बीते दिनों नेश्नलिस्ट कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य वंदना चव्हाण पुणे से दिल्ली सफ़र कर रही थीं, यात्रा समाप्त होने के बाद कई ट्वीट कर उन्होंने शिकायत की कि सुबह की फ़्लाइट में एयर इंडिया ने उन्हें ऑमलेट में छिलके दिए, सड़े हुए आलू परोसे और मटर भी कच्चे थे. उन्हें एयरहोस्टेस के बर्ताव से भी शिकायत थी. बस पायलेट बचा रह गया! कोई कह रहा था कि उनके गुस्से से बचने के लिए पायलेट ने जहाज़ टॉप स्पीड में चलाई थी!

सांसद जी को कभी ट्रेन से पुणे से दिल्ली जाना चाहिए, यात्रा के बाद अगले दो दिन उनके ट्विटर पर ही जाऐंगे. प्लेटफ़ॉर्म पर स्वचालित सीढ़ियां नहीं चलतीं, वेटिंग रूम के वाशरूम में हैंड वॉश करने के लिए कुछ नहीं रखा था, डब्बे में जो चादर मिली थी उससे बदबू आ रही थी, खाना बस पका हुआ था... ताकि पचाने में आसानी हो, रात के दो बज़े टीसी बदतमीज़ी से जगा कर टिकट चेक कर गया. मैं ये नहीं कह रहा कि भारतीय रेलवे की सुविधाएं बेकार हैं, आम आदमी और यात्रा पर ख़र्च किए गए पैसों की तुलना में भारतीय रेलेव की सुविधाएं बहुत अच्छी हैं. हमारे ऑमलेट में छिलका निकलता है तो हम उसे साइड कर बाकी का आमलेट खा लेते हैं, एक्सिलेटर नहीं चलता तो सूटकेस माथे पर चढ़ा कर ख़ुद ही चलने लगते हैं. हमलोग सांसद थोड़ी हैं, जो इन समस्याओं पर ट्वीट कर देंगे.

ख़ैर, वंदना चव्हाण ने एयर इंडिया को ऑमलेट में छिलके खाने के लिए पैसे थोड़ी ही दिए थे. उनका ट्वीट करना ग़लत थोड़ी है. आम आदमी की इज्ज़त नहीं होगी चल जाएगा लेकिन देश के सांसद की भी इज़्ज़त नहीं होगी, ये जनता हरगिज़ बर्दाशत नहीं करेगी. एयर इंडिया वाले आज सासंद को छिलका खिला रहे हैं, कल को प्रधानमंत्री के ढोकले में कंकड़ डाल देंगे, ऐसे ही तो लापरवाही बढ़ती है. जिस दिन प्रधानमंत्री के ढोकले में कंकड़ निकला उस दिन तो एयरइंडिया की ख़ैर नहीं, अकेले प्रधानमंत्री जी तीन ट्वीट प्रति मिनट के रफ़्तार से पोस्ट करने की क़ाबलियत रखते हैं... उनके टीम की तो छोड़ ही दीजिए.

जो इंसान आज ट्रेन में सफ़र कर रहा है, उम्मीद करता है कि किसी दिन जहाज़ में बैठेगा, कोने की सीट बुक करेगा, पूरे रास्ते बादल देखेगा, एयरहोस्टेस असल में कैसी दिखती हैं उसका अनुभव लेगा दो घंटे में पुणे से दिल्ली पहुंच जाएगा, इतने अरमान हैं! अब उसके ऑमलेट में छिलके निकल आए... उसको तो वापस से भारतीय रेलवे वाली फ़ीलिंग आ जाएगी, सपने चकनाचूर हो जाएंगे. आगे ज़िंदगी में वो कभी बड़े फ़ैसले नहीं ले पाएगा, आम आदमी के सपनों के क़त्ल के लिए कौन जवाबदेह होगा, एयर इंडिया?