Source: dilsedeshi

चिकन बनाने के लिए मैं कल प्याज़ काट रहा था, आंसू निकले जा रहे थे. आंसू का कारण प्याज़ नहीं उसकी कीमत थी, 80 रुपये प्रति किलो. कल की चिकन पार्टी का प्लान, प्याज़ की वजह से शोक सभा में तब्दील हो गया था. चिकन खाने से लेकर हाथ धोने तक की प्रक्रिया में हमने लगभग जैन धर्म अपना लेने का फ़ैसला कर लिया था. 

प्याज़ के ऊपर साल में कस से कम दो बार ख़बर ज़रूर लिखी जाती है. पहली ख़बर होती है, सही कीमत न मिलने पर किसान ने अपनी प्याज़ मंडी में छोड़ दी. दूसरी ख़बर- प्याज़ की कीमत पहुंची सौ के पार. इन दो ख़बरों के बीच एक समानता है, किसान सोचते हैं वो प्याज़ उगाएंगे तो उनका माल महंगा बिकेगा! बेचारे हर बार अनलकी हो जाते हैं. 

बेरोजगारों के बीच सरकार के प्रति अच्छी-ख़ासी नाराज़गी है. पहले पकौड़े बेचने को कहते हैं और फिर प्याज़ के दाम बढ़ा देते हैं. पकौड़े की दुनिया में प्याज़ की वही एहमियत है जो भाजपा में नरेंद्र मोदी की है, कई बड़े नाम हैं लेकिन दुकान एक ही नाम के भरोसे चल रहा है. 

कुछ लोग इसे सरकार का मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं! 8 नवंबर(नोटबंदी की शाम) क़रीब है, हो सकता है मोदी जी अचानक से घोषणा कर दें कि आज रात से सभी मुद्राएं अमान्य हो जाएंगी और उनकी जगह प्याज़ का इस्तेमाल किया जाएगा. इस तरह हमारी करेंसी डॉलर के बराबर हो जाएगी. इस तरह हमारी अर्थव्यवस्था रातों रात 5 ट्रिलिनय डॉलर की बन जाएगी, जिसमें 12 ज़ीरो होते हैं. 

जिनके घर में प्याज़ की बोरी पड़ी है, वो डरे-डरे घूम रहे हैं, कहीं उनके घर इनकम टैक्स की रेड न पड़ जाए. जब ख़रीदी थी तब सस्ती थी अब कीमत बढ़ने से वो मालामाल हो गए हैं, समझ नहीं आ रहा क्या किया जाए इतनी बड़ी धनराशी का! सयाने लोग शेयर मार्केट पहुंच गए हैं, उन्हें लगा प्याज़ देकर वो रिलायंस के शेयर ख़रीद लेंगे. दलाल ने बोला 8 नवंबर का इंतज़ार कीजिए, सरकार ने अभी ये वाला नियम नहीं बनाया, आप वक़्त से आगे चल रहे हैं.