वो प्यारे से डॉग वीडियो देखने के बाद ऐसा कौन होगा जिसे घर में एक डॉग लेकर आने का मन नहीं करता होगा! मेरा भी करता है, मुझे भी डॉग्स पसंद हैं, लेकिन मेरे पास Pet Dog नहीं है.

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मेरे घर के पास जितने भी डॉग्स या Cats रहती हैं, वो सब मुझे अच्छे से जानते हैं. इस हद तक कि अगर उन्हें कोई नया चेहरा मेरे घर के आस-पास दिख भी जाए, तो वो मेरी Security के लिए उन पर भौंकने भी लगते हैं. उन्हें दूध पिलाना, चुपके-चुपके बिस्कुट खिलाना मेरी Joblist का हिस्सा है.

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मैं इनसे प्यार तो करती हूं, लेकिन इन्हें पाल नहीं सकती.

ऐसा मैं अपने बिज़ी शेड्यूल के चलते नहीं कर पाती हूं, क्योंकि मेरा मानना है कि अगर हम डॉग्स को या और भी जानवर जैसे बिल्लियां, गाय, खरगोश और तोते किसी को भी पालते हैं तो उसकी पूरी केयर की ज़िम्मेदारी हमारी होती है, न कि किसी और की. अगर हम एक जानवर को ख़ुद लाकर, दूसरे पर थोपते हैं तो उससे अच्छा वो जहां हैं उसे वहीं रहने दें.

जैसा मेरी एक फ़्रेंड ने किया था. वो मनाली की ट्रिप पर गई थी, जहां एक कुत्ता उसके साथ पूरी ट्रिप पर रहा, वो भी उतना ही पैदल चला जितना वो चली, सारे एडवेंचर किए, मस्ती की, लेकिन वापस आते समय वो उसे लेकर नहीं आई. इसका मतलब ये नहीं था कि वो लगाव झूठा था. उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो जॉब करती है और उसे पता था कि वो उसकी देखभाल नहीं कर पाएगी जैसी वो चाहेगा.

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बचपन में मेरी कॉलोनी में मुझे कोई भी Puppy दिखता था मैं उसे उठा लाती थी, लेकिन पापा बोलते थे इसे छोड़कर आओ जहां से लाई हो. तब मैं उनसे गुस्सा हो जाती थी, रोती थी. मगर वो ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वो उसकी केयर करते थे, उस वक़्त मैं पढ़ाई करती थी और उनका कहना था कि जब केयर नहीं कर सकती तो मत पालो. अब समझ आता है कि वो सही कहते थे.

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मैंने देखा है कुछ लोग जानवरों को बहुत प्यार जताते हैं और अपने थोड़ी देऱ के लगाव को वो प्यार समझकर उसे घर ले जाते हैं. मगर कुछ दिनों बाद वही समस्या पनपनती है, उसकी केयर न कर पाने की. तब वो उसे किसी को देने की सोचते हैं, यहां तक कि फ़ेसबुक पर या Olx पर भी बेचते हैं. जब वो कहीं भी नहीं बिक पाता, तो उसे घर से बहुत दूर ले जाकर छोड़ आते हैं. जहां से वो रास्ता न समझ पाए और वापस न आए.

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ऐसा करने से वो तो फ़्री हो जाते हैं. मगर उसकी ज़िंदगी का संघर्ष वहां से शुरू होता है. क्योंकि पालतू जानवर का सड़क में रहना अपने आप में एक संघर्ष है. लोग उसे मारते हैं, खाना नहीं मिलता उसे, फिर एक दिन कहीं किसी की कार के नीचे आकर या वो दम तोड़ देता है.

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जैसा अभी हाल ही में दिल्ली में देखने को मिला, जहां एक सोते हुए Puppy पर एक आदमी ने कार चढ़ा दी. वो भी सिर्फ़ मस्ती करने के लिए. क्या ये सही था?

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ऐसा सिर्फ़ कुत्ते या बिल्ली के साथ नहीं होता है, बल्कि ये दर्द गाय को भी झेलना पड़ता है, जिसे हम माता कहते हैं. वो माता तब तक ही घर में रह पाती है जबतक वो दूध देने लायक होती है. जैसे ही वो बामीर होती है या किसी कारणवश वो दूधनहीं दे पाती, तो उसे भी लोग सड़क पर छोड़ देते हैं. वो खाने के नाम पर कूड़े के ढेर से पॉलीथिन खाती है.

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मैं बस आपसे इतना ही कहूंगी कि अगर आप उसे नहीं पाल सकते, तो अपने कुछ देर के लगाव को उसकी पूरी ज़िंदगी का संघर्ष मत बनाइए. अगर आपको डॉग्स और कैट्स अच्छे लगते हैं तो वही करिए जैसा मेरी फ़्रेंड ने किया. उन्हें वो प्यार, वो केयर दीजिए, न कि घर लाकर उसे छोड़ दीजिए. नहीं तो अपने आस-पास के एरिया के स्ट्रे डॉग्स को प्यार करिए, खाना दीजिए, वो प्यार दीजिए जो उसे मिलना चाहिए.

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मुझे जानवरों से प्यार है और ये प्यार मैं उन्हें खाना दे कर, उनके साथ खेल कर या ठंड में उन्हें कम्बल और शेल्टर दे कर जताती हूं.

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मैं किसी भी जानवर को Pet तभी करूंगी जब मैं उसे पूरी केयर दे पाऊं.

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