26/11 का वो मनहूस दिन आपको याद होगा ही, जब पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला कर दिया था. करीब 4 दिन तक चली इस मुठभेड़ में आखिरकार एनएसजी कमांडोज़ को आ कर स्थिति को संभालना पड़ा. ये एनएसजी कमांडोज़ का दस्ता भारत की पैरामिलिटरी फ़ोर्स का अंग है. जितनी सुरक्षा हमें अपने देश की सीमा पार के दुश्मनों से करनी पड़ती है, उतनी ही देश के अंदर रह रहे असामाजिक तत्वों से भी करनी पड़ती है. इसके लिए भारत में 7 पैरामिलिटरी फोर्सेज़ हैं, जो सशक्त, सचेत और समर्पित हैं देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए. इन सारी फोर्सेज़ का अधिकार क्षेत्र अलग-अलग है, लेकिन ये गृह मंत्रालय के अंतर्गत ही आती हैं. असम राइफ़ल्स के अलावा, इन सभी बलों का नेतृत्व एक आईपीएस अफ़सर करता है. जानते हैं इन पैरामिलिटरी फोर्सेज़ के बारे में.

1. असम राइफ़ल्स

भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल, असम राइफ़ल्स, उत्तर-पूर्व से घुसपैठ रोकने में एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण रोल अदा करता है. सिर्फ़ यही नहीं, असम राइफ़ल्स भारत-म्यांमार बॉर्डर को भी सुरक्षित रखते हैं.

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2. सीमा सुरक्षा बल (बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स)

बीएसएफ का गठन 1965 में हुआ था और ये आर्मी के साथ कुछ चुनिंदा जगहों की निगरानी करते हैं. जम्मू-कश्मीर में भी बीएसएफ की टुकड़ी बॉर्डर की सुरक्षा करती है.

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3. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ)

पैरामिलिटरी फ़ोर्स के इस दस्ते का गठन 1969 में हुआ था और इनका मूल कार्यक्षेत्र था सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या सरकारी कंपनियों की सुरक्षा करना. एयरपोर्ट पर भी आपको सीआईएसएफ के जवान देखने को मिल जायेंगे.

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4. केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ)

1939 में देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ का गठन हुआ था. इसीलिए आप इनकी मौजूदगी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में देख सकते हैं. इसके अलावा सीआरपीएफ के जवान दंगा रोकने में भी अहम भूमिका निभाते हैं.

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5. भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी)

1962 में गठित, आईटीबीपी का मुख्य उद्देश्य भारत और तिब्बत के बॉर्डर को सुरक्षित रखना था. इसके साथ ही वो भारत-चीन बॉर्डर की भी देखरेख करते हैं.

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6. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी)

1984 में एनएसजी का गठन हुआ था आतंकवाद से सामना करने के लिए. इन्हें चुनिंदा मिशंस के लिए चुना जाता है, जिसके लिए इन्हें स्पेशल ट्रेनिंग भी दी जाती है. 26/11 के मुंबई हमलों में एनएसजी कमांडोज़ की भूमिका बहुत ही अहम थी.

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7. सहस्त्र सीमा बल (एसएसबी)

1963 में गठित, सहस्त्र सीमा बल भारत-नेपाल और भारत-भूटान बॉर्डर पर तैनात रहते हैं. इसके साथ ही वो चुनावों के समय मतदान केंद्रों की भी सुरक्षा करते हैं.

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आज, 23 मार्च, शहीद दिवस पर हम उन सभी सैनिकों और जांबाज़ों का अभिनन्दन करते हैं, जो सदैव देश की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहते हैं. इन पैरामिलिटरी फोर्सेज़ की वजह से ही हम चैन की नींद सो पाते हैं. ग़ज़बपोस्ट की तरफ़ से आप सभी को शहीद दिवस पर वंदे मातरम और जय हिंद.

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