साल 2018 देश के विकास कार्यों और कई नई उपलब्धियों के लिए याद किया जाएगा. अभी पिछले महीने देशी की राजधानी दिल्ली में भारत का पहला केबल ब्रिज सिग्नेचर ब्रिज लोगों के लिए खोल दिया गया. अब सिग्नेचर ब्रिज के बाद देश को एक और बहुत बड़ा ब्रिज मिलने वाला है, जिसकी आधारशिला संयुक्त 1997 में मोर्चा सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने रखी थी. जी हां, हम बात कर रहे हैं बोगीबील ब्रिज (Bogibeel Bridge) की.

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आखिरकार 21 साल बाद असम और अरुणाचल प्रदेश के लिए ब्रह्मपुत्र नदी पर डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज Bogibeel Bridge बनकर तैयार हो गया है. इस ब्रिज के खुलने के साथ ही असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच आवागमन आसान हो जाएगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर यानि क्रिसमस के मौके पर इसका उद्घाटन करेंगे.

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Ndtv में छपी ख़बर के अनुसार, आपको बता दें कि 2002 में जब भास्कर गोगोई 18 साल के थे, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने इस विशाल रेल और सड़क ब्रिज के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी. गुवाहाटी से करीब-करीब 442 किलोमीटर दूर स्थित ये पुल 4.94 किलोमीटर लंबा है, ये देश का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है. असम और अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए ये पुल एक सपने के पूरा होने जैसा है.

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भास्कर गोगोई का कहना है,

मेरे जैसे बहुत से लोगों का सपना पूरा होने जा रहा है. ये पुल ब्रह्मपुत्र घाटी के उत्तरी और दक्षिणी सिरों को जोड़ेगा. इसका हमसे अलग-सा नाता है. जब मैं आठवीं में पढ़ता था उस वक्त उसकी नींव रखी गई थी और आज मैं डॉक्टर हूं. पुल को बनाने में काफ़ी वक़्त लगा, इसके लिए संघर्ष भी करना पड़ा और कई आंदोलन भी हुए.

आइये अब आपको रू-ब-रू कराते हैं इस पुल की ख़ासियतों से

कई मायनों में खास है देश का ये सबसे बड़ा है

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नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के सीपीआरओ प्रणब ज्योति सरमा के मुताबिक, 'ये पुल ब्रह्मपुत्र नदी पर बना है और ब्रह्मपुत्र नदी के दोनों सिरों को जोड़ना एक चुनौतीपूर्ण काम है क्योंकि ये बहुत ज़्यादा बारिश वाला इलाका है. वहीं सिक्किम जोन में होने के कारण यहां भूकंप का ख़तरा भी बहुत ज़्यादा होता है. मगर आज ये पुल बनकर तैयार है. हालांकि, बीते 16 साल में पुल के पूरा होने की कई डेडलाइन भी निकल चुकी थीं. इस पुल से पहली मालगाड़ी 3 दिसंबर, 2018 को गुज़री थी.'

भारतीय रेलवे ने बनाया ये पुल

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इस डबल डेकर पुल को भारतीय रेलवे ने बनाया है. इसके नीचले डेक पर दो रेलवे लाइन्स बिछाई गई हैं और ऊपर के डेक पर 3 लेन की सड़क बनाई गई है. देश का ये सबसे बड़ा पुल उत्तर दिशा में धेमाजी को दक्षिण में स्थित डिब्रूगढ़ से जोड़ेगा. गौरतलब बात ये है कि जहां पहले धेमाजी से डिब्रूगढ़ की 500 किलोमीटर की दूरी तय करने में 34 घंटे लगते थे, वहीं इस पुल के ज़रिये अब ये सफ़र महज़ 100 किलोमीटर का ही होगा और इसको तय करने में मात्र 3 घंटे लगेंगे.

पुल की लागत कितनी है?

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इस डबल डेकर पुल को बनाने में कुल 5920 करोड़ की लागत आई है. हालांकि, शुरुआत में इसकी लागत केवल 1767 करोड़ आने का अनुमान लगाया गया था.

सेना को भी मिलेगी मदद

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इस पुल के बनने से उत्तर पूर्वी सीमा पर देश की रक्षा में तैनात सेना को बहुत मदद मिलेगी. ये पुल इतना मज़बूत है कि इस पर से फौजी टैंक भी आसानी से गुज़र सकते हैं. बोगीबील पुल को अरुणाचल से सटी चीन सीमा तक विकास परियोजना के तहत बनाया गया है. भारत-चीन सीमा करीब चार हज़ार किमी लंबी है.

क्या है लोगों की प्रतिक्रिया?

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यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल इमरजेंसी की हालत में ये Bogibeel Bridge बहुत ही मददगार साबित होगा. पहले डिब्रूगढ़ जाने के लिये हम लोग पानी के जहाज़ पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब हर काम में आसानी हो जाएगी. वहीं एक शख़्स ने कहा, अब तक पानी का जहाज़ ही धेमाजी और डिब्रूगढ़ के बीच आवागमन का एकमात्र साधन होते थे. इस पुल को देश का सबसे धीमा प्रोजेक्ट होने की बदनामी झेलनी पड़ी है. लोग ये भी कह रहे हैं कि 2014 के आम चुनावों में बीजेपी का एक बड़ा वादा इस पुल को पूरा करने का भी था. शायद यही वजह है कि 2019 के चुनावों की वजह से इसके बनने की स्पीड को बढ़ा दिया गया हो.

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