वेडिंग का सीज़न मतलब नाच-गाना, बैंड-बाजा, शॉपिंग-वॉपिंग और न जाने क्या-क्या? शादी अगर खुद के घर में हो, तो फिर इसकी बात ही कुछ और हो जाती है. हमारे यहां सिर्फ़ शादियों के लिए ही न जाने कितनी तैयारी की जाती हैं? सिर्फ़ शादी ही क्यों, उससे पहले रिश्ता तय करने में भी कितनी तिकड़म लड़ानी पड़ती है? चाचा- ताऊ, मामा-मामी, देवरानी-जेठानी सब से अच्छे लड़के या लड़की को नज़र में रखने के लिए बोल देते हैं. इस मामले में लोग पंडित जी से भी कन्फ़र्मेशन लेने में कोई कसर नहीं छोड़ते.

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इन सब के अलावा एक बेहद ज़रूरी बात, जिस पर ज़्यादातर लोग ध्यान नहीं देते. एक-दूसरे के घर-परिवार, ज़मीन-जायदाद के बारे मे जानना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है कि होने वाले दूल्हा-दुल्हन, एक-दूसरे के हेल्थ के बारे में जाने.

हमारे समाज में भले ही इस बारे में अभी जागरूकता न फैली हो, लेकिन अरेंज्ड मैरिज हो या लव मैरिज, शादी से पहले प्री-मेडिकल हेल्थ चेकअप कराना बेहतर होता है. लोगों को लगता है कि ये उनकी कमियां पता लगाने के लिए है, जबकि ये एक-दूसरे के बारे में जान कर बेहतर तरीके से भविष्य की योजना बनाने के लिए है.

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युवाओं के मन में ये ग़लतफ़हमी है कि इसमें वर्जिनिटी टेस्ट भी शामिल होता है. शादी की इतनी सारी तैयारियों में इस तरह के चेकअप कराने का छोटा-सा फ़ैसला भविष्य की बड़ी परेशानियों को टाल सकता है. इसका मकसद ये जानना होता है कि शादी करने के लिए आप शारीरिक रूप से कितने तैयार हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही हेल्थ चेकअप के बारे में बता रहे हैं, जो एक सफ़ल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए लोगों को ज़रूर कराने चाहिए.

बल्ड ग्रुप टेस्ट

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अगर लड़का-लड़की दोनों ही Same Rh फैक्टर के हों, तो बेहतर है. प्रेगनेंसी के समय बच्चे और मां का अलग-अलग Rh फैक्टर होने से मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

इन्फ़र्टिलिटी स्क्रीनिंग (जनन क्षमता)

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इससे ज़्यादातर लोग कतराते हैं. उन्हें लगता है कि अगर कुछ कमी हुई, तो उनकी आने वाली ज़िंदगी में मुश्किलें बढ़ जाएंगी. अचानक कुछ पता चले और झटका लगे, उससे अच्छा है कि आप आने वाली परिस्थितियों के लिए पहले से खुद को तैयार रखें. इन्फ़र्टिलिटी स्क्रीनिंग के बारे में भी ये भ्रम है कि ये सिर्फ़ लड़कियों के लिए होता है. जबकि, ये टेस्ट लड़का और लड़की दोनों को ही कराना चाहिए. लड़कियों में Reproductive Hormones जैसे FSH, LH, Prolactin और PCOS की जांच होती है. ये जांच ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड से होती है. वहीं लड़कों को इन्फ़र्टिलिटी स्क्रीनिंग के लिए Sperm Sample देना होता है.

STD/HIV

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ज़ाहिर है इनका नाम सुन कर ही लोग नज़रें चुराने लगते हैं, लेकिन ये दोनों एक जानलेवा बीमारी हैं. बात जब पूरी ज़िंदगी साथ बिताने की हो, तो बेहतर है कि दोनों साथी सहमति से एक बेहतर जीवन के लिए अपनी जांच करवा लें.

अन्य

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इनके अलावा भी कुछ अन्य बीमारियों की शादी के पहले जांच करा लेना चाहिए. जैसे, हार्ट डिज़ीज़, डायबिटीज़, लिवर, ब्लड-प्रेशर आदि. हालांकि ये बीमारियां कभी भी हो सकती हैं, लेकिन सही वक्त पर पता चल जाने से दोनों साथी एक दूसरे का बेहतर ख़्याल रख पाएंगे.

कपल चेकअप

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ये एक-दूसरे के बीच आपसी समझ बढ़ाने के लिए एक मनोवैज्ञानिक टेस्ट है. ये एक ऑनलाइन टेस्ट की तरह है, जिसमें आपको अपने साथी का साथ देना होता है. इससे आपके रिलेशनशिप की पॉजिटिव और निगेटिव बातें पता चलेंगी. ये एक Questionnaire के रूप में होता है. इसे सबमिट करने के कुछ ही मिनट में आपको एक 12-15 पन्नों की रिपोर्ट मिलेगी. इससे अपनी कमियों को समझ कर आप अपने रिश्ते को और बेहतर कर सकते हैं.

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भारत की संसकृति में तो शादी को जन्मों का बंधन माना जाता है. यही वजह है कि इसकी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है. सिर्फ़ लड़का-लड़की ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार इस कोशिश में लगा रहता है कि नवदंपत्ति को आने वाली ज़िंदगी में कोई परेशानी न हो. प्री-मैरिटल चेकअप कराना भी इसी के लिए एक समझदारी वाला फ़ैसला साबित होगा. कई बार ये जांच अलग-अलग करानी होती है. वहीं कुछ अस्पताल प्री-मैरिटल चेकअप के पैकेज की सुविधा देते हैं. इससे अच्छा क्या होगा कि शादी के बंधन में बंधने जा रहे दो लोगों का जीवन न सिर्फ़ भावनात्मक रूप से अच्छा हो, बल्कि दोनों शारीरिक रूप से भी स्वस्थ हों और एक-दूसरे का बेहतर ख़्याल रख सकें.

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