1974 में एक हॉलीवुड फ़िल्म आई थी, The Girl From Petrovka. ये फ़िल्म George Fiefer की बुक पर बनी है. इस फ़िल्म के एक्टर Anthony Hopkins को अपने कैरेक्टर के लिए तैयारी करने और फ़िल्म के बारे में थोड़ा और समझने के लिए ये बुक चाहिए थी.

Source: cultstories

लेकिन उन्हें कहीं भी ये बुक नहीं मिली. इस बुक को पाने के लिए सारी कोशिशें करने के बाद Anthony जब एक बेंच पर बैठे, तो उन्हें ये किताब वहां पड़ी मिली. जिस बुक को उन्होंने पूरी दुनिया में ढूंढा, वो मिली एक बेंच पर. ये किताब मिलने के बाद Anthony को कुछ ही दिनों में मूवी के शूट के लिए जाते वक़्त एअरपोर्ट में इसके ऑथर, George Fiefner भी मिल गये. George ने Anthony को बताया कि उन्होंने अपनी बुक अपने एक दोस्त को पढ़ने के लिए दी थी, लेकिन उसने किसी सबवे में वो गुमा दी.

Source: ytimg

इस फ़िल्म से जुड़ा ये क़िस्सा बहुत चर्चित हुआ था और लोग आज भी संयोग या Coincidence की बात करते वक़्त इस क़िस्से का ज़िक्र ज़रूर करते हैं.

क्या संयोग (Coincidence) बेवजह होते हैं या इनका कोई कारण है?

संयोग हम सभी के साथ होते हैं. जैसे किसी दोस्त के बारे में सोचना, और उसका मेसेज या कॉल आ जाना. किसी चीज़ के बारे में सोचना और उसका मिल जाना. कभी-कभी लोगों के बचपन का कोई सपना ऐसे ही Coincidentally पूरा हो जाना. कई बॉलीवुड स्टार्स को आपने ये बोलते हुए सुना होगा कि वो किसी कॉफ़ी शॉप में बैठे चाय पी रहे थे और उन्हें डायरेक्टर ने फ़िल्म के लिए साइन कर लिया. जबकि उनका एक्टर बनने का कोई प्लैन नहीं था. कुछ लोगों को एकदम से सफ़लता मिलना भी कई बार संयोगवश ही होता है.

शायद संयोग का कारण है!

अगर इसे ऐसे देख जाए तो पूरी दुनिया के सभी इवेंट्स, छोटी-बड़ी सभी घटनाएं एक तार से जुडी हुई हैं. दुनिया में जो कुछ भी होता है, वो इंटर-कनेक्टेड है और एक चीज़ का प्रभाव दूसरी चीज़ पर पड़ता है. कभी-कभी इन जुड़े हुए तारों में एकदम से स्पार्क होता है. जिसे मशहूर साइकेट्रिस्ट, कार्ल गुस्ताव जंग ने Synchronicity का नाम दिया है.

Source: ultimatelifemagazine

Synchronicity के इसी कॉन्सेप्ट को जंग ने अपने तरीके से कुछ ऐसे समझाया था, कि किसी भी आदमी के आस-पास का वातावरण उससे जुड़ा हुआ होता है. ये एक तरह से लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन की तरह है कि जिस चीज़ को आप पाना चाहते हैं, आपके आस-पास का वातावरण आपके लिए वो पॉसिबल बनाता है.

इस बात को शाहरुख़ ने अपने शब्दों में कुछ यूं कहा था. (वैसे लिखा इसे जावेद अख्तर ने था)

Source: bollywoodlife

टाइम, स्पेस, कॉन्शियस, अनकांशस के बीच एक तार है. कभी-कभी कुछ स्पेशल कारणों से ये किसी इंसान के साथ होने वाली घटना में ये अट्रैक्शन दिखता है. इसी खिंचाव या अट्रैक्शन की वजह से अचानक हुआ एक्सीडेंट, कोई बड़ी आपदा, क़यामत, खराब किस्मत या कोई चमत्कार होता है.

Source: dotelekinesis

कभी-कभी लोगों को दिन में गयी जगह 11:11 दिखता है, कहा जाता है कि ये भी Synchronicity दर्शाने का एक माध्यम होता है. जैसे किसी से हुई अचानक मुलाक़ात किसी की ज़िन्दगी बदल देती है. जो लोग इसे मानते हैं, उन्हें ये संयोग हर जगह दिखते हैं, इंसानों में, किसी चीज़ में, किसी पैटर्न में.

वैसे इस कॉन्सेप्ट पर सवाल करने वाले कई लोग हैं, जो कहते हैं कि संयोग को साबित करने जैसी कोई चीज़ नहीं है. लेकिन ये भी सच है कि संयोग किसी को बुरे नहीं लगते. क्या पता संयोग के रूप में कोई Opportunity आपका इंतज़ार कर रही हो?

या जैसे ये भी संयोग ही हो कि आप ये आर्टिकल पढ़ रहे हों और इसे पढ़ने के बाद, आपको अपने कई सवालों के जवाब मिल जाएं. कुछ भी हो सकता है :)

Source: brightside

Featured Image Source: consciouslifestyle