कहा जाता है 'योद्धा पैदा नहीं होते, बल्कि इंडियन आर्मी द्वारा तैयार किये जाते हैं'. वो सरहद पर खड़े हैं, तभी हम अपने घरों में चैन की सांस ले पाते हैं. वो कोई ख़ास इंसान नहीं होते, बल्कि वो भी हमारे आपके जैसे ही आम होते हैं, बस उनकी देशप्रेम और देशवासियों के लिए समर्पण की भावना उन्हें हमसे बड़ा बना देती है. भले ही लोग उनका विरोध करें, उन पर पत्थर बरसायें, फिर भी वो अपना कर्तव्य नहीं भूलते और उनकी हिफ़ाज़त करते हैं. इन जवानों ने एक बार फिर से दो घर उजड़ने से बचा लिए. दरअसल, भारी बर्फ़बारी के बाद एक एम्बुलेंस बुरी तरह फंस गयी थी. उस एम्बुलेंस में एक गर्भवती महिला और बीमार बच्चे के अलावा सात और लोग थे. जवानों ने उन सबको बर्फ़ से निकाल कर उनको नई ज़िंदगी दी.

ये लोग तंगधार से चोवकीबल जा रहे थे कि अचानक एक भयानक भू-स्खलन से इनकी एम्बुलेंस का रास्ता ब्लॉक हो गया और ये लोग फंस गये. ऐसे में एम्बुलेंस बर्फ़ में बुरी तरह दब गई, जिससे ये लोग बाहर निकल पाने में भी असमर्थ थे. 10,000 की ऊंचाई पर हालत तो तब ख़राब होने लगी, जब रात होते ही लगातार तापमान नीचे गिरने लगा.

गाड़ी में बैठी गर्भवती महिला और बीमार बच्चे को हॉस्पिटल पहुंचाना भी ज़्यादा ज़रूरी था. गर्भवती महिला को Anaemia था, इसलिए ये माहौल उसके लिए बहुत ख़तरनाक था. तभी सही समय पर आर्मी की रेस्क्यू टीम वहां पहुंच गई, वहां पहुंच कर उन्होंने सबसे पहले एम्बुलेंस से बर्फ़ हटाई और एम्बुलेंस के आगे जाने का रास्ता भी साफ़ किया. इसके बाद उन्होंने मरीजों को मेडिकल केयर भी उपलब्ध कराया. फिर महिला को नज़दीक के मेडिकल कैंप तक भी ले गये.

समझ में नहीं आता कि इतनी भीषण हालत में भी देश की सेवा में तैनात जवानों का भी लोग विरोध कैसे करने लगते हैं. देश नेताओं और अधिकारियों से नहीं चल रहा, देश इनके कन्धों पर चल रहा है. देश की आर्मी का सम्मान करें और उनका दर्द समझें. इस साहसिक कार्य के लिए इन जवानों को ग़ज़बपोस्ट का सलाम.

Source: Topyaps