अबतक आपने कई लोगों को कहते सुना होगा कि प्रभु की लीला न्यारी होती है. लेकिन बीजापुर ज़िले में इसका ताज़ा उदहारण देखने को मिला है. दरअसल, बीजापुर ज़िले के मरी नदी के किनारे केतुलनार की गुड़ी में बामनदेव की एक प्रतिमा स्थापित है. हर दूसरे-तीसरे दिन चोर बामनदेव की मूर्ति को गुड़ी के बाहर फेंक देते हैं. लेकिन प्रतिमा चोरी होने के बाद वापस अपनी जगह पर पहुंच जाती है.

प्रभु की प्रतिमा को लेकर एक रोचक तथ्य सामने है. ग्रामीणों के मुताबिक, 'जो भी चोर बामनदेव की प्रतिमा को गुड़ी के बाहर फेंकने की कोशिश करता है, बामनदेव उसे बुरी तरह दंडित करते हैं और फिर वो चोर परेशान होकर, ख़ुद ही बामनदेव की प्रतिमा को उसकी जगह जाकर रख देता है.'

बताया जाता है मर नदी से 15 मूर्तियां निकली थी. इन मूर्तियों को ग्रामीणों ने गुड़ी में सहेज कर रखा हुआ है. मरी नदी से निकली 16वीं मूर्ति को गांव के निवासी बामन देव कहते हैं. बामन देव की ये मूर्ति बिना धड़ की है. बिना धड़ वाली ये प्रतिमा 12 सेमी लंबी है. बामन देव के सिर को गुड़ी के भैरव प्रतिमा के पास स्थापित किया है.

गांव के गोविंद नाग, भारत, पाण्डू, बलराम और सुखराम बताते हैं, बीते 10 सालों में प्रभु बामन देव को करीब चार बार चुराया जा चुका है. चोरी के 2-4 दिन बाद बामन देव का सिर गुड़ी के बाहर पाया गया है. इन लोगों का मानना है कि जिस भी व्यक्ति ने इसे चुराया होगा, ज़रूर उसे दंड स्वरूप काफ़ी परेशानिया झेलनी पड़ेगी होगी, इसलिए चोर परेशान होकर बामन देव को गुड़ी के बाहर फेंक गया होगा. वहीं इस मामले में पुरातत्व विभाग के उप संचालक जे.आर. भगत का कहना है, 'ब्लैक ग्रेनाइट में उकेरी गई इस प्रतिमा का धड़ गायब है. इसलिए यह बता पाना मुश्किल है कि यह किस देव का सिर है.'

कौन हैं बामन देव और इनसे जुड़े रोचक कुछ तथ्य

बामन देव को भगवान विष्णु का पांचवा अवतार कहा जाता है. कहते हैं, विष्णु अवतारी जब राजा बलि के महल पहुंचे, तो राजा ने उनका बहुत स्वागत किया. बलि ने कहा मेरे द्वार से कोई भी शख़्स खाली हाथ नहीं जाता है. हे ब्राहम्ण पुत्र, आप मेरे द्वार पर आए हैं बताइए आपको क्या चाहिए? बामन देव ने दान में राजा बलि से तीन पग भूमि मांगने पर अपने तीनों पग में आकाश, भूमि और पाताल तीनों को नाप लिया था.

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दान में तीन लोक नापने के पीछे भी एक रोचक रहस्य है. दरअसल, राक्षसों ने स्वर्गलोक पर आक्रामण कर, देवराज इंद्र से उनका सिंहासन छीन लिया था. सिंहासन छिनने के बाद देव इंद्र दुख़ी होकर अपनी माता अदिति के पास पहुंचे और उन्हें अपनी व्यथा सुनाई. माता अदिति ने भगवान विष्णु को अपने पुत्र के रूप में पाने के लिए 12 वर्षों तक कठोर तप किया, ताकि वो अपने पुत्र यानि इंद्र देव को उनका सिंहासन और स्वर्ग वापिस दिला सकें.

माता अदिति की तपस्या से ख़ुश होकर भगवान विष्णु ने बामन देव के अवतार में जन्म लिया और इंद्र देव को स्वर्ग वापस दिला दिया. बामन देव का जन्म श्रावण मास की द्वादशी के दिन हुआ था. बामन देव के जन्म पर सभी देवताओं फूल अर्पित कर उनका स्वागत किया था.

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