कभी-कभी लगता है कि भगवान ने शायद सारी परेशानियां और ग़म हमारी झोली में डाल दिए हैं. क्योंकि उस वक़्त न तो हमें दुनियां के बाकि लोगों की तकलीफ़ें नज़र आती हैं और न ही हम अपने अलावा किसी के बारे में सोचना चाहते हैं. वहीं एक लड़का ऐसा भी है, जिसने बचपन से लेकर जवानी तक काफ़ी तकलीफ़ें झेली पर ज़िंदगी से हार नहीं मानी और आज नेशनल टीवी पर नज़र आता है. इस लड़के का नाम है देव मिश्रा!

कौन है देव मिश्रा?

22 वर्षीय देव का जन्म बिहार के बेगुसराय ज़िले के Dhakjari गांव में हुआ था. 3 भाई-बहनों में देव अपने घर में सबसे छोटा है. वो सिर्फ़ 6 महीने का होगा, जब लंबी बीमारी के कारण पिता चल बसे. पिता की बीमारी में सारे पैसे लग जाने के कारण घर में तंगी का माहौल था और अकेली मां पर तीन बच्चों के पालन का ज़िम्मा. पर कहते है न मां तो मां होती है ख़ुद भूखी रह लेगी, लेकिन बच्चों को भूखा नहीं सोने देगी. देव की मां ने भी जैसे-तैसे मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण किया. घर की ख़राब हालत देखते हुए 5 वर्ष की उम्र से देव भी अपनी मां की मदद करने लगा, जिससे उसे घर चलाने में थोड़ी मदद मिल जाये और 8वीं कक्षा तक आते-आते उसे मजबूरन अपना स्कूल छोड़ना पड़ा.

देव की ज़िंदगी अभी शुरु ही हुई थी और अचानक उसकी ज़िन्दगी में एक भयानक मोड़ आ गया. 1 जून 2015 को वो वेल्डिंग का काम करने के लिये हैदराबाद जा रहा था कि तभी बौरापनी स्टेशन पर मौजूद भीड़ के धक्के से वो प्लेटफ़ॉर्म पर गिर पड़ा और हादसे में उसने अपने दोनों पैर गंवा दिये. इससे भी ज़्यादा बुरी बात ये थी कि वो घंटों तक प्लेटफ़ॉर्म पर मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने भी उसकी मदद करना उचित नहीं समझा.

वो बताता है कि 'मैं ख़ून से लथपथ था, लेकिन किसी ने मेरी नहीं सुनी. इसके बाद मेरे दोस्त आए और उन्होंने मुझे अस्पताल पहुंचाया. यही नहीं, डॉक्टर्स ने तो ये तक कह दिया था कि मुझे बचाना नामुमकिन है, लेकिन दुआओं से मुझे दूसरा जीवन मिला और एक महीने अस्पताल में रहने के बाद मैं घर वापस आ गया. इलाज के दौरान मेरे ऊपर करीब 1.5 लाख रुपये का कर्ज़ हो गया था.'

घर पर देव की मां ने उसका बहुत ध्यान रखा और शायद यही वजह थी कि वो कुछ ही महीनों में ठीक हो गया. देव कहता है कि घर आने पर मुझे मेरे पैर जाने से ज़्यादा दर्द अपने भाई का बदला रुख़ देख कर हो रहा था. क्योंकि वो मुझे बेकार और नाकारा समझने लगा था. इसके बाद वो कृत्रिम पैर लगवाने के लिये जयपुर भी गया, लेकिन डॉक्टर्स ने इसे असंभव बता दिया. पर देव ने हालातों से हार नहीं मानी और कुछ करने के लिये वो सपनों के शहर निकल पड़ा.

वहां देव ने कई रातें सड़कों पर भूखे पेट सोकर बिताई. इसके बाद काम की तलाश में सेलिब्रिटीज़ के घर के बाहर बैठने लगा, जंहा अभिनेता जैकी श्रॉफ़ ने उसे 5000 रुपये की मदद की. इसके बाद उसका सामना उस महिला से हुआ जो उसकी ज़िंदगी में भगवान बन कर आई थी. करीब 1 महीने बाद उसकी ज्वैलरी डिज़ाइनर फ़राह ख़ान अली से मुलाक़ात हुई और फ़राह ने उसे 10 हज़ार रुपये की आर्थिक मदद की. इसके साथ ही ये भी कहा कि जब तक मैं ज़िंदा हूं, तुम्हारी मदद करती रहूंगी.

यही नहीं, फ़राह ने 5 लाख़ रुपये देकर देव के कृत्रिम पैर भी लगवाये. देव में काम करने का हुनर था, बस उसे पहचानने की देरी थी. करीब 10 महीने पहले एक डांस प्रैक्टिस के दौरान Instructor विशाल पासवान की नज़र उस पर पड़ी और उन्होंने उससे कुछ Moves करने को कहा. विशाल, देव का डांस देख कर काफ़ी ख़ुश हुए और उस इसे ज़ारी रखने के लिये मोटीवेट किया.

कई स्टेज़ शोज़ करने के बाद आख़िरकार देव को India’s Got Talent में अपना हुनर दिखाने का मौका मिला. शायद इसे ही किस्तम कहते हैं. अपनी ज़िंदगी की कठिनाईयों से सबक लेने वाले देव का कहना कि प्रॉब्लम आपको नहीं आप प्रॉब्लम को भगाइये.