इंडियन आर्मी ने सेना के जानवरों की निष्फल सेवा को सम्मान देते हुए दिल्ली की पोलो रोड स्थित ऑफ़िसर्स मेस का नाम सबसे अधिक और लम्बे समय से फौज के लिए काम करने वाले खच्चर पेडोंगी के नाम पर रखा गया है. पेडोंगी करीब 30 साल तक भारतीय सेना से जुड़ा रहा था.

HT की एक खबर के मुताबिक़, भारतीय सेना में कार्यरत खच्चर पेडोंगी का नाम सिक्किम के पेडोंग शहर के नाम पर था, वो 1962 में सेना से जुड़ा और 1998 में उसकी मौत हुई. दूसरे खच्चरों, जो उनके खुरों की संख्या की वजह से पहचाने जाते हैं, उनमें से पेडोंगी एक अपवाद था. वो दूसरे खच्चरों से एकदम अलग था.

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रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना की पशु यातायात यूनिट के पास 6,000 से 8,000 तक खच्चरों की एक सेना है. ये खच्चर ऊंचाई पर सवारी और लोड-ले जाने के लिए इस्तेमाल किये जाते थे. इन खच्चरों ने 1999 में हुए कारगिल युद्ध में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आने वाले समय में सेना के ऊंचाई वाले इलाकों में ऑल-टेरेन वेहिकल (एटीवी) लगाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे पशु यातायात यूनिट (एटी) का काम न के बराबर हो जाएगा.

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एक आर्मी ऑफ़िसर ने Bangalore Mirror को बताया, 'खच्चरों को बहुत बुद्धिमान जानवर माना जाता है. अगर आप इनको एक बार रास्ता दिखा दें, तो अगली बार वो आपको रास्ता दिखाएंगे.' इनको सेना में तब भर्ती किया जाता है, जब ये 2-3 साल की हो जाते हैं और उसके बाद इनको निश्चित मायलेज और भारी सामान को तय स्थान पर ले जाने की ट्रेनिंग दी जाती है.

लेफ्टिनेंट जनरल बीएस संधू का मानना है कि पेडोंगी द्वारा सेना में दिए गए योगदान के लिए ये एक उचित श्रद्धांजलि है. संधू ने सबसे लम्बी अवधि तक अपनी सेवा देने के लिए पेडोंगी का नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज कराया है.

पेडोंगी को भारतीय सेना का सबसे अधिक सेवा देने वाला खच्चर माना जाता है.

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