प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर के बारे में कहा था कि वो उन्हें दिल से माफ़ नहीं कर पाएंगे. लेकिन प्रज्ञा ठाकुर की ग़लती क्या थी? दरअसल, प्रज्ञा ठाकुर ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के बारे में कहा था कि वो सच्चे देशभक्त थे. यह बात प्रधानमंत्री को अच्छी नहीं लगी थी. इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के ऊपर आतंकी हमले का आरोप भी है, लेकिन ये बड़ी बात नहीं है. शायद इसलिए प्रधानमंत्री द्वारा कभी दिल से न माफ़ कर पान के बावजूद प्रज्ञा ठाकुर को रक्षा मंत्रालय के संसदीय सलाहकार समिति का सदस्य बनाने के लिए नामित किया गया है.

हालांकि तमाम विवादों के बावजूद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को रक्षा मंत्रालय का हिस्सा बनाया जाना चाहिए. कुछ महीने पहले उन्होंने अपने एक 'दुश्मन' को श्राप देकर निपटाने का दावा किया था. ये तकनीक किसी भी देश के पास नहीं है. ऐसे अती ज्ञानी लोग जब रक्षा मंत्रालय में जाएंगे तो रक्षा मंत्रालय की रिसर्च टीम 'श्राप तकनीक' को बड़े पैमाने पर विकसित कर सकते हैं. जिसे सिर्फ़ निजी हित नहीं देश हित के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.

भाजपा के पास 300 से ज़्यादा सांसद हैं, जिनमें सिर्फ़ एक के ऊपर आतंकी हमला करने का आरोप है, साबित नहीं हुआ है, बस आरोप है. लेकिन ऐसे आरोप सासंदों पर आमतौपर नहीं ही लगते हैं किसी भी भ्रष्टाचार, हत्या, मारपीट या फिर बिना किसे मुकदमे वाले सांसद को भी सदस्य बनाया जा सकता था, लेकिन नहीं प्रज्ञा ठाकूर को ही चुना गया. क्योंकि प्रधानमंत्री के हिसाब से प्रज्ञा ठाकुर को एक मैसेज देने के लिए संसद में भेजा गया, वो मैसेज जब पहुंच जाए तो मुझे भी बताएंगे क्योंकि मुझे अबतक नहीं मिला और मैं उल्टा-पुल्टा कुछ भी समझ जा रहा हूं.

इसके बाद अगर विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बाल एवं महिला विकास मंत्रालय सौंप दिया जाए तो कोई हैरान होने वाली बात नहीं होगी. क्योंकि जबतक आरोप साबित नहीं हो जाते वो संवैधानिक रूप से इसके हक़दार हैं. कभी हाई कोर्ट द्वारा तड़ीपार किए गए अमित शाह देश के गृहमंत्री तो हैं ही.