एक तरफ़ हज़ारों डेरा भक्त पंचकुला में गुरमीत राम रहीम सिंह का समर्थन करने पहुंचे हुए हैं, दूसरी तरफ़ सिरसा में एक आदमी अपने घर में CCTV कैमरे लगवा रहा है. ये उस पत्रकार का बेटा है, जिसने बाबा राम रहीम को एक्सपोज़ किया.

अंशुल छत्रपति 'पूरा सच' नाम का एक लोकल अख़बार चलाता है. 15 साल पहले उसके पिता ने ही इस अख़बार में एक बेनाम ख़त प्रकाशित किया था, जिसमें एक महिला ने बाबा पर यौन शोषण का आरोप लगाया था.

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रेप की ख़बर को जनता के सामने लाने की वजह से, उसके पिता की हत्या कर दी गयी पर वो आज भी अपने पिता के लिए इंसाफ़ की लड़ाई लड़ रहा है. आज जिस कोर्ट में बाबा को आज दोषी करार दिया गया है, उसी कोर्ट में छत्रपति के मर्डर का केस भी चल रहा है. इस केस की सुनवाई अपने आखरी चरण में पहुंच चुकी है.

रेप को बेनक़ाब करने वाले ख़त के प्रकाशित होने के चंद महीनों बाद ही, 24 अक्टूबर 2002 को रामचन्द्र छत्रपति को गोली मार दी गयी थी. ये ख़त एक डेरा साधवी ने तत्कालीन प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम लिखा था.

अंशुल की इंसाफ़ के लिए लड़ाई बहुत लम्बी खिंची और वो अब भी इंसाफ़ की उम्मीद में लड़ रहा है. जब उसके पिता की हत्या कर दी गयी, तब वो मात्र 21 साल का था. मृत्यु शैय्या पर उसके पिता ने डेरा प्रमुख का नाम FIR में लिखवाया था, लेकिन उसे शामिल नहीं किया गया.

अंशुल ने बताया कि 28 दिनों तक उसके पिता अस्पताल में ज़िन्दगी के लिए जूझते रहे थे. आज जब पंचकुला केस का फैसला आना था, तब अंशुल भी अपनी सुरक्षा के लिए इंतज़ाम करने में जुटा था. उसने अपने पिता को इस केस के लिए दम तोड़ते देखा है, उसके साथ भी कुछ ग़लत हो जाने का डर लाज़मी है.

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गौरतलब है कि राम रहीम पर एक और खून का आरोप है. उन पर डेरा सदस्य, रंजीत सिंह की हत्या करवाने का आरोप है, क्योंकि उसने डेरा के सिरसा स्थित मुख्यालय में चल रहे काले कारनामों की पोल खोल दी थी.

कोर्ट का ऐतिहासिक फ़ैसला उन सभी लोगों के लिए एक उम्मीद बन कर आया है, जो सालों से इंसाफ़ की आस लगाये हैं.