रात को खाना बनाने की तैयारी में था. मुंह चटपटा खाने को बेताब हो रहा था, यही लिए सोचा आज रायता बना लूं. दही, मिर्च, भुना जीरा और नमक समेटा फिर टीवी खोलकर बैठ गया. टीवी खुली ही थी कि इत्ते मे ही एक न्यूज़ एंकर ने दहाड़ मार दी. यलगार हो! भारत में स्वागत है. पाक के रास्ते देश पर टिड्डी आतंकियों ने हमला कर दिया है. जी हां, आपने सही सुना. ये टिड्डी कोई फ़िसड्ड़ी प्रजाति नहीं हैं, बल्क़ि पाक के पाले हुए आतंकी हैं. हमारे पास इसका सबूत भी है. हमारे इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट ने अपनी ‘जान’ की बाज़ी लगाकर इस साज़िश का पर्दाफ़ाश किया है. आज उसकी जान सुकून से अपनी ज़िंदगी गुज़ार रही है. 

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आपको बता दूं दर्शकों, पता चला है कि ये टिड्डी हर ‘हरी’ चीज़ को चट कर जाते हैं. हरे रंग से इनका ये प्रेम इस बात की गवाही है कि ये टिड्डी पाक परस्त हैं. ये उनकी बिरयानी का अहम हिस्सा हैं. बल्क़ि मैं तो कहता हूं कि पाक के लोग ही टिड्डी हैं. यही नहीं, एक तरफ़ बॉर्डर के रास्ते पाक ने इन टिड्डियों को भेजा वहीं, दूसरी ओर पुलवामा हमले जैसी साजिश को एक बार फिर अंजाम देने की कोशिश. लेकिन हमारी मुस्तैद रिपोर्टिंग की वजह से सुरक्षाबलों ने हमले को नाकाम कर दिया. 

इस वक़्त तक मेरा रोमांच बढ़ चुका था. दही में मैंने नमक और मिर्ची झोंक दी थी. भुना जीरा डालता उसके पहले ही न्यूज़ एंकर चिल्ला उठा, बेटा क्या दिखा रहे हैं आप... हाथ में क्या है... एक मिनट... हाथ में क्या है बेटा... इनको फुल स्क्रीन में लीजिए... हमने कहा अमा घुसो... काहे फुल स्क्रीन में, मेरे हाथ में कुछ भी हो तुझसे क्या बे. हम काहे बताएं कि मेरे हाथ में भुना जीरा है. 

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देखते ही देखते महौल गर्म हो गया. न्यूज़ एंकर ने यलगार कब बोला था और जंग-ए-एलान अब हुआ. पाक ने कुछ मिसाइल टाइप का दिखाया तो हमने भी अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए तीर चलाना शुरू कर दिया. उसके बाद दोनों तरफ़ से कुछ-कुछ इशारे होने लगे. मुझे लगा था कि झगड़ा करेंगे लेकिन वो किसी और चीज़ की ही प्लानिंग करने लगे. मेरा इस बात पर बहुत मूड ख़राब हुआ. अमा अपनी पर्सनल लाइफ़ दुनिया के आगे क्यों ज़ाहिर कर रहे हों. अपने किंकी थॉट्स अपने तक रखो. एक पल को तो मुझे अपना आधार कार्ड चेक करना पड़ गया, भइया अंडर एज में ये सब शोभा थोड़ी देता है. मैंने उन्हें रोकना भी चाहा लेकिन नीचे विदेश मंत्रालय के बयान की हेडलाइन चलने लगी. राजनयिक स्तर पर समाधान की कोशिश जारी है, मध्यस्थता करने की कोई ज़रूरत नहीं. हमने कहा नहीं करेंगे. हमें क्या पड़ी फ़टे में टांग अड़ाने की. 

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खैर इत्ते में ही एंकर का ईमान जाग गया. कहने लगा बहुत तमाशा कर लिया. अब इनके मुंह मत लगिए. मुहं लगे थे? साला ये वाला सीन तो छूट ही गया. 

मैं तो चुप हो गया मगर टिड्ड्यों में कोहराम मच गया. टिड्डी सूत्रों से उन तक इस डिबेट की सूचना पहुंच गई थी. टिड्डी बहनें काफ़ी परेशान थीं. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आख़िर वो जाएं तो कहां जाएं. पाक पहुंचे तो इस्लाम के दुश्मन करार दे दिए गए. भारत आए तो पाक परस्त हो गए. बहन हमें ऊपर वाले ने ही हरा रंग चट करने वाला बनाया है, तो इसमें हमरा क्या क़ुसूर. सोचा था भारत आ जाएंगे तो हरा रंग का दुश्मन समझ हमारा स्वागत होगा, लेकिन हमें क्या पता था कि यहां लोगों को पाक से ज़्यादा प्रवासियों से नफ़रत है. सच कह रही हो बहन, एक बार पाक के आतंकी होते तो बच भी जाते, लेकिन ये लोग प्रवासियों को तो कभी नहीं छोड़ेंगे. 

खैर टिड्डी आतंकिंयों का जो होगा सो होगा, पर राष्ट्रीय सुरक्षा पर इस अद्भुत एंकरिंग से मेरा सीना गर्व से फूल उठा. देशप्रेम पूरे बदन में हिलोरे मारने लगा. मेरे जज़्बात इत्ता चौड़ियाने लगे कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब रायता फैल गया.