दिल न बड़ी खुर्की चीज़ होती है. इस पिटारे में ढंग के ख़्याल आएं न आएं, अतरंगी सवालों और ख़्यालों की बाढ़ सी आई रहती है. मेरे दिल को पता होता है कि इन Thoughts की न कोई दशा है, न दिशा, ये फिर भी बिन-बुलाये मेहमानों की तरह आ धमकते हैं.

इन ख़्यालों को मैं आने से रोक नहीं सकती, इसलिए मैंने सोचा क्यों न इनका कुछ इस्तेमाल कर लिया जाए. आपसे शेयर कर रही हूं, 'कभी-कभी मेरे दिल में' आने वाले ये ख़्याल.

पेश है:

अगर आपको इनका जवाब मिले, तो मुझे ज़रूर देना.

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