भारतीय संस्कृति ने हमें ढेरों संस्कार विरासत में दिए हैं. हिन्दू धर्म से जुड़े कई ऐसे संस्कार आज भी हम पूरी श्रद्धा के साथ निभाते जा रहे हैं, जो विज्ञान के अनुसार भी काबिलेतारीफ हैं. ज़रा सोचिए कि हमारे पूर्वज कितने बुद्धिमान और जागरूक थे. उन्होंने जीवन के लिए आवश्यक बातों को संस्कार रुपी धागे में पिरोकर हमें पहना दिया, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी संजोया जाता रहा है. आज हम ऐसे ही 10 संस्कारों की बात करेंगे, जो सचमुच ये एहसास कराते हैं कि भारतीय संस्कृति सदियों पहले से हमें वो चीज़ें सिखा रही है, जो आज के विज्ञान ने दुनिया को सिखाई हैं.

1. नमस्ते करना

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हिन्दू संस्कृति में लोग हाथ जोड़ कर लोगों का अभिवादन करते हैं, जिसे हम नमस्कार कहते हैं. इसका मतलब लोगों को सम्मान देना है. इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है. जब हम नमस्कार करते हैं तो हमारे हाथों की हथेलियां आपस में जुड़ती हैं. अंगुलियों के माध्यम से एक प्रेशर पैदा होता है, जो हमारी याददाश्त को मजबूत बनाने में सहायक होता है.

2. पैर छूना

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हिंदू धर्म में इसे आस्था और संस्कार के रूप में देखा जाता है, लेकिन चरण छूने का मतलब है, पूरी श्रद्धा के साथ नतमस्तक होना. इससे विनम्रता आती है और मन को शांति मिलती है. पैर छूने से दो शरीरों के बीच पैर व हाथ के माध्यम से एक सर्किट बनता है, जिससे शरीर में कॉस्मिक एनर्जी का आदान-प्रदान होता है.

3. मंदिर में घंटी बजाना

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शास्त्रों के अनुसार, मंदिर में प्रवेश करने से पहले घंटी बजाने से सभी बुरी शक्तियां दूर होती हैं. लेकिन इसका वैज्ञानिक कारण है कि हमें पूजा करने में एकाग्रता मिलती है और घंटी की आवाज से हमारे शरीर के हीलिंग सेंटर एक्टीवेट होते हैं.

4. झुकना

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किसी के सामने आगे की ओर झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद है. इससे शारीरिक कसरत होती है. झुककर पैर छूने, घुटने के बल बैठकर प्रणाम करने या साष्टांग दंडवत करने से शरीर लचीला बनता है.

5. सिर पर हाथ रखकर आशीष देना

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जब हम किसी आदरणीय के चरण छूते हैं, तो आशीर्वाद के तौर पर उनका हाथ हमारे सिर के ऊपरी भाग को और हमारा हाथ उनके चरण को स्पर्श करता है. ऐसी मान्यता है कि इससे उस व्यक्ति की पॉजिटिव एनर्जी आशीर्वाद के रूप में हमारे शरीर में प्रवेश करती है. इससे हमारा आध्यात्मिक तथा मानसिक विकास होता है.

6. भोजन करते समय पालथी मारना

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जब हम दोनों पैरों को समेटकर बैठते हैं, तो इसे योग की भाषा में सुखासन कहा जाता है. इस अवस्था में बैठकर खाने से शांति मिलती है, जो हमारे डाइजेशन के लिए मददगार होती है.

7. मन्दिर जाना

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मंदिर तो हम सभी जाते हैं लेकिन आपने कभी ये सोचा है कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है. मंदिर की बनावट कुछ इस तरह की होती है कि पृथ्वी के उत्तर व दक्षिण पोल के द्वारा अधिक मात्रा में पॉजिटिव ऊर्जा का निर्माण होता है, जो मनुष्य के लिए बेहद लाभदायक होता है.

8. टीका लगाना

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तिलक लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है, क्योंकि इससे व्यक्त‍ि के आत्मविश्वास और आत्मबल में भरपूर इजाफा होता है. ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है. लोग शांति व सुकून का अनुभव करते हैं. यह कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है. सिर दर्द में कमी होती है.

9. जनेऊ

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रिसर्च में मेडिकल साइंस ने भी पाया है कि जनेऊ पहनने वालों को हृदय रोग और ब्लड प्रेशर की आशंका अन्य लोगों के मुकाबले कम होती है. जनेऊ शरीर में खून के प्रवाह को भी कंट्रोल करने में मददगार होता है. कान पर हर रोज जनेऊ रखने और कसने से स्मरण शक्त‍ि में भी इजाफा होता है.

10. कलावा

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शरीर के प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर गुज़रती हैं. जब कलाई पर कलावा बांधा जाता है तो इससे इन नसों की क्रिया नियंत्रित होती है. इससे त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को काबू किया जाता है. ऐसा भी माना जाता है कि कलावा बांधने से रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और लकवा जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से काफी हद तक बचाव होता है.

तो आप मानते हैं न कि हमारे संस्कार जीवन के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं!