9/11 के बाद अमेरिका की आतंरिक सुरक्षा को गहरा धक्का लगा था. इस हमले की सीधी प्रक्रिया ये रही कि अमेरिकी सेना ने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ पर हमला कर दिया, सद्दाम हुसैन को गिरफ़्तार कर उस पर मुक़दमा चलाया गया और अनिश्चित काल के लिए अमेरिकी सेनाएं इराक़ में रह गईं, जिससे वो 9/11 हमलों के दोषियों को ढूंढ पाएं. इसी कड़ी में, अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी, CIA ने शक के बिनाह पर कई इराक़ी नागरिकों को गिरफ़्तार किया और अबु गरीब जेल में डाल दिया.

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इस कुख्यात जेल की बात करें तो अबु गरीब दुनिया के सबसे खतरनाक जेलों में से एक है. इराक़ की शिकस्त के बाद, इस जेल पर अमेरिकी सेना का कब्ज़ा था. यहां कैदियों को पूछताछ के लिए रखा जाता था. प्रतिशोध की ज्वाला में जलते हुआ अमेरिकी सैनिकों ने भी इंसानियत और हैवानियत के बीच की सारी हदें तोड़ दीं. CIA ने कई संदिग्ध अपराधियों को यहां क़ैद कर के रखा था, लेकिन उनके साथ-साथ कई बेक़सूर इराक़ी नागरिक भी CIA के टॉर्चर की भेंट चढ़ गए.

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ह्यूमन राइट्स कमीशन, एमनेस्टी इंटरनेशनल, एसोसिएटेड प्रेस और कई मीडिया संघटनों ने अमेरिकी सेना द्वारा किये गए टॉर्चर के खिलाफ़ आवाज़ भी उठाई थी. फलस्वरूप, अबु गरीब जेल में कैदियों को दी गयी यातनाओं के आरोप में 11 अमेरिकी सैनिकों को दोषी पाया गया. इनके टॉर्चर का तरीका इतना भयावह था कि कई कैदियों की मौत भी हो गयी.

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अमेरिकी सेना द्वारा टॉर्चर के तरीके (ये तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं)

1. महिला और पुरुष कैदियों को नंगा कर के उनका वीडियो बनाया जाता था.

2. कैदियों को हस्तमैथुन करने पर मजबूर दिया जाता था और उनका वीडियो भी लिया जाता था.

3. थप्पड़ और घूंसे इन कैदियों के लिए आम थे. आर्मी के जवान इन कैदियों पर कूदते भी थे.

4. निर्वस्त्र कैदियों का पिरामिड बनाया जाता था और सैनिक उसके ऊपर से कूदते थे और उन्हें मारते भी थे.

5. पुरुष कैदियों को महिला कैदियों की अंडरवियर पहनने के लिए मजबूर किया जाता था.

6. अलग-अलग सेक्शुअल पोज़िशंस में कैदियों की तस्वीरें ली जाती थीं.

7. बिना कपड़ों के कैदी को एक बक्से पर खड़ा कर दिया जाता था और उसके हाथ-पैर के अंगूठों और गुप्तांगों पर बिजली का झटका दिया जाता था.

8. कैदियों को खूंखार कुत्तों से डराया जाता था. कई बार ये कुत्ते उन्हें काट भी लेते थे.

9. एक कैदी को दूसरे कैदी के साथ मुख-मैथुन करने को कहा जाता था.

10. इस भयानक टॉर्चर के बाद, कुछ अमेरिकी सैनिक इन कैदियों के साथ पोज़ करते और Thumbs Up का साइन दिखाते.

एक आतंकवादी और सैनिक में फ़र्क ये होता है कि सैनिक इंसानियत की एहमियत समझता है. लेकिन जब सैनिक ही इंसान और शैतान में फ़र्क़ करना भूल जाए, तो उसमें और एक आतंकवादी में ज़्यादा असमानता नहीं रह जाती. आक्रोश और प्रतिशोध की ज्वाला सब जला कर राख कर देती है. ऐसी यातनाओं के बाद अगर कोई इंसान ज़िंदा बचा भी, तो अबु गरीब जेल की भयावह यादें उसका पीछा नहीं छोड़ेंगी. ऐसे ही अमानवीय व्यवहार के कारण इंसान हथियार उठाने पर विवश हो जाता है. अमेरिका हमेशा से दुनिया के सामने अपने आप को नेक और न्यायसंगत बताने की कोशिश करता है, लेकिन अबु गरीब में हुआ कैदियों का टॉर्चर, अमेरिका के इस नक़ाब से पर्दा उठाने के लिए काफी है.

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