दिल्ली, हैदराबाद, गुवाहाटी और मुंबई में कई मुस्लिम महिलाएं रमज़ान डिनर आयोजित कर रही हैं. इन पार्टियों में सभी धर्मों के लोगों का स्वागत किया जाता है, ताकि वो भी मुस्लिम संस्कृति के बारे में जान सकें.

30 वर्षीय इरम एक डिज़ाइनर और लेखिका हैं. उन्होंने फ़ेसबुक पर लोगों से पूछा था कि कितने लोग कभी किसी इफ़्तार पार्टी में गए हैं. जवाब में उन्होंने पाया कि अन्य धर्मों के ज़्यादातर लोग कभी इफ़्तार पार्टी में नहीं गए हैं. इसी ने उन्हें धार्मिक सौहार्द की ये मिसाल पेश करने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने 11 अन्य मुस्लिम महिलाओं के साथ मिलकर सभी के लिए इफ़्तार पार्टी का आयोजन किया. इरम ने खुद 70 लोगों के लिए पार्टी रखी थी. इनमें से कुछ तो ऐसे थे, जो पहले कभी किसी मुस्लिम व्यक्ति के घर नहीं आये थे.

सी पार्टियों को 'इंटरफ़ेथ' इफ़्तार पार्टी यानि सर्वधर्म इफ़्तार कहा जाता है. दिल्ली-नोएडा की कुल 12 महिलाओं ने मिलकर इस इफ़्तार की शुरुआत की. इसकी खासियत ये थी कि दोस्तों-रिश्तेदारों के अलावा बिलकुल अनजान लोगों ने भी इस इफ़्तार में हिस्सा लिया. यही नहीं, इसे आयोजित करने वाले 12 लोग भी एक दूसरे को व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानते थे.

वो कहती हैं कि लोगों में मुसलमानों को, उनकी तहज़ीब को और मुस्लिम औरतों को लेकर तमाम भ्रांतियां हैं. यहां तक कि एक CSDS स्टडी भी ये साबित करती है कि देश के सिर्फ़ 30 प्रतिशत हिंदुओं का ही कोई करीबी मुसलमान दोस्त है. दो लोगों में नफ़रत तभी पनपती है जब वे एक दूसरे को जानते नहीं हैं. इसलिए उन्होंने ये कदम उठाया कि दोनों धर्मों के लोग एक दूसरे को बेहतर जान और समझ पाएं.

इरम मानती हैं कि आज Islamaphobia (मुस्लिम धर्म से डर और नफ़रत) देश में अपनी जड़ें फैला चुका है. ऐसे में ज़रूरी हो जाता है कि मुस्लिम समुदाय से जुड़ी भ्रांतियों को तोड़ा जाये और इस तरह की पहल की जाये.

वो एक कड़वी याद के बारे में भी बताती हैं, जब पिछले साल ईद पर अपने ससुराल से आते हुए वो अपने हिस्से का मटन नहीं लायी थीं. दरअसल, जिस रास्ते से वो लौट रही थीं, वो दादरी से ज़्यादा दूर नहीं था. उस वक़्त उन्हें भी डर था कि न जाने कब उनका मटन बीफ़ में बदल जाये और उनके साथ कुछ गलत हो जाये.

हिन्दू-मुस्लिम समुदायों में पनप रही नफ़रत को देखते हुए कहा जा सकता है कि ये दोनों धर्मों के लोगों के बीच आई दूरी को पाटने के लिए एक अच्छा कदम है. इरम की पार्टी ख़ास थी, क्योंकि इस पार्टी में स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ-साथ धार्मिक सौहार्द भी परोसा गया था.

Source: Hindustantimes