कल जब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साबरमती के गौशाला आश्रम से, गौहत्या के नाम पर होने वाली हिंसा की कड़ी निंदा कर रहे थे, तभी झारखंड की राजधानी रांची से सटे रामगढ़ बाज़ार में, आदमखोर भीड़ ने एक मुस्लिम युवक अलीमुद्दीन को पीट -पीट कर मार डाला.भीड़ का कहना था कि अलीमुद्दीन की कार में गाय का मांस है.

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ये कारण अलीमुद्दीन की हत्या के लिए पर्याप्त था. पुलिस जब तक अलीमुद्दीन को अस्पताल ले जाती उनकी मौत हो चुकी थी. यमराज के चंगुल से एक बार कोई बच भी सकता है लेकिन जिसके पीछे भीड़ पड़ जाए उसका बचना मुमकिन नहीं है.

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रामगढ़ ज़िले के गिद्दी थाना क्षेत्र में रहने वाला अलीमुद्दीन मांस व्यापारी था. उसके ख़िलाफ़ कुछ आपराधिक मामले भी दर्ज थे. अलीमुद्दीन एक बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में पहले भी सज़ा काट चुका है.

जब भीड़ ने हल्ला मचाया कि उसकी गाड़ी में गौमांस है, तो लोगों ने उसे गाड़ी से खींच कर मारना शुरू कर दिया. कुछ लोगों ने पेट्रोल छिड़क कर अलीमुद्दीन की गाड़ी में आग लगा दी. ये सब भीड़ सिर्फ़ शक के नाम पर कर रही थी. भीड़ में ही शामिल कुछ लोगों ने कहा कि अलीमुद्दीन रंगदारी के चक्कर में मारा गया है.

दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रहे 16 साल के एक किशोर जुनैद हाफ़िज़ को ट्रेन में भीड़, पीट-पीट कर मार डालती है.मारने वाले महज़ बीस से पच्चीस लोग होते हैं लेकिन सैकड़ों लोग मौत का तमाशा देखते हैं. सीट के लिए शुरू हुआ झगड़ा मौत पर ख़त्म होता है. जो बच जाते हैं, वे जब जुनैद के साथ हुए बर्बरता को बताते हैं, तो रूह कांप जाती है. जुनैद की मौत पर किसी को कोई हमदर्दी नहीं है, क्योंकि वो मुसलमान है, देशद्रोही है. कोई भीड़ कैसे इतनी निर्दयी हो सकती है?

राजस्थान के अलवर में गौ रक्षक पहलू खान को मार डालते हैं. आरोप लगता है कि पहलू खान गाय की तस्करी करते हैं. आरोपियों पर न मुकदमा चलता है, न उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है.भीड़ उन्हें सीधे मौत की सज़ा सुनाती है भीड़ फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट है.

हर हत्या पर जांच बैठा दी जाती है. मृतक के परिवार को कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दे दिया जाता है. आश्वासन देने वाले लोग ये बात भूल जाते हैं कि भीड़ की कोई शक्ल नहीं होती. भीड़ जब किसी की हत्या करती है, तो कोई सबूत हाथ नहीं लगता. कड़ी कार्रवाई करेंगे किस पर?

तमिलनाडु के पशु विभाग के कर्मचारी भी भीड़ के हत्थे चढ़ गए थे. उनके पास गाय खरीदने के सारे दस्तावेज़ थे.जब धार्मिक उन्माद बढ़ता है, तो दस्तावेज़ कौन देखता है? गौरक्षा के नाम पर की जा रही गुंडागर्दी को शायद सरकारी मान्यता मिल गई है.

जुलाई 2016 की बात है. गुजरात के गिर सोमनाथ में जिस तरह दलितों को गाड़ी से बांधकर पीटा गया उसे देखकर आज भी कलेजा कांप उठता है. गुजरात के गिर सोमनाथ में दलितों को गाड़ी से बांध कर पीटा जाता है. वे चमड़े का व्यापार करते थे लेकिन गौभक्तों ने उन्हें हत्यारा समझ कर पीट दिया.

गाय का ज़िन्दा रहना, इंसान के ज़िन्दा रहने से ज़्यादा ज़रूरी है, क्योंकि इस देश की बहुसंख्यक आबादी के लिए गाय जानवर नहीं माता है. माता की रक्षा के लिए बेटा खून की नदी बहा सकता है. जहां कहीं भी गाय का नाम आएगा भीड़ में से ही दो-चार गौ रक्षक किसी टोपी या दाढ़ी वाले को मारने निकल पड़ेंगे. जब मुसलमान मारा जाएगा, तब नपुंसक भीड़ तमाशा देखने के लिए घेर कर खड़ी हो जाएगी.

वो तब तक देखेगी जब तक पिटने वाला मौत के करीब नहीं पहुंच जाता. ये भारत की बहुत भयावह तस्वीर है. साम्प्रदायिकता की आग में डर है कहीं पूरा देश न जल जाए.

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