बीते शुक्रवार सीबीआई की विशेष अदालत ने जैसे ही राम रहीम को बलात्कार का दोषी घोषित किया, वैसे ही पंचकुला, सिरसा समेत हरियाणा के कई ज़िलों में हिंसा, आगजनी जैसी घटनायें सामने आने लगी. आलम ये था कि दंगाई, मीडिया कर्मियों और आम लोगों की भी निशाना बना रहे थे.

उपद्रव के ऐसे माहौल में दंगाइयों को संभालना मुश्किल हो रहा था. कुछ जगहों से ऐसी भी ख़बरें आई कि पुलिस वालों ने भाग कर अपनी जान तक बचाई. डर और ख़ौफ़ के इस माहौल में एक ऐसी भी अधिकारी थी, जो इन हालातों से निपटने के लिए जी-जान लगाए हुए था.

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ख़बरों के मुताबिक, पंचकुला की डिप्टी कमिश्नर गौरी पाराशर जोशी को शहर में कानून व्य्स्वस्था की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया. यहां तक कि इस दौरान गौरी घायल भी हो गई, पर पीछे नहीं हटी. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दंगाइयों से निपटने के दौरान गौरी के कपड़े भी फट गए थे. दंगाई उनकी तरफ़ लाठियां और पत्थर ले कर बढ़ रहे थे.

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गौरी 11 महीने के एक बच्चे की मां भी हैं. इसके बावजूद वो सुबह 3 बजे घर सिर्फ़ इसलिए गईं, ताकि वो लौट सकें. उग्र होते डेरा समर्थकों से निपटने के दौरान भी वो सिर्फ़ अपने PSO के साथ अकेली नज़र आई. बिगड़ते हालत को संभालने के लिए आख़िरकार उन्होंने आर्मी के हाथ में कमान सौंप दी.

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2009 बैच की IAS अधिकारी गौरी पाराशर जोशी पिछले साल ही पंचकुला की डिप्टी कमिश्नर बनी हैं. इससे पहले उनकी पोस्टिंग उड़ीसा के नक्सल प्रभावित इलाके में थी, जहां उन्होंने स्थानीय महिलाओं की मदद के लिए गरीबी से लड़ने संबंधी कार्यक्रम चलाये थे.

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इस अधिकारी की हिम्मत देख कर एक बार फिर हम गर्व से कह सकते हैं कि महारी छोरियां, छोरों से कम हैं के?'

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