किस्मत किसे कब कहां ले जाए किसी को पता नहीं होता और Niklaus इसका जीता-जागता सबूत हैं. Niklaus को 40 साल पहले उसकी मां अस्पताल में छोड़कर आ गई थी और अब वो स्विट्ज़रलैंड की संसद में बतौर सांसद चुने जाने वाले पहले भारतीय हैं.

Niklaus का जन्म 1 मई 1970 को कर्नाटक के CSI Lombard Memorial Hospital में हुआ था, जो Basel Mission द्वारा चलाया जाता है. Niklaus के जन्म के एक हफ़्ते बाद ही उन्हें एक स्विस जोड़े ने गोद ले लिया था. ख़बरों के मुताबिक, वो महज़ 15 दिन के थे जब उनके नए मम्मी-पापा उन्हें केरल ले आए. करीब चार साल तक यहां रहने के बाद पूरा परिवार स्विट्ज़रलैंड चला गया. Niklaus को अच्छी परविश और ऐजुकेशन देने की ख़ातिर उनके पिता ने बतौर ट्रक ड्राइवर और माली काम किया.

वहीं पिछले सप्ताह पीआईओ-संसदीय सम्मेलन में IANS से बात करते उन्होंने बताया, 'मेरी मां Anasuiya ने मेरे जन्म के तुरंत बाद मुझे Dr. E.D. Pflugfelder को सौंपते हुए, ये अनुरोध किया था कि वो मुझे एक ऐसे दंपत्ति को दें, जो मुझे अच्छा करियर बनाने में मदद करे.'

Niklaus को Nik के रूप में भी जाना जाता है. स्विट्ज़रलैंड की संसद में बात करते हुए Niklaus बताते हैं, 'मैंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कई समाजिक कार्यों में भी हिस्सा लिया. इसके बाद 2002 में वो Winterthur सिटी के नगर पार्षद चुने गए. इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी बताया कि साल 2017 में एंजेलिकल पीपल्स पार्टी की तरफ़ से अल्पसंख्यक दल के टिकट पर वो स्विट्जरलैंड की संसद में एक सांसद के रूप में चुने जाने वाले पहले भारतीय हैं.

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उन्होंने ये भी बताया कि देश में भारतीय मूल का नेता एक्टिव न होने के कारण, अगले एक दशक तक स्विट्ज़रलैंड की संसद में शामिल होने वाले वो एकलौते भारतीय होंगे. बता दें कि Niklaus स्विट्ज़रलैंड की संसद में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के सदस्य भी हैं. Niklaus ने 1992 और 1993 के बीच अमरीका के कोलंबिया शहर में एक अनाथालय में काम किया है.

Niklaus ने अपनी इस सफ़लता के लिए अपनी मां को शुक्रिया कहते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम अपनी मां के नाम पर रखा है.

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