दुनिया में सबसे अलहदा मिज़ाज की कोई कौम है, तो वो हम भारतीयों की है. यहां बच्चों को पोलियो के इन्जेक्शन से पहले ही ख़ुराफ़ात की डोज़ लगा दी जाती है. हमारे यहां कहावत तक तो सीधी होती नहीं, फिर लोग कैसे संभव हैं. बचपन से ही हमें उंगली टेढ़ी कर के ही घी निकालना सिखाया गया है.

ऐसे में हमने सोचा क्यों न उन अनोखी ख़ूबियों का ज़िक्र किया जाए, जो सिर्फ़ हम भारतीयों में पाई जाती हैं. तो चलिए फिर जहां सोच आ ही गई है, वहां शौचालय भी बना दिया जाए. 

1. आइस्क्रीम विद रसगुल्ला, जानलेवा स्वाद है लिल्लाह!

Gulabjamun with Icecream
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ये चरम ख़ुराफ़ाती कॉम्बिनेशन सिर्फ़ भारतीयों तक ही सीमित है. आपको शादी-ब्याह में एक ज्ञानदेवता ऐसा ज़रूर मिलेगा, जो आपको आइस्क्रीम के साथ रसगुल्ला खाने की सलाह देगा. और अगर कोई आपको बीच गंगा में खड़ा होकर भी ये बोले कि ये कॉम्बिनेशन मस्त है, तो नाव लेकर पहुंचिएगा और उसे डुबो-डुबोकर पेलिएगा. 

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2. कैंची साइकिल चलाना

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दुनियाभर के बच्चों को साइकिल उनके वर्तमान कद के हिसाब से दिलाई जाती है, लेकिन हमारे यहां भविष्य की हाइट को ध्यान में रखकर. ऐसे में छुटंकी टांगों से गद्दी तक पिछाड़ी पहुंचती ही नहीं. मजबूरन साइकिल चलाने की एक एकदम ही नई विधा का अविष्कार हुआ. मैं गारंटी ले सकता हूं कि इस देश की आधी से ज़्यादा आबादी ने साइकिल कैंची चलाकर ही सीखी होगी. 

3. गुटखा थूकने में विविधता

भारत की वास्तविक विविधता में एकता देखनी है, तो गुटखाबाज़ों से मिलिए. हर नुक्कड़-चौराहें पर यहां आपको अर्ध-गूंगे प्राणी मिल जाएंगे. भले ही ये सब मसाला खाते हों, लेकिन इनके थूकने का अंदाज़ एक-दूसरे से बिल्कुल जुदा होता है. कोई पुचक से ज़मीन पर थूकता है, तो कोई वी शेप उंगलियां बनाकर दीवारों के कोने पर धार मारता, तो कोई ऐसा मुंह खोलकर उगलता है मानो ज्वालामुखी फट पड़ा हो. कुछ ऐसे भी पेशेवर गुटखेबाज़ होते हैं, जिन्होंने अपने ही पेट को थूकदान बना लिया है. 

4. पेन से पजामे का नाड़ा डालना

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कलम में इतनी ताकत होती है कि वो किसी भी इंसान को इज़्ज़दार बना सकती है. भले ही लिखकर न कर पाए, लेकिन पजामे में नाड़ा डालकर तो बना ही सकती है. ख़ासतौर से भारतीयों को. आप एक काम करिएगा, किसी भी पजामा पहने आदमी का नाड़ा चेक कर लीजिए. गारंटी है कि आधे से ज़्यादा के सफ़ेद नाड़ों पर आपको पेन के निशान दिख जाएंगे. बस जब वो पहने हो तब मत चेक करिएगा. अजीब हो जाएगा!

5. मिनरट वॉटर की बोतल में सादा पानी भरकर पीना

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अगर किसी आम भारतीय ने कभी ग़लती से 20 रुपये का पानी खरीदा है, तो वो अगले 20 महीने उसी बोतल से पानी पिएगा. बोलत टेढ़ी हो जाएगी, तो मुंह से फुलाकर सीधी कर देगा. वो तब तक यूज़ करेगा, जब तक पूरी बोतल की ऐसी-तैसी न कर दे. मगर अंत में भी वो फेंकेगा नहीं, बल्कि उसमें फ़िनाइल डालकर घर के एक कोने में छोड़ देगा. 

6. मंगल-शनि को बाल-नाखून न कटवाना

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ऊपर वाला ख़ुद दिन और तारीख़ भूल सकता है, मगर हम भारतीय भक्त नहीं. मंगल की माया और शनि का साया हमें ऐसा डराए रहता है कि इन दिनों पर हम बाल-नाखून कटवा ही नहीं सकते. लॉजिक है कि इस दिन हानिकारक किरणें निकलती हैं, बाल कटवाओगे तो दिमाग़ पर असर पड़ेगा. मतलब, इस हिसाब से तो सारे गंजे अब तक पगला ही चुके होते. क्यों अनुपम बाबू?

7. देसी पीकर अंग्रेज़ी बोलना

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ये एक बड़ा विज्ञान है. मतलब इस पर रिसर्च होनी चाहिए कि कैसे बॉडी में जाती देसी है और निकलती अंग्रेज़ी है. मतलब ये पेट में कैसा कैमिकल रिएक्शन है. आई थिंक, वन डे वी ऑल भाई विल फ़ाइंड ऑउट.

8. जुगनू के पिछवाड़े पर डोर बांध उड़ाना

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ये अलग ही लेवल का शौक़ है. बचपन में जब पतंग उड़ाने के भी पैसे नहीं थे, तब सीधा जुगनू ही पकड़ लिया करते थे. बस रात में उसके पिछवाड़े डोर बांधी और लगे उड़ाने. वाक़ई में, भारतीय बच्चों से ज़्यादा ख़ुराफ़ाती आपको दुनिया में कोई नहीं मिलेगा. 

9. सरकारी दामाद की ख़्वाहिश

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भारत में लड़कियों के मां-बाप भोले-भाले लड़कों का बुरी तरह काटते हैं. गोरी लड़की, 5.5 इंच हाइट, पढ़ी-लिखी, सुंदर-सुशील, गुणवती टाइप फंसाने वाली बातें इश्तेहार में पहले लिखते हैं, फिर लिखते लौंडा सरकारी ही चाहिए. मतलब लौंडा कितना ही गुणहीन, चरित्रहीन और शक्लहीन हो, चलेगा. बस सरकारी नौकरी चाहिए. कभी-कभी तो सोचता हूं कि जेल ही चला जाऊं. भई, जेल में पत्थर तोड़ना भी सरकारी नौकरी ही है. 

10. शरीर से ज़्यादा बड़ी गुंडई पेलना

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हर नुक्कड़-चौराहे पर यहां रंगबाज़ी का ऐसा पाठ पढ़ाया जाता है कि शारीरिक कुपोषित भी खली को हौकने का दावा करते मिल जाएगा. इनका हर डॉयलाग विज्ञान को सीधे चुनौती देते है. मारेंगे कंटाप अभी चार बार घूमकर गिरोगे, मारा तमाचा कि अभी सतरंगी मूत देगा, एक ही घूसे में उड़ जाओगे. और न जाने क्या-क्या. हम भारतीयों का बस चले तो लड़ाई में ग्रैविटी की नट्टी दबाकर उसे बैमौत मार दें. 

तो ये हमारी मुंहपेलेई का आखिर था. पेशकश कैसी लगी, कमंट में बताएं. कुछ एक्सपीरियंस हों, तो शेयर भी करें.