कभी पूरी दुनिया हिन्दुस्तान को सोने की चिड़िया के नाम से जानती थी. ये अलग बात है कि अब हमने वो उपाधि खो दी है, मगर अब वो दिन फिर से आ सकते हैं. भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है. सरकार अब सोने के आयात को कम करना चाह रही है. इस वजह से सरकार 15 सालों से बंद अंग्रेज़ी हुकूमनत की सोने की खानों को फिर से शुरू करने की योजना बना रही है. जानकारी के लिए बता दूं कि सोने की खानों में अभी भी करीब 120 अरब रुपये के डिपॉजिट्स बचे हैं.

Source: Topyaps

सोने के आयात से सरकारी खजानों पर काफ़ी प्रभाव पड़ रहा था. भारत सबसे ज़्यादा आयात कच्चे तेल का करता है, उसके बाद सोने का करता है. हालांकि, देश में कच्चे तेल की उपलब्धता कम है, मगर सोने का भंडार अभी भी मौजूद है. कर्नाटक के कोलार शहर में सोने की भरमार है. ब्रिटिश समय से ही यहां खुदाई होती थी. मगर भारतीय सरकार ने 2001 में इसे बंद कर दिया था.

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भारत हर साल करीब 900 से 1000 टन सोने का आयात करता है. सोने का घरेलू उत्पादन बहुत कम 2 से 3 टन प्रति वर्ष है. सोना भारत में लोगों के लिए घरेलू बचत का मुख्य रास्ता है. आमलोग गहनों के रूप में सोने को अपने पास रखते हैं, वहीं कुछ लोग इसे विपत्ति के समय के लिए बचा कर रखते हैं.

कर्नाटक के कोलार खान से निकलता है सोना

बेंगलुरु से करीब 65 किमी. की दूरी पर स्थित दुनिया की सबसे गहरी सोने की खान है. वहां 1880 में ब्रिटिश शासन के दौरान एक ब्रिटिश इंजीनियरिंग कंपनी टेलर एंड संस ने इसका खनन शुरू किया था. हालांकि, उस समय इन खानों से लाभ नहीं मिलता था, मगर सरकार से समर्थन प्राप्त होने के कारण कंपनी अपना काम करती रही. अब इस शहर में अंग्रेज़ों के क्लब, घर और गोल्फ कोर्स देख सकते हैं.

कोलार में स्थित सोने की खानों को फिर शुरु करके सरकार ने एक अच्छी पहल की है. आंकड़ों के मुताबिक, अभी भी इन खानों में करीब 120 अरब रुपये के डिपॉजिट्स बचे हैं. अगर ये निकल जाते हैं, तो आर्थिक स्थिति में सुधार होगा.

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