राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों को एक नया इतिहास पढ़ाया जा रहा है. दरअसल, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब में महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी युद्ध का विजेता बताया गया है. इस नए इतिहास के मुताबिक, 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में राजपूत योद्धा महाराणा प्रताप जीते थे और अकबर की सेना हार कर भाग गई थी. वहीं अबतक के इतिहास में इस युद्ध को बेनतीजा बताया जाता रहा है. मतलब अबतक का हमारा पढ़ा-लिखा सब बेकार हो गया, क्योंकि इस नए इतिहास से तो यही पता चला रहा है कि महाराणा प्रताप के बारे में हमने जो पढ़ा वो ग़लत और अब जो बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, वो सही है.

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हालांकि, Indian Council For Historical Research के पूर्व सदस्य डी.एन झा का कहना है, 'तथ्यों को तोड़-मोड़ कर, नया इतिहास नहीं लिखा जा सकता है.'

वहीं शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी ने इस फ़ैसले को बिल्कुल सही बताते हुए तर्क दिया है, 'अबतक इतिहास ठीक से नहीं पढ़ाया जा रहा था, मगर अब उसे ठीक कर लिया गया है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पिछले साल तक 10वीं और 12वीं के बच्चों को यही पढ़ाया गया कि महाराणा प्रताप हल्दीघाटी युद्ध हार गए थे.' देवनानी के अनुसार, 'इतिहास में हमारे नायकों की भूमिका को कमज़ोर दिखाया गया है.'
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इतना ही नहीं, 10वीं कक्षा की इतिहास की किताब में संशोधन के बाद, राजस्थान विश्वविद्यालय के हिस्ट्री डिपार्टमेंट ने भी एक किताब शामिल की है, जिसमें राजा महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी युद्ध के विजेता के तौर पर पेश किया गया है.'

वैसे बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब इतिहास के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है. पिछले साल आठवीं क्लास की किताब से पंडित जवाहर लाल नेहरु का नाम ये कह कर हटा दिया गया दिया था कि नेहरु को 9वीं कक्षा की पुस्तक में अच्छी ख़ासी जगह दी गई है. हमारे माननीय शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी ने तो यह तक कह दिया था कि हर नायक को हर किताब में जगह नहीं दी जा सकती.

हद तो तब हो गई जब 11वीं की सोशल साइंस की किताब में कांग्रेस पार्टी को ब्रिटिशों का ‘Nurtured Baby’ बता दिया गया. वहीं दसवीं कक्षा की किताब में सावरकर को क्रांतिकारी, महान देशभक्त, और एक महान 'संगठनवादी' के रूप में वर्णित किया गया है. इसके साथ ही ये भी बताया गया है कि उन्होंने देश के लिए काफ़ी बलिदान दिए हैं.

वैसे क्या आपको सच में लगता है कि हम अपने देश के इतिहास के बारे पूरे तथ्य सही से जानते हैं? देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली की हालत देखने के बाद यही लगता है कि इतिहास के नाम पर आने वाली पीढ़ियों के साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ खिलवाड़ किया जा रहा और कुछ नहीं.

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वैसे नेताजी मैं आपसे यही कहना चाहूंगी कि आपको इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हमारे नायकों ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा दी, न कि इस बात पर शर्मिंदगी की वो युद्ध हार गए. वहीं अगर एक बार आपकी बात को सही मान भी लिया जाए, तो मतलब अबतक देश के लाखों-करोड़ों बच्चों ने इतिहास के बारे में जो पढ़ा, वो बिल्कुल ग़लत था और उनका पढ़ा-लिखा सब बेकार गया.

महाराष्ट्र राज्य शिक्षा बोर्ड की इतिहास की किताबों से 'मुगलों' को गायब कर देना, दिल्ली की औरंगजेब रोड का नाम बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम रोड रख देना, अखिल भारतीय हिंदू महासभा का राष्ट्रपति भवन में मौजूद शानदार मुगल गॉर्डन का नाम बदलकर, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद उद्यान करने की मांग करना, ये कहीं से भी सही नहीं है. इन बातों को देखते हुए सिर्फ़ एक ही चीज़ कही जा सकती है कि पुरानों तथ्यों को बदल कर आप देश के लिए नया इतिहास नहीं लिख रहे हैं, बल्कि देश के असली इतिहास को बर्बाद कर रहे हैं, जो कि देश के लिए काफ़ी शर्मिंदगी की बात है.

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