ये बात पहले कहता तो बड़ी गालियां पड़तीं, लोग सुनने को ही तैयार नहीं होते, अब कह रहा हूं कि अभी थोड़ी शांति है. पटाखों का शोर ख़त्म हो चुका है, त्योहारों का जोश ठंडा हो चुका, धर्म बचा लिया गया.

Source: Hindustan Times

मतलब कल ऐसे पटाखे फोड़े गए जैसे अगले दिन सांस नहीं लेनी हो. आज बम फोड़ कर फेफड़ा फाड़ लेना है. हम भी मरेंगे बच्चों को भी धर्म के नाम पर सांस की बिमारी दे कर जाएंगे. ठीक है, ठीक है.. कहने वाले कहेंगे एक दिन से क्या होता है, पहले से इतनी धुआं है, न्यू ईयर पर भी फूटते हैं... फलाना फलाना. उनसे इतना ही कहना है कि पटाखे किसी भी मौके पर फोड़ो, वो फ़ायदा नहीं करेगा और अगर पहले से प्रदूषण है तो सरकार उसे ठीक करने की कोशिश कर रही है, आपको उसके साथ खड़े होना चाहिए, जैसे नोटबंदी के समय खड़े हुए थे भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए. हालांकि नोटबंदी से हुआ कुछ नहीं, इससे पक्का पता है कुछ न कुछ लाभ हो जाएगा.

रही बात पटाखों की एहमियत की, तो यही बात हज़ारों जगह पर लाखों बार कही जा चुकी है कि पटाखों का दिवाली से कभी कोई वास्ता था ही नहीं, बारूद भारत में आए ही 500 सौ साल पहले थे और दिवाली का हिस्सा बनने में इन्हें और समय लगा होगा. इसे हम धर्म का हिस्सा मानने लगे और जो दीये असल में दिवाली का हिस्सा हुआ करते थे उसे बल्ब से बदल दिया गया.

छोड़ो धर्म की बातें, कोर्ट की ओर से आदेश था कि रात के 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे छोड़ने हैं. 6 बजे से ही शुरू हो गए थे और रात के दो बजे तक पटाखे फोड़ते रहे, आखिरी के दो घंटे तो दिवाली में काउंट भी नहीं हुए.

असली दिक्कत ये है कि ज़्यादातर लोग पटाखे छोड़ना भी नहीं चाहते, ग़रीब इंसान मेहनत से पैसे कमाता है और अपने पैसों में आग लगता देख नहीं सकता. बाकी के खा पी कर अघाए हुए लोग हैं. इनको अपने पटाखों से ज़्यादा इस बात से दिक्कत है कि फलाने के धर्म में तो कुछ नहीं बोलता, अरे भाई! उनका भी तीन तलाक़ ख़त्म किया गया न. वैसे भी सांस तो सबको लेनी है. कोई धर्म के आधार पर ऑक्सिजन और कोई कॉर्बन डाई ओक्साइड लेता तो है नहीं!

अब क्या मतलब इन बातों का जो होना हो था हो चुका. मैंने एक भी पटाखा नहीं छोड़ा, मैं भी उतना बारूद सूंघा जितना रात भर पटाखे छोड़ने वाले पड़ोसी ने सूंघा. सांस की बिमारी होगी या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन अगर कुछ हुआ तो ऐसा श्राप दे कर मरूंगा कि तुम्हारा कोई भी पटाखा मौक़े पर फ़ायर नहीं कर पाएगा, कोई भी!