आज दिन है बॉस, आज दिन है. विश्व बंधुता का सबसे बड़ा दिन. धर्म, जाति, रंग, भाषा को सार्वजनिक तौर पर नकारने वालों दिन है. आज अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस है. अंग्रेजी में बोले तो International Tea Day. किसी भी भाषा में कह लो, मगर चाय मने सच्चा इश्क़ ही होगा.

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चाहें सुड़सुड़ कर पीने वालें हों या साइलेंसर दाब के चुस्की लेने वाले, मलाई मारकर पसंद करते हों या अदकर-इलायची डालकर, पर मोहब्बत सबकी एक जैसी ही है. ये चाय ही तो है, जो चिलचिलाती धूप में टीन शेड वाली दुकान पर आहेहाएहाए गर्मी कहने का असली मज़ा देती है और जाड़े में गर्म कप की गर्मी का एहसास. इस चाय की मोहब्बत में डूबकर न जाने कितने मासूम पार्लेजी बेमौत मारे गए. अरारोट और गुड्डे तक इसकी आशिकी में पिघलने से ख़ुद को रोक न सके.

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ये भी क्या करें बेचारे, चाय होती ही इतनी हॉट है. ये ऐसी बला है, जिससे दूर रहा ही नहीं जाता. कुछ करने जा रहे हो तब चाय, कुछ करके थक गए हो तब चाय, मेहमान आएं तब चाय, मेहमान बनकर जाएं तब चाय. मतलब इसने हद ही मचा रखी है. लोग कहते हैं ईश्वर हर जगह है, ई हिसाब से तो चाय साक्षात देवी निकली बे. सच में देवी ही तो है, सच्चे दिल से इसे पूजने वाले प्रधानमंत्री तक बन गए.का गुरू गलत तो नहीं कह रहे. गलत भी कह रहे होंगे तो तुम कहां बुरा मानने वाले हो. तुम कम पुजारी थोड़े हो.

आइये फिर आपकी आप जैसों से मुलाकात कराते हैं. तो जनाब उठाइए चाय और हो जाइए तैयार, क्योंकि देश का एकलौता सच्चा चौकीदार, आपका वफ़ादार मैं यानि कि ‘नहीं बे उनकी बात नहीं कर रहा’ मैं यानि कि मैं पेश करने जा रिया हूं, चाय पर बने एक से बढ़कर एक मीम. ये रहे...

वैसे आपका चाय वाला वो पल, जब हौक के तलब लगती है, वो क्या है और कैसी चाय आपको पसंद है? हमें कमंट बॉक्स में ज़रूर बताएं.