इस देश में कॉमेडियन्स को सीधी टक्कर नेताओं से मिलती है. कॉमेडियन्स जिस चीज़ को जोक बनाने की सोचते हैं, नेता जी उस बात को अपने भाषण में गंभीरता के साथ यूं ही बोल जाते हैं.

Ramesh Pokhariya
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वैसे तो कई हैं लेकिन नेताओं में एक नाम बड़ी तेजी से उभर रहा है, रमेश पोखरियाल 'निशांक'. ये साहब राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं लेकिन सीरियस कॉमेडी में भी यदा-कदा हाथ आज़माते रहते हैं. हालिया उदाहरण से शुरू करते हैं. 

रमेश पोखरियाल वर्तमान में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय संभाल रहे हैं. वार्षिक कॉन्वोकेशन के मौके पर मंगलवार को उन्हें IIT खड़गपुर में नए बच्चों को अपने भाषण से प्रोत्साहित करने के लिए बुलाया गया. लेकिन मंत्री जी उन्हें ज़िंदगीभर का चैलेंज दे कर चले गए. उन्होंने कहा, 'जब हम पीछे देखते हैं तो हमे याद आता है कि कैसे हमारे इंजीनियरों ने राम सेतु बनाया था. आने वाले इंजीनियरों को इस विषय के बारे में पढ़ना चाहिए और इसके ऊपर नए सिरे शोध करना चाहिए.' 

ऐसा पहली बार नहीं है जब मंत्री जी ने विज्ञान को उसकी औकात दिखाई है. संसद में भी वो वैज्ञानिकों को ओपन चैलेंज दे चुके हैं. सदन के पटल पर उन्होंने कहा था कि आज का विज्ञान ज्योतिष विज्ञान के सामने बौना है... जब पोखरियाल जी को ज्योतिष विज्ञान पर इतना ही भरोसा है तो वो इंजीनियरों को राम सेतु पर रिसर्च करने के लिए क्यों बोल रहे हैं, ज्योतिषियों से संपर्क करें. 

इन बयानों के पढ़ने के बाद आप HRD मिनिस्टर को बारहवीं फेल समझने की भूल मत कर बैठिएगा. उन्होंने पीएचडी कर रखी है और ऊपर से चार दर्जन किताबें भी लिख मारे हैं. फिर समझ आता है कि 'वैज्ञानिक सोच' रखने के लिए वैज्ञानिक होना ज़रूरी नहीं और कॉमन सेंस कॉलेज जा कर नहीं आता. 

इसी साल IIT मुंबई में उन्होंने नासा के हवाले से दावा किया कि एक मात्र वैज्ञानिक भाषा संस्कृत के कारण ही बात करने वाले कंप्यूटर को बनाना संभव है. फिर लोगों ने उन्हें समझाया की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ये सब काम नहीं करती. पता नहीं, मंत्री जी को ये बात समझ आई या नहीं! 

आपने शायद ध्यान न दिया है, मुझे रमेश पोखरियाल के दावों में एक पैटर्न दिखता है. अब मैं बिना ज्योतिष विज्ञान का इस्तेमाल किए भी बता सकता हूं कि वो आने वाले समय में कैसे-कैसे दावे कर करने वाले हैं. 

किसी मौके पर अगर ISRO ने रमेश पोखरियाल को बुलाया तब वहां वो वेज्ञानिकों को रॉकेट-वॉकेट छोड़ ब्रह्मास्त्र पर शोध करने को कहेंगे और ब्रह्मास्त्र की क्या खूबियां होती हैं वो आप मुझसे बेहतर जानते होंगे. 

बाढ़ और बांध की समस्या सुलझाने के लिए भी मंत्री जी के पास आउट ऑफ़ दी बॉक्स आइडिया होगा. बांध बना कर पैसे बर्बाद करने से अच्छा है वो तकनीक बनाई जाए जिसके इस्तेमाल से हनुमान जी एक पहाड़ भारत से श्रीलंका शिफ़्ट कर दिए थे. एक बार तकनीक तैयार हो गई तो हमे सिर्फ़ हिमालय से पहाड़ उठा-उठा कर इधर-उधर फ़िट करने होंगे. 

रमेश पोखरियाल की सलाह पर अगर देश के खिलाड़ी सही दिशा में मेहनत करें तो लॉन्ग जंप और हाई जंप में भारत के मेडल पक्के हैं, बस खिलाड़ियों को जामवंत जैसा कोच चाहिए होगा, ये काम मंत्री जी को सौंपी जाएगी.

HRD के साथ-साथ मंत्री जी को टेक्स्टाइल का भी अतिरिक्त भार दिया जाए. कपड़ा का बाज़ार घाटे में जा रहा है, प्रोडक्शन में कमी आ गई है. कारखाना मालिकों को द्रौपदी की साड़ी वाली तकनीक पता चल जाती, तो हम दुनिया में एक्स्पोर्ट के बादशाह बन जाते. 

अव्वल तो ये होता कि रमेश पोखरियाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रक्षा मंत्री बना देते, फिर अगले दिन ही भारत की चौहदी पर लक्षमण रेखा(कॉकरोच मारने वाली नहीं, पुरानी वाली) खींचने की तैयारी शुरू हो जाती. इससे पड़ोस की सेना या आतंकवदी भारत की धरती पर कदम भी नहीं रख पाएंगे और हम निश्चिंत हो कर विकास करते रहेंगे.