकई काबिले तारीफ़ है. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

19. एक प्रोफ़ेसर ने गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए ट्रेनों में मांगी भीख और जुटा लिए 50 लाख से अधिक रुपये

कहते हैं अगर किसी काम को हिम्मत से किया जाए, तो ऊपर वाला भी उस काम में आपका पूरा साथ देता है. ऐसा ही कुछ मुंबई के संदीप देसाई के साथ भी हुआ. पेशे से प्रोफ़ेसर, संदीप को कई दफ़ा मुंबई की लोकल ट्रेन में यात्रियों से पैसे मांगते हुआ देखा गया.

दिलचस्प बात ये है कि ये ऐसा अपनी निज़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कर रहे हैं. इतना ही नहीं, एक बार भीख मांगने के जुर्म में उन्हें हर्ज़ाना भी भरना पड़ा था. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2012 में संदीप मुंबई की स्थानीय ट्रेनों पर एक जाना पहचाना चेहरा थे. महाराष्ट्र और राजस्थान के गरीब बच्चों को अंग्रज़ी माध्यम की शिक्षा देने के लिए, वो यात्रियों से भीख मांग कर पैसे जमा कर रहे थे. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

20. सूरत में 251 लड़कियां बनी दुल्हन, हीरा व्यापारी महेश सेवानी ने किया था सामूहिक विवाह का आयोजन

क्रिसमस के मौके पर गुजरात के सूरत शहर में 251 बेटियां एकसाथ दुल्हन बनीं. इस सामूहिक विवाह में पांच मुस्लिम दंपति, एक ईसाई दंपति और HIV पीड़ित दो महिलाएं भी शामिल हुईं. इस विवाह की रोचक बात ये थी कि लड़कियों की शादी उनके धर्म के मुताबिक की गई. पारंपरिक परिधान और गहनों में सजी सभी महिलाएं बेहद ख़ूबसूरत लग रही थीं. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

21. 12 वर्षीय लड़के ने अपनी बहादुरी और समझदारी से पैसेंजर ट्रेन रोक कर बचाई सैकड़ों लोगों की जान

वो 5वीं कक्षा में पढ़ने वाला एक लड़का है, लेकिन उसकी बहादुरी और सूझ-बूझ के आगे सब कम हैं. बिहार राज्य के अधिकारियों ने उसकी वीरता को सम्मानित करने का फैसला किया है क्योंकि उसने अपनी समझदारी से कई ज़िंदगियां बचाई हैं.

जी हां, इस बहादुर बच्चे का नाम भीम यादव है और उम्र मात्र 12 साल. भीम यादव ने एक तेज़ रफ़्तार पैसेंजर ट्रेन को टूटे हुए रेलवे ट्रैक क्रॉस करने से पहले रोककर सैकड़ों यात्रियों की जान बचा ली. सूत्रों के मुताबिक़ अधिकारीयों द्वारा दिया जाने वाला इनाम नक़द या फिर कोई प्रमाण पत्र हो सकता है. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

22. लॉटरी के पैसों से कंप्यूटर सेंटर खोल कर दूसरे दिव्यांगों की मदद कर रहा है ये दिव्यांग

'लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...' सोहनलाल द्विवेदी जी द्वारा लिखी गई ये प्रेरणादायक पंक्तियां वेस्ट बंगाल के इस शख़्स की ज़िन्दगी पर बिलकुल सटीक बैठती हैं. इस शख़्स का नाम बसम सोनार है और ये दिव्यांग हैं.

मगर आज बसन सोनार अपने कामों की वजह से अन्य दिव्यांगों और दूसरे लोगों के लिए आदर्श बने हुए हैं. जल्द ही बसन को जलपाईगुड़ी डीएम द्वारा रोल मॉडल घोषित किया जाने वाला है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बसन सोनार के हाथ बहुत कमज़ोर हैं और वो अपने पैर भी हिला नहीं सकते हैं. वो बैसाखियों के सहारे चलते हैं. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

23. लड़की की मदद के लिए इस शख़्स ने दिए अपने आख़िरी 20 डॉलर

ज़िन्दगी कब क्या मोड़ लेगी ये कोई नहीं बता सकता. आपके हमारे साथ अगले पल क्या होने वाला है इसकी जानकारी न हमको होती है और न ही किसी और को. ऐसा ही कुछ हुआ एक बेघर और बेसहारा वयोवृद्ध व्यक्ति के साथ. दरअसल, फिलाडेल्फिया में सड़कों पर जीवन व्यतीत करने वाले जॉनी ने अपनी आखिरी पूंजी 20 डॉलर यानि लगभग 1292 रुपये एक लड़की की मदद करने में ख़र्च कर दिए. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

24. अपने पेशे की प्रतिष्ठा को कायम रखते हुए एक डॉक्टर ने बचाई जच्चा-बच्चा की जान

पिछले साल ओडिशा के कालाहांडी ज़िले के भवानीपटना में दाना मांझी नमक व्यक्ति को अपनी पत्नी के शव को कंधे पर रखकर 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था क्योंकि उनके पास एम्बुलेंस को देने के लिए पैसे नहीं थे. इस घटना की पूरी दुनिया में निंदा की गई थी. लेकिन इस घटना के बाद देश के कई इलाकों से इस तरह की घटनाएं सामने आयीं थी, जिनमें एंबुलेंस नहीं मिलने पर मरीज के परिजन उसे कंधे पर उठाकर या किसी अन्य साधन से खुद ही अस्पताल ले गए. ऐसे जा मामले इन बीते दिनों खबरों में आये थे. लेकिन आज हम आपको जो ख़बर बताने जा रहे हैं, वो इससे बिलकुल उलट है, जहां एक डॉक्टर ने बचाई एक गर्भवती महिला की जान. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

25. मदद के बदले मदद, यही है मुंबईवालों की पहचान और इसको सच साबित कर रही है एक लड़की

पिछले दिनों लगातार हुई मूसलाधार बारिश के कारण मुंबई मानो थम सी गई थी, लेकिन मुम्बइकर्स की ज़िंदादिली और दूसरों की मदद करने की स्पिरिट की वजह से अब वहां का जन-जीवन नॉर्मल हो रहा है. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

26. पानी की किल्लत को ख़त्म करने के लिए, इस शख़्स ने 27 सालों तक खुदाई करके अकेले ही बना डाला तालाब

दोस्तों आपने अपने बुज़ुर्गों को कई बार बोलते सुना होगा कि 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता', मगर इस कहावत को गलत साबित कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में स्थित सजा पहाड़ गांव में रहने वाले श्याम लाल ने. श्याम लाल ने अकेले वो काम कर दिखाया है, जो अकेले करना नामुमकिन ही लगता है.

श्याम लाल नाम के इस शख़्स ने जब अपने गांव के लोगों को पानी की समस्या से जूझते देखा, तो उन्होंने अकेले ही एक तालाब खोद डाला और ग्रामीणों के लिये पानी का इंतज़ाम कर दिया. लेकिन ये काम उन्होंने एक दिन, एक साल या एक महीने में नहीं किया है, बल्कि इस काम को करने में श्याम लाल को पूरे 27 साल लग गए. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

27. मुंबई स्टेशन पर बेसहारा छोड़े तीन बच्चों को अमेरिकी कपल ने लिया गोद, अब जाएंगे अमेरिका

20 महीने पहले घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर बेसहारा छोड़ दिए गए, 2 भाई और उनकी 1 बहन आज अपनी ज़िन्दगी की नई उड़ान भरने को तैयार हैं. ये बच्चे अमेरिका जा रहे हैं. हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनको गोद लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अमेरिकी दंपति को मंजूरी दे दी है.

42 वर्षीय Mark Stoll और 43 वर्षीय उनकी पत्नी Annette ने पूरे नियम और क़ानूनों का पालन करते हुए राहुल (5), दुर्गा (4) और सूरज (2) को गोद लिया है. ये कपल Indiana के Campbellsburg में रहता है और वहां खेती-बाड़ी करता है. Mark और Annette के ख़ुद के तीन बच्चे पहले से हैं. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

28. भारी बारिश में भी हैदराबाद का ये कांस्टेबल करता रहा ट्रैफ़िक कंट्रोल, इसे कहते हैं कर्त्तव्यनिष्ठा

जोरदार मूसलाधार बारिश के कारण हैदराबाद के कई इलाकों में लोगों के लिए दिक्कतें पैदा हो गयीं. बारिश की वजह से शहर की सड़कों पर जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी. इतना ही नहीं लोगों के घरों में भी पानी भर गया. शहर की मुख्य सड़कों पर पानी भरने के कारण यातायात भी काफी प्रभावित हुआ. ऐसे में एक ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी ने अपनी ड्यूटी को पूरी ईमानदारी से निभाते हुए यातायात को सुगम बनाने का काम किया.

इस कॉन्सटेबल का नाम P Narsimhulu है. हैदराबाद में हुई मुसलाधार बारिश के बाद जब शहर के कई इलाकों में पानी भर गया और जाम की स्थिति पैदा हो गई उस वक़्त Narsimhulu ने घुटनों तक पानी से भरी सड़क के बीच में खड़े होकर और हाथ में एक छाता लेकर ट्रैफिक को नियंत्रित किया. उस वक़्त इस कांस्टेबल ने अपनी ज़िम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाते हुए लोगों का दिल जीत लिया. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

तो ये हैं साल 2017 की ऐसी इंसानियत और मदद की मिसाल को बयां करती रियल स्टोरीज़। थोड़ा समय निकाल कर इनको पढ़ियेगा ज़रूर.