हमारे देश में ट्रांसजेंडर्स को थर्ड जेंडर का दर्जा मिल गया है लेकिन आज भी हमारे समाज में उनको सम्मान की नज़र से नहीं देखा जाता. हमेशा उनको दोयम दर्जे का ही समझा जाता है. हालांकि, देश और समाज में अपनी एक जगह और पहचान बनाने के लिए ये लोग समाज के सामने डट कर खड़े हैं. काफी हद तक इनकी अपने हक के लिए लड़ी गई इनकी लड़ाई सफल भी हुई है, तभी तो इनको आज समाज में तीसरे लिंग का दर्जा दिया गया है. आज हम आपको एक ऐसी ही ट्रांसजेंडर महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जो जल्द ही हार्वर्ड यूनीवर्सिटी में लोगों को संबोधित करने वाली हैं.

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क्या आप जानते हैं कि कल्कि सुब्रमण्यम कौन हैं? कल्कि एक ट्रांसजेंडर महिला हैं. कल्कि अब न सिर्फ़ अपने ट्रांसजेंडर समुदाय, बल्‍कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं. आपको बता दें कि कल्‍कि एक मशहूर लेखिका, समाज सेविका, मीडिया पर्सनालिटी और एक्‍टर भी हैं.

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फिलहाल, भारत में वह अपने जैसे और कई ट्रांसजेंडर्स के हकों की लड़ाई का एक चेहरा बनी हुई हैं. वहीं अब वो अपने इस उद्देश्य और प्रयास को वह विश्व पटल तक ले जाने की तैयारी में लगी हुई हैं. और ये बात हमारे देश और पूरे ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए गर्व की बात है कि अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उनको बतौर स्‍पीकर आमंत्रित किया है.

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सूत्रों के मुताबिक़, हार्वर्ड बिजनेस स्‍कूल और हार्वर्ड कैनेडी स्‍कूल की ओर से आयोजित होने वाली दो दिवसीय इंडिया कॉन्‍फ्रेंस में कल्‍कि को एक वक्ता के तौर पर बुलाया गया है. ये कॉन्फ्रेंस 11 फरवरी से 12 फरवरी तक चलेगी. इसकी थीम 'India - The Global Growth Engine,' रखी गई है. कल्कि उन गणमान्य व्यक्तियों के पैनल में शामिल होंगी, जिनको इस कांफ्रेंस के लिए आमंत्रित किया गया है. गौरतलब है कि इससे पहले आयोजित हुई इस कॉन्‍फ्रेंस में एक्टर कमल हासन और शशि थरूर जैसी बड़ी हस्‍तियों को आमंत्रित किया जा चुका है. इस कॉन्फ्रेंस में खास तौर पर एक पैनल डिस्कशन होगा, जिसमें इंडिया में ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के लोगों को किस-किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, पर अपने विचार रखेंगी कल्कि.

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कल्कि ने सबसे पहले खुद को मिले इस सम्मान को अपनी ट्रांस कम्‍युनिटी के साथ शेयर किया. खुद को मिले इस आमंत्रण के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जब 1 जनवरी को उनको ये इन्‍विटेशन मिला, तो वो उसे देखकर काफी दांग और हैरान हो गई थीं. इसके साथ ही वो बताती हैं कि इस निमंत्रण के जरिये उनको एक मौका मिला है अपने ट्रांसजेंडर मूवमेंट इन इंडिया से सबको वाकिफ कराने का.

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उन्‍होंने बताया कि अब वो अपने इस एतिहासिक आंदोलन के बारे में सबको बताएंगी. इसके साथ ही वो इस बात पर भी रोशनी डालेंगी कि कैसे भारतीय आंदोलन पाश्‍चात्‍य सोच से बिल्‍कुल अलग होते हैं. उन्‍होंने कहा कि अब वह ट्रांसजेंडर्स के पक्ष में अपनी आवाज़ को सबके सामने लाएंगी, जो हमेशा इस बड़े समाज के बीच में दबकर रह जाती है.

अब आपको बताते हैं उनके द्वारा किये गए कामों के बारे में

एक भरे-पूरे और धन-धन्य से परिपूर्ण परिवार में जन्म लिया था कल्कि ने. एक ऐसा परिवार जहां बस प्यार ही प्यार बसता था, लेकिन एक अच्छे परिवार में जन्म लेने के बावजूद भी उनको समाज के साथ अपनी पहचान और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ी. ये लड़ाई बेहद ही कठिन थी क्योंकि इस लड़ाई में उनको समाज के साथ-साथ अपने आस-पास के लोगों को भी ये समझाना था कि वो भी एक महिला हैं. बचपन में स्कूल बच्चों सहित टीचर्स तक के तानों और उपेक्षा का शिकार होना पड़ता था उनको. लेकिन ये उनकी हिम्मत ही थी कि उन्होंने इन साब बातों पर ध्यान देने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना उचित समझा.

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मॉस कम्‍युनिकेशन और इंटरनेशनल रिलेशन से डबल मास्‍टर्स करने वाली कल्‍कि ने अपने जैसे ही दूसरे ट्रांसजेंडर्स की मदद करने और उनको समाज में सम्मान दिलाने के लिए शाहोदरी फाउंडेशन की शुरुआत की. इसके अंतर्गत ही केरल के Gender-Neutral फुटबॉल लीग में पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर्स ने एक साथ खेल खेला. बचपन से अपने अस्तित्व की लड़़ाई लड़ रही कल्कि को पहचान तब मिली जब 2015 में भारत सरकार ने उन जैसे सभी लोगों के लिए तीसरे जेंडर को मान्यता दी.

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कल्कि खुद को बहुत ही लकी मानती हैं. वो कहती हैं कि उनके पेरेंट्स ने उनको बहुत प्यार दिया और कभी भी उनको नज़र अंदाज नहीं किया. इसके साथ ही वो बताती हैं कि उनके पेरेंट्स ने उनकी पढ़ाई के मामले में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती, उनके ऊपर भी खूब पैसा खर्च किया.

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