रात को सुबह 5 बजे का अलार्म लगाकर 8 बजे उठ गया था. टांगे, कोहनी, बाल खुज़लाते अधकच्ची नींद में गर्लफ़्रेंड को फ़ोन घुमाया. मगर आज आवाज़ कुछ नई थी. कोई लड़की कोरोना वायरस से कैसे बचें बता रही थी. हम कहें मैडम बच लेंगे, लेकिन पहले ये बताओ ये कोरोना है किस चिड़िया का नाम?

मैटर समझने के लिए हम तपाक से लैपटॉप खोल लिये. बगल में पसरे रूममेट कम दोस्त मुझे देख के हैरान. जो आदमी सुबह उठते ही संडास को भागता है, आज काम कर रहा. गूगल बाबा से 5 मिनट में 10 ठोर फ़रियाद कर डालीं.

पता चला देश में मेड इन चाइना ठप्पे वाला कोरोना वायरस फैल चुका है. इस बार इसका बहिष्कार भारत के साथ दुनिया भी कर रही. लेकिन विद्आउट डिमांड ये हर जगह सुलभ है. अब तक 100 से ज़्यादा देशों में फ़ैल चुका है. हज़ारों लोग मारे गए. दुनिया के कई देशों में दुक़ानें और ऑफ़िस तक बंद हैं.

इटली में तो इस वायरस की चपेट में 10 हज़ार से ज़्यादा लोग आ चुके हैं, 600 से ज़्यादा की जान चली गई. हालात इतने ख़राब हो गए कि पूरे इटली को सेना की मदद से लॉकडाउन कर दिया गया. मैं सोचने लगा कि ये ख़बर अगर मिश्रा जी सुनेंगे तो मारे खुशी के कोरोना की चपेट में आने से पहले ही प्राण त्याग देंगे. काहे कि मिश्राइन से वो न चाहते हुए भी वेनिस ले जाने का वादा कर दिये थे. अब अगर नहीं गए तो फ़ायदा और अगर ले गए तो डबल फ़ायदे में होंगे.

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ज़मीन के साथ ही कोरोना ने समंदर पर भी चढ़ाई कर दी है. जापान में योकोहामा के पास डायमंड प्रिंसेज क्रूज़ नाम का जहाज़ रोक लिया गया है. यहां 3700 यात्री फंसे हैं. कोरोना की चपेट में 150 से ज़्यादा लोग आ चुके हैं. सब परेशान हैं. लेकिन हमारे फूफा सबसे ज़्यादा. दरअसल, वो जहाज़ पर वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट करने गए थे. लेकिन 4 फरवरी को ही कोरोना, बजरंग दल की तरह पहुंच गया. जहाज़ पर ऐलान हो गया कि फूफा, फूफी से दो मीटर दूर ही रहें. कोरोना का खौफ़ इतना है कि भारत में शादियां तक टली जा रहीं. ऐसा रहा तो विश्व जनसंख्या में हमारे अमूल्य योगदान का क्या होगा?

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WHO ने तो कोरोना को महामारी घोषित कर दिया. 100 से ज़्यादा देशों में अब तक ये मुआ कोरोना 4000 लोगों के प्राण ले चुका है. भारत में भी कोरोना से 50 से ज़्यादा लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई. हालांकि, किसी के कोरोना से मौत होने का कोई मामला नहीं आया. ऐसे हालात में भारत सरकार ने 15 अप्रैल तक सभी वीज़ा पर रोक लगा दी है.

यूनेस्को की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोना के कारण दुनिया के तमाम देशों में स्कूल बंद हैं. कई देशों में तो ऑफ़िस भी बंद कर दिये गए हैं.

एक मिनट गुरू. क्या? ऑफिस?

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दुनियाभर में ऑफ़िस बंद हैं तो फिर काहे हमारा ऑफ़िस खुला है. ये क्या अलग से रंगा के आया है?

कहां हैं परम पूजनीय एचआर महोदय! मुझे कहीं दिख क्यों नहीं रहे. ऐसे मौकों पर ये प्राणी गायब क्यों हो जाता है?

मैं चिंतित हो गया. सब काम कर रहे थे. मैं नहीं. मेरा उद्देश्य तो बड़ा था. मैं काम जैसी फ़ालतू चीज़ के लिए अपने रास्ते से नहीं भटक सकता.

हे सुनो! मैंने बगल में कार्यरत साथी से सवाल किया.

क्या?

पता है कोरोना फैला है.

हां. तो?

अबे अक्ल ‘मंद’. WHO ने इसे पैनडेमिक घोषित कर दिया है.

ये क्या होता है?

पता नहीं. लेकिन नाम से तो कुछ ख़तरनाक लगता है बे.

अच्छा.

पता है सारे ऑफ़िस बंद हैं.

हम्म.

भाई न्यूज़ वाले बता रहे कि एक-दूसरे से फैलता है ये. मैं तो कहता हूं कि एचआर से ऑफ़िस बंद करने को बोलते हैं.

एचआर सुनेगा?

एक काम करता हूं. मेल लिख के देखता हूं.

फ़टाक से मैंने लैपटॉप उठाया और झट से एक मेल कुछ यूं चेप दिया.

प्रणाम,

कंपनी के असली मालिक,

आदरणीय एचआर महोदय,

परम पूजनीय भाग्य विधाता एचआर श्रीमान, ये तुच्छ सा कर्मचारी आपको क्या ही अवगत करा सकता है. बस कोहनी तक हाथ जोड़ते हुए बोल रहा है. आप जैसे महान लोगों से भरी-पूरी इस दुनिया में कोरोना नाम की बीमारी फैल चुकी है. ऐसा कहा जा रहा है कि ये बीमारी मुझ जैसा तुच्छ और आप जैसा उच्च कर्मचारी नहीं देखती है. एचआर के कमींदगी की इस भोली बीमारी को कोई जानकारी नहीं. ऐसे में दुनिया के ऑफ़िस बंद किये जा रहे हैं.

जब तक ये बीमारी एचआर जात से परिचित न हो जाए. तब तक के लिए हमारा ऑफ़िस बंद करने पर विचार किया जाए. अन्यथा कुछ कर्मचारी बिना नोटिस परमानेंट लीव पर नरकलोक चले जाएंगे.

धन्यवाद

आपका आदेश मानने को मजबूर

अविश्वासी कर्मचारी

मेल करने के बाद कुछ कंपकंपी से होने लगी. एचआर का रिप्लाई 5 मिनट तक नहीं आया. लगा कहीं ग़लती तो नहीं कर दिये बे. लेकिन तब ही एक मेल आ पहुंचा.

मेल साक्षात एचआर भगवान का ही था.

हैलो,

मेरे नफ़रती और कपटी कर्मचारी. तुमने अपने घटिया दिमाग की बात रखी, ये जानकर मुझे बेहद ख़ुशी नहीं हुई. मैं तो अभी तक नहीं समझ पा रहा है कि इतनी हिम्मत कहां से इकट्ठा की. वो भी तब जब अगले ही महीने मैं तुम्हारा अप्रेसल मारने वाला हूं. ख़ैर, कोरोना से डरने कोई जरूरत नहीं. वो अपने ऑफ़िस नहीं आएगा. मैंने उसका इंटरव्यू अभी फ़ाइनल नहीं किया है. अगर आ भी गया तो यहां वो ढल नहीं पाएगा. काहे कि अच्छी सैलरी देना हमारे बजट में है लेकिन नियत में नहीं. पूरा ऑफ़िस बंद नहीं हो सकता. हां. अगर बाहर कोरोना से डील कर लो और वो तुम्हारे साथ रहना पसंद करे. तो हम कुछ दिन का अवकाश तुम्हे देना बेहद पसंद करेंगे.

भाड़ में जाओ

तुम्हारा भला कभी न चाहने वाला

एचआर