बचपन से हम लोग बड़े-बुज़ुर्गों से ये सुनते आ रहे हैं कि बुराई का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है. शायद इन लुटेरों को पहले कभी ये सबक नहीं मिला था. पर चिंता की बात नहीं है. हाल ही में दो डकैतों को ट्रेन में एक आर्मी ऑफ़िसर ने ये सबक सीखा दिया है और अब वो जीवन भर इसे नहीं भूलेंगे.

Source: tripplatform

जी हां ये घटना बीती 6 मई की रात 3:30 बजे की है. इसके बारे में सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट ने अपने ऑफ़िशियल पेज पर लेफ्टिनेंट आशीष की इस बहादुरी की पूरी कहानी शेयर की है, जिसकी बहादुरी से ट्रेन में लूट के इरादे से घुसे डकैतों के हौसले पस्त हो गए और मजबूरन उन्हें ट्रेन से कूदना पड़ा.

पूरी कहानी विस्तार से यूं है कि '6 मई की सुबह करीब 3:30 बजे दो डकैत अमृतसर जाने वाली दादर एक्सप्रेस के सेकण्ड एसी कम्पार्टमेंट में चोरी के इरादे से घुसे. उस समय ये ट्रेन दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर रुकी हुई थी. इन डकैतों ने सोचा कि अंधेरे का फ़ायदा उठाकर ट्रेन में चढ़ना आसान है और क्योंकि सभी यात्री सो रहे होंगे, तो चोरी करने में दिक्कत नहीं होगी.

बस फिर क्या था, दोनों एक महिला यात्री, जो लोअर बर्थ पर सो रही थी, के पास पहुंच गए. पर शायद उनकी किस्मत ख़राब थी कि उनको पता नहीं चला कि एक आर्मी का बहादुर जवान उनकी इस हरक़त पर नज़र लगाए हुए है. जी हां, आर्टिलरी रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट आशीष, जो उसी कम्पार्टमेंट की अपर बर्थ पर लेटे थे ने उन दोनों को देख लिया. तुरंत ही आशीष अपनी आर्मी ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए, इन डकैतों को चोरी करने से रोकने के लिए नीचे कूद पड़े और उनसे भिड़ गए और महिला के सामान को चोरी होने से बचा लिया. साथ ही जमकर इन चोरों की पिटाई भी की.'

इस पोस्ट के अनुसार, 'डकैतों से हाथापाई के दौरान एक डकैत ने आशीष के हाथ पर चाकू से हमला भी किया था. ऑफ़िसर की बहादुरी देखकर दोनों डकैत घबरा गए और ट्रेन से कूद गए जिससे डकैती टल गई.'

बीते मंगलवार शाम को शेयर की गई इस पोस्ट को अब तक करीब 32 हज़ार से ज़्यादा लोग लाइक और करीब 4 हज़ार लोग शेयर कर चुके हैं.

Source: ADGPI - Indian Army