कल के बारे में बात करने में भी बुरा लग रहा है, लेकिन बड़े बुज़ुर्ग कह गए हैं कि दुख बांटने से कम होता है. ऐसे कैसे हार गए यार! हम तो पहले मैच से मान कर चल रहे थे कि वर्ल्ड कप के फ़ाइनल मैच ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड को हरा कर लॉर्ड्स में 83 की तरह वर्ल्ड कप उठाएंगे.

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ख़ैर, आगे की बात करते हैं, जो हुआ सो हुआ के फ़ॉर्मुला का यहां भी लगाते हुए ये देखना होगा कि अब क्या किया जा सकता है. कैसे इस सदमें से उबरा जाए? रात में एक फुल बोतल जूस(अंगूर की बेटी का) पीने के बाद मुझे ये भान हुआ कि आगे पूरी ज़िंदगी पड़ी है और जीवन में और भी कई वर्ल्डकप देखने हैं, क्रिकेट के अलावा. अभी बस डाइवर्जन चाहिए, वो कैसे मिलेगा वो मै बताता हूं. आप बस पढ़ते जाइए.

1. मीम

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सच बता रहा हूं, ये पेन किलर से ज़्यादा असरदार होते हैं. मीम के सहारे तीन-तीन ब्रेकअप का ग़म भुला दिया है. अगर बनाना आता है तो बनाइए, नहीं तो पढ़ाना तो आता ही होगा. ख़ुद भी पढ़िए और सबको पढ़ाइए भी.

2. मुहल्ला क्रिकेट

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अपने महुल्ले के टीम को इकट्ठा करना है, पड़ोस के मोहल्ले से मैच फ़ाइनल करना है. आपकी टीम भारत, अगले की न्यूज़ीलैंड और अंपायर अपना आदमी होगा ताकि अबकी कोई रन आउट न होने पाए.

3. बाकी फ़ैन्स के साथ बकैती

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चार दोस्तों के बुलाइए, जिसे क्रिकेट की समझ हो. मैच में कहां ग़लती हुई, कहां अच्छा किया . सब मुद्दों पर बात कीजिए, सभी आयामों पर विचार-विमर्श कीजिए. कप्तानी में कहां चूक हुई, शमी को क्यों नहीं खिलाया, धोनी को ऊपर क्यों नहीं भेजा, चार कीपर के साथ उतरने की क्या ज़रूरत थी आदि टॉपिक पर, इससे मन हल्का होगा, चार गालियां दीजिएगा तो बोझ हल्का होगा. फिर ख़ुद ही आखिरी में टीम के लिए अच्छी-अच्छी बातें बाहर निकलेंगी.

4. टीवी ऑन नहीं होना चाहिए

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टीवी को फोड़ना नहीं है, लेकिन सुकून की सलामती चाहते हैं तो कुछ दिनों तक ऑन भी मत कीजिएगा. TRP के चक्कर में न्यूज़ एंकर मैच का मुज़रिम टाइप प्रोग्राम चला कर हर रोज़ खून खौलाएंगे, जब तक इंडिया किसी टीम से अगला मैच न जीत जाए. वो तो हम भी अभी वर्ल्डकप पर 76 आर्टिकल लिखेंगे, लेकिन हमारी बात कुछ और होगी, आप समझ रहे हैं न!

5. ख़ुद को एक ट्रीट दीजिए

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फ़ैन नाम का जीव बनना कोई आसान काम नहीं, बिना किसी लाभ के टीम की जीत में ख़ुश होना, हार में रोना... एकतरफ़ा प्यार वाला मामला है. तो हार-जीत के बाद आपकी भावनात्मक लगाव की तारीफ़ के लिए एक ट्रीट तो बनती है, वो ट्रीट भी आपको ख़ुद को देना है, अपने मन पसंद का कुछ खाइए, ग़म को भुलाइए और सामान्य ज़िंदगी में वापस लौट आइए क्योंकि कुंदन चचा कह रहे हैं-

और भी दुख हैं ज़माने में क्रिकेट के सिवा, राहतें और भी हैं वर्ल्डकप की राहत के सिवा

अरे छोड़िए फ़ाइनल की बात इस वर्ल्डकप में भी पाकिस्तान को अच्छे से हराया न, ये भी ट्रॉफ़ी से कम है क्या!