गंगा में बढ़ता प्रदूषण देशभर के लिए एक गंभीर समस्या है. हांलाकि, सरकार द्वारा गंगा सफ़ाई को लेकर कई अभियान चलाए गये, लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण स्तर में कोई ख़ास कमी नहीं देखी गई. वहीं अब सरकार गंगा में प्रदूषण को रोकने के लिए कड़ा कदम उठाने की तैयारी में है, जिसके चलते गंगा को गंदा करने वालों को दंडित किया जाएगा.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार, जल संसाधन मंत्रालय व नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय जल्द ही सशस्त्र बल की टीम का गठन करेगी, जिसके पास गंगा को दूषित करने वालों को गिरफ़्तार करने का अधिकार होगा. यही नहीं, मंत्रालय की तरफ़ से प्रस्तावित मौसदे पर कई स्टेक होल्डर्स से राय भी मांगी गई है.

सरकार के इस ड्रॉफ़्ट के अनुसार, नदी में बाधा उत्पन्न करने वाली निर्माण गतिविधियां या फिर नदी के सामने की भूमि से औद्योगिक या वाणिज्यिक खपत के लिए भूजल निकालना अपराध की श्रेणी में आएगा, जिसके चलते इसका उल्लंघन करने वालों को दो साल की जेल या 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है.

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साथ ही गंगा और इसकी सहायक नदियों में वाणिज्यिक मछली पकड़ने और एक्वा कलचर गतिविधियों को भी अपराध की श्रेणी में ही रखा गया, जिसके लिए दो साल की जेल या 2 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.

वहीं अगर कोई व्यक्ति गंगा को दूषित करता हुआ पकड़ा जाएगा, तो उसे दंड स्वरूप 5 साल की जेल या 50,000 रुपये देने पड़ सकते हैं. प्रावधान के मुताबिक, गंगा संरक्षण की ज़िम्मेदारी जीपीसी के जवानों के पास होगी.

अब यहां सवाल ये है कि आखिर हम गंगा को दूषित करने के लिए किस-किस पर फ़ाइन लगाएंगे. इंड्रस्टी पर जो इसमें कचरा डालती है, या नगर पालिका जो ऐसा करने का हक देती हैं. या फिर वो भक्त जो गंगा में फूल वगैरह डाल कर इसे और अधिक गंदा कर देते हैं. सरकार की ये योजना कितनी सफ़ल होगी ये, तो वक़्त बताएगा. पर इससे पहले अगर हमारे इन सवालों के जवाब मिल जाते, तो अच्छा रहता.

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