भारत में नदियों को जीवनदायिनी माना जाना जाता है. देश में नदियों का जितना आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक महत्व है, उतना ही सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक भी. यहां की प्रमुख नदियां भारतीय प्राचीन सभ्यता की धरोहर रही हैं और संस्कृति का आधार. नदियों को यहां मां की संज्ञा दी गई है. गंगा से लेकर नर्मदा और कावेरी से लेकर यमुना तक सभी ने भारत की उन्नति में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है. लेकिन बावजूद इन सबके, भारत में कुछ नदियां ऐसी भी हैं, जो अब इंसानों के लिए जीवनदायनी से ज़्यादा मृत्युदायिनी साबित होती हैं. नदियों में आने वाली बाढ़ के कारण आम लोगों ने कई को अभिशाप का काला धब्बा दे दिया है.

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बिहार की कोसी और पश्चिम बंगाल की दामोदर, कुछ ऐसी ही नदियां हैं, जो इन राज्यों में हर साल बाढ़ की विभीषिका से ऐसी तबाही मचाती हैं कि न सिर्फ़ लोगों के आशियाने छीन जाते हैं, बल्कि हज़ारों ज़िन्दगियां तबाह हो जाती है. इन नदियों की बाढ़ से करोड़ों रुपये के जान-माल की भी हानि होती है. कुछ इलाकों की स्थिति ऐसी होती है कि वहां की अर्थव्यवस्था सालों भर चरमराई रहती है. तो चलिए जानते हैं, उन नदियों को जो बाढ़ की विभिषिका में न जाने कितनी तबाही मचाती है.

1. कोसी नदी

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कोसी, बिहार की बर्बादी की नदी. इसे बिहार का 'शोक' कहा जाता है क्योंकि इस नदी में हर साल इतनी भयंकर बाढ़ आती है, जिससे लाखों की संख्या में न लोगों की जान जाती है, बल्कि आर्थिक रूप से काफ़ी नुकसान भी पहुंचता है. इस नदी के गुस्से का शिकार बिहार की बहुत बड़ी आबादी होती है. यह नदी हर साल अपना तांडव दिखाती है. कहा जाता है कि अगर बिहार का विकास नहीं हो पा रहा है, तो इसकी एक मुख्य वजह कोसी की विभीषिका भी है. कोसी नदी को नेपाल में 'कोशी' के नाम से जाना जाता है. यह नदी काफ़ी लंबे समय से लाखों लोगों की बलि लेती रही है.

2. रावी नदी

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रावी नदी, पश्चिमोत्तर भारत और पूर्वोत्तर पाकिस्तान में बहने वाली एक नदी है. यह उन पांच नदियों में से एक है, जिनसे पंजाब का नाम पड़ा. अपनी जल की धार से तबाही मचाने में ये नदी भी कुछ कम नहीं है. बारिश और मानसून के दौरान कश्मीर में भयावह बाढ़ लाने में रावी नदी का अहम योगदान होता है. इसकी तबाही इतनी खतरनाक होती है कि कई लोगों को अपना घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर कर देती है. साल 2014 में इसने जो तबाही मचाई थी, उसकी डरावनी याद अब भी लोगों के जेहन में होगी.

3. चिनाब नदी

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चिनाब नदी, जम्मू-कश्मीर से होती हुई पंजाब राज्य में बहने वाली नदी है. दुनिया का सबसे ऊंचा कोंकण रेलवे पुल कश्मीर में इसी नदी पर बना है. थोड़ी सी बारिश आ जाने पर भी इस नदी में आफत आ जाती है. बारिश में इस नदी का स्तर अकसर खतरे के निशान से ऊपर रहता है. सबसे खास बात ये है कि इस नदी में आई बाढ़ का सबसे ज़्यादा प्रभाव बीएसएफ कैंपों पर होता है और उन्हें इस नदी का गुस्सा झेलना पड़ता है. यह नदी बाढ़ के समय कितनी तबाही मचाती है, इसका अंदाज़ा आपको इसी बात से लग जाएगा कि भारत के कई जवान इसमें बहकर पाकिस्तान की सीमा में चले जाते हैं.

4. कमला नदी

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नेपाल में हिमालय से निकलने वाली कमला नदी को 'घुगरी' भी कहते हैं. यह नेपाल की तराई से होती हुई जयनगर बॉर्डर से बिहार में आती है. यह इतनी भयावह और खतरनाक बाढ़ लाती है कि इससे न सिर्फ़ हज़ारों लोगों का पलायन होता है, बल्कि जान-माल का अथाह नुकसान होता है. मिथिला क्षेत्र में गंगा के बाद इसी नदी का स्थान आता है. गंगा मैया की तरह इसे स्थानीय लोग कमला माई कहते हैं. यह दरभंगा प्रमंडल से होती हुई कोसी में जाकर मिल जाती है, जहां यह और भी विकराल हो जाती है.

5. झेलम नदी

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झेलम उत्तर भारत में बहने वाली एक नदी है. इस नदी का वैदिक कालीन नाम वितस्ता था. यह नदी हिमालय के शेषनाग झरने से निकलती है और वहां से कश्मीर की ओर बहती है. माना जाता है कि 2,103 किलोमीटर तक बहने वाली इसी नदी के कारण ही कश्मीर घाटी का निर्माण हुआ. तेज बारिश और मानसून में यह बाढ़ का भयावह तांडव करती है.

6. सतलुज नदी

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सतलुज, पंजाब में बहने वाली पांच नदियों में से एक है. मानसून के दौरान इस नदी में आने वाली बाढ़ भयंकर तबाही मचाती है. सतलुज में बाढ़ आने से काफ़ी नुकसान होता है. इसमें बाढ़ आने से काफ़ी समस्याएं पैदा हो जाती हैं.

7. बागमती नदी

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बागमती नदी पूर्वोत्तर भारत के बिहार राज्य और नेपाल में बहने वाली एक प्रमुख नदी है. यह नेपाल से लगभग 195 किलोमीटर की दूरी तय कर के बिहार के सीतामढ़ी जिले में प्रवेश करती है. बिहार के तराई क्षेत्रों में प्रवेश करने के बाद यह नदी बाढ़ के दिनों में अकसर अपना प्रवाह मार्ग बदल लेती है. यह नदी इसलिए भी सबसे ज़्यादा खतरनाक है, क्योंकि इस नदी के आस-पास बसने वालों को भी नहीं पता कि इस नदी का बहाव किस ओर होगा और तबाही मचाएगा. यह नदी जब अपना विकराल रूप दिखाती है, तो बिहार के सीतामढ़ी, मुज़फ़्फ़रपुर, दरभंगा और मधुबनी जिलों में संकट के बादल छा जाते हैं. लोगों का जीना मुहाल हो जाता है. जान-माल की जो क्षति होती है, उसके बारे में पूछिये ही मत.

8. ब्रह्मपुत्र नदी

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भारत की सबसे लंबी नदी मानी जाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी भी बाढ़ की विभीषिका के लिए जानी जाती है. लगभग 2700 किलोमीटर लंबी यह नदी तिब्बत, भारत और बांग्लादेश से होकर बहती है. असम में आने वाली बाढ़ की मुख्य वजह ब्रह्मपुत्र ही है क्योंकि इसमें कई सहायक नदियां आकर मिलती हैं.

9. दामोदर नदी

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दामोदर नदी को पश्चिम बंगाल का अभिशाप कहा जाता है. काफ़ी पहले से ही इस नदी में अचानक ही बाढ़ आती रही है और लाखों लोगों को न केवल विस्थापित किया, बल्कि हज़ारों-लाखों लोगों को अकाल मृत्यु दी है. यह नदी पश्चिम बंगाल और झारखंड में बहती है. इस नदी की कुल लंबाई 368 है. शायद इस नदी ने इतनी तबाही मचाई है कि इसी कारण से लोग इसे बंगाल का अभिशाप कहते हैं.

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