इस बार दिवाली (Diwali 2021) पर हमाई इत्ती जली हुई है कि पटाखे जलाने का मन ही नहीं कर रहा. एकदम मुंंह रुआसा हो रखा है. किसी न किसी को गरियाने को मन उतावला हुआ जा रहा. काहे कि हर तरफ़ महंगाई ने उधम काट रखा है. हमारी 40 इंच की नाज़ुक कमर इस महंगाई के आगे एकदम ही लहरा गई है. लोग महंगाई को डायन ग़लत कहते. ये तो पुरुषवादी सोच वालों की महिलाओं के ख़िलाफ़ साज़िश है. असल में तो ये वैम्पायर है. बिल्कुल ही ख़ून चूसे डाल रहा.

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ऊपर से ये पर्यावरण की चिंता करने वाले लोग और आफ़त काटे हैं. जिधर देखो ज्ञान बांटने को पकड़ लेते. कल ही एक सज्जन चौराहे पर सिगरेट फूंकते मिले, तो कहने लगे भइया इस बार पटाखा न जलइबे, बहुत पर्यावरण डैमज हुई रहा. अब तो एकदम सांस अप-डाउन होने लगत है. उनकी पर्यावरण के प्रति इस गहरी चिंता को देख, मन तो किया कि आसपास किसी कोबरा से दुई मिनट होंठ उधार लेकर उनका चुम्मा ही ले लें.

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मगर छोड़िए, हम टॉपिक पर आते हैं. काहे कि पटाखे और महंगाई से भी ज़्यादा ज्वलनशील मुद्दे हैं. अजी मुद्दे क्या लोग कहिए. ऐसे-ऐसे प्रदूषित लोग, जो प्रदूषण को भी सांस की बीमारी दे दें. आज हम आपको ऐसे ही ज्वलनशील लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें देखते ही पटाखे की तरह फोड़ने का मन करता है. 

1. न्यूज़ चैनलों पर गला फाड़ने वाले एंकर

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मूर्ख वैज्ञानिक कहते हैं स्पेस में साउंड ट्रैवल नहीं कर सकता. अमा हमारे न्यूज़ एंकरों को भेजकर तो देखो. ये करामाती सूरज-मगंल के भी कान के पर्दे न फाड़ दें, तब कहना. शनि भी इन शनिच्चरों को देख शांति के लिए पूजा रखवा बैठेगा. नारायण तो ऐसे झन्नादेदार एंकरों को देखकर ख़ुद को पत्रकार के बजाय चुगलख़ोर कहलाना बेहतर समझेगा. 

2. सोशल मीडिया पर नेताओं के गरियंधे समर्थक

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जिस तरह हमारे देश में सारे गंदे नाले एकसाथ आकर नदियों में गिरते हैं. वैसे ही देशभर के नेताओ के गरियंधे समर्थक सोशल प्लेटफ़ॉर्म्स पर. न हमारे गंदे नाले फ़िल्टर होते हैं न ही ये गरियंधे समर्थक. सारी शुद्ध गंदगी उड़ेली जाती है. और ये किसी एक पार्टी-नेता तक सीमित नहीं है. आपको सोशल मीडिया पर कथित राष्ट्रवादियों से लेकर अराजकतावादियों तक के पिछलग्गू मिल जाएंगे. 

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3. सड़कों पर घूमते लखैरे सिटियाबाज़ लौंडे

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हमारे देश में विविधता में एकता का सबसे बढ़िया उदाहरण सिटियाबाज़ लौंडे हैं. आप कश्मीर से कन्याकुमारी तक हो आइए, आपको हर लखैरा सिटियाबाज़ एक जैसा ही मिलेगा. बालों में कलर और पैर में जूता हर वक़्त रहेगा. वक़्त के बेहद पाबंध होते हैं. लड़की के स्कूल जाने और आने का टाइम मिस नहीं हो सकता. भौकाल इनका सिगरेट और कोल्डड्रिंक के बिना पूरा नहीं होगा. भले ही दिमाग़ से ज़हीन कम हो, मगर शरीर से महीन पूरे होंगे. इनका मुख्य आहार रजनीगंधा और स्वीटी सुपारी है. अगर आप भी ऐसे महान लोगों का दर्शन करना चाहते हैं, तो ये हफ़्ते में 5 दिन हुक्का पार्लर में मिलेंगे. बाकी इन्हें सोशल मीडिया पर मत तलाशिएगा, क्योंकि इनके बायो पढ़कर आप अंधे भी हो सकते हैं.

4. जिमों में पाए जाने वाले ज्ञानबाचू बॉडीबिल्डर्स

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जिम में मुख्य तौर पर तीन तरह के लोग आते हैं. एक बॉडी बनाने वाले, दूसरे बॉडी बनवाने वाले और तीसरे बॉडी पर ज्ञान बाचने वाले. ये तीसरे क़िस्म के लोग आपको शरीर से जुड़ी हर चीज़ पर ज्ञान पेलने को उतावले नज़र आएंगे. 'अरे ये सेट ऐसे नहीं लगेगा. डंबल को कंधे तक मत लाओ, घुसेड़ लो मुंह में. अरे बॉडी ऐसे नहीं बनेगी, प्रोटीन लो.' और इनके कहने पर आप प्रोटीन भी ले लिए, तो भी इन्हें चैन नहीं. जब तक ये आपके शरीर में स्टेरॉयड के इंजेक्शन घुसवा न दें. यही नहीं, कुछ ज्ञानबाचू बॉडीबिल्डर्स तो जिम में आपको गुप्त रोग पर भी सलाह पेलते दिख जाएंगे. 

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5. बॉलीवुड सेलेब्स के महालुल्ल फ़ैन्स

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'बताओ, शाहरुख़वा का लड़कवा को जेल डाल दीहिन. अरी, इत्ता सा तो है अभी. उसे का पता, का होत है ई ड्रग-वग. अब बेचारा जैसा सोसाइटवा में रहिए, ऊही तरह का नशा करिए न. अब हम लोगों संगे होत, तो बीड़ी-वीड़ी पी लेत.' भले ही शाहरुख़ के लड़के ने कुछ किया हो या न किया हो, मगर इन महालुल्ल फ़ैन्स को ऐसा सदमा लगता है कि इनका बस चले तो शाहरुख की जगह अपने ही लड़का जेल में जमा करवा आएं. ऊपर से कुछ फ़ैन्स तो सोशल मीडिया पर ऐसे जज़्बात उड़ेले हैं कि अगर सही में अपराध साबित हो जाए, तो ये ख़ुद गांजा फूंक-फूंक सुसाइड कर बैठें. 

6. सोन पापड़ी की तरह फैले जाति-धर्म की पॉलिटिक्स करने वाले नेता

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इस देश में जितनी धर्म-जातियां नही हैं, उससे ज़्यादा उन्हें रिप्रज़ेंट करने नेता मिल जाएंगे. ये सोन पापड़ी की तरह हर जगह मिलेंगे. मगर न तो कभी सोन पापड़ी से किसी को स्वाद मिला है और न ही इन नेताओं से किसी को इंसाफ़. इनका एक ही हिसाब है कि जितना रायता फैलेगा, उतनी ही गप-गप बिरयानी अंदर जाएगी. थाली में कुछ बचेगा तो वो इनके समर्थकों की हड्डियां, जिसे बाद में ये नेता दूसरे कुत्तों के आगे फेंक देंगे.  

7. दिवाली पर बोनस मार लेने वाली कंपनियां

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ये बात बहुत तकलीफ़ देती है. अपन जैसे दिहाड़ी लोग सालभर दिवाली का इसीलिए तो इंतज़ार करते हैं कि कंपनी से बोनस मिलेगा. लेकिन नहीं. जब तक हमारे कलेजा पर सांप न लुटवा दें, तब तक बॉस महोदय को चैन कहां. पूरे साल उम्मीद बंधाएंगे और एंड टाइम पर गोली दे देंगे. अबे मंगल ग्रह पर आए तूफ़ान का हवाला देकर, ये लोग दिल्ली-मुंबई में बोनस मार देते. बोलते हैं कंपनी को बड़ा नुक़सान हो गया. हमको वहां ब्रांच खोलनी थी. ऊपर से आजकल नया ख़ुरपेच चला है भई, 500-1000 का कूपन थमा देते हैं. कहते हैं जाओ शॉपिंग करो, मौज उड़ाओ. अब ज़्यादा नहीं बोलेंगे. इस बात को यहीं दफ़्न करो.  

तो, ये थे वो लोग जो पटाखों से भी ज़्यादा प्रदूषण फैलाते हैं. ऐसे ज्वलनशील लोगों से जितना बच सकें, उतना बेहतर. टॉपिक यहीं समाप्त हुआ. आप सभी को दिवाली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. Happy Diwali